गणतंत्र दिवस पर लोकतंत्र का मखौल

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टाइम्स ऑफ़ पीडिया भारत के 72वें

गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिली मुबारकबाद पेश करता

है , सभी पाठक , दर्शक क़ुबूल फरमाएं

Ali Aadil Khan Editor’s Desk

आज तारीखी ईमारत लाल क़िले पर किसानों के एक उग्र गुट द्वारा झंडा फेराया जाने की दुखद घटना की   ज़िम्मेदारी कौन लेगा ? जवाबदेही किसकी होगी और नाकामी किसकी थी , और किसको मिली सफलता यह सब सवाल आपके ज़ेहन में भी आ रहे होंगे …इनका जवाब आपको हमारी बात के अगले हिस्से में मिल जाएगा …इसके लिए आपको थोड़ा सा धैर्य रखना होगा , लेकिन जवाब तथ्यों और सच्चाई  के साथ होगा .

किसान आंदोलन में 26 जनवरी का दिन एक टर्निंग Point होगा ऐसा हमने 24 जनवरी के अपने लेख में कह दिया था , और इसका भी इशारा किया था की किसानों के अहिंसात्मक आंदोलन को sabotage करने का पूरा प्रयत्न होगा , और वो हुआ .संयुक्त किसान मोर्चा के नेता 26 जनवरी 2021 की घटना पर अफ़सोस और दुःख प्रकट कर रहे हैं राजबीर सिंह राजेवाल , योगेंद्र यादव , हन्नान मुल्ला इत्यादि नेताओं ने इस घटना की भर्तसना की और करनी भी चाहिए थी .

हम भी आज की घटना की घोर निंदा करते हुए बताना चाहते हैं , किसान आंदोलन को सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पर 26 नवंबर से 25 जनवरी तक अलग अलग ढंग से sabotage करने की बीच बीच में जो कोशिश थी वो आज की घटना का रिहर्सल कह सकते हैं . विश्व भर में भारत के गणतंत्र और लोकतंत्र की तारीफ होती है , लेकिन 2021 के गणतंत्र पर दुश्मन देशों को आज बग़लें बजने का मौक़ा मिल गया इसका ज़िम्मेदार कौन यह सवाल तो जाइज़ है न

लेकिन एक अच्छी बात यह रही की आज की किसान रैली या Parade करने वाले 90% आंदोलनकारी दिल्ली पुलिस के दिए रुट पर रहे और शान्ति पूर्वक रहे , जो उनकी सफलता का आधार बनेगा .यह सोचकर रूह काँप जाती है अगर बाक़ी 90% किसान भी इन 10% की तरह उग्र होजाते तो ……शायद Lutians Zone की लुटिया मंज जाती .

बलवीर सिंह राजेवाल अपने एक बयान में कह रहे हैं की “किसान मज़दूर संघर्ष समिति” जिसको हम पहले ही संयुक्त किसान मोर्चे से अलग कर चुके हैं , और वही इस पर बज़िद थे किन्तु हमने उनको इससे अलग रहने को कहा मगर वो नहीं माने .बलवीर सिंह ने कहा उनका ओपन ऐलान था हम रिंग रोड पर जायेंगे .

हन्नान मुल्ला ने कहा वो किसान नहीं हैं वो अराजक तत्व हैं , गुंडागर्दी है , साज़िश का अंग है .हम आजकी घटना की घोर निंदा करते हैं और हमारा आंदोलन चलेगा .उन्होंने कहा आजकी गुबडागर्दी की घटना से हमने सबक़ लिया और भविष्य कोई गुंडागर्दी न हो इसकी और दलाल हमारे बीच में न आ सकें हम इसकी चर्चा करेंगे , और सशक्त तरीके से आंदोलन चलएंगे .

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव ने कहा में आज शाहजहां बॉर्डर पर था वहां शांतिपूर्ण तरीके से रैली का आयोजन हुआ , हम अपने तयशुदा समझौते के तहत चले , लेकिन जो आज दिल्ली में सिंघु बॉर्डर या लाल क़िले की जो घटना है वो दुखद , निंदनीय और शर्मसार करने वाली हैं , राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है .जिसको बर्दाश्त नहीं किया जा सकता .

योगेंद्र यादव ने बताया ,लाल की घटना जिसने अंजाम दी वो द्वीप सिद्धू नाम का व्यक्ति है जिससे किसान संयुक्त मोर्चे का कोई लेना देना नहीं है और 3 महीने पहले ही उसको आंदोलन से अलग कर दिया गया था .और सिंघु बॉर्डर पर जो समय से पहले बेरीगेट तोड़कर निकलने की घटना हुई किसान मज़दूर संघर्ष समिति के लोग थे जिनसे संयुक्त मोर्चे का कोई लेना देना नहीं है , लेकिन हमारे दिए हुए Call पर उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया इसलिए हम अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते इसके लिए हम शर्मिंदा है .”मगर सरकारी और संवैधानिक ज़िम्मेदारी सरकार की है ” .

आज ग्रह मंत्री अमित शाह के घर के आस पास सुरक्षा वयवस्था और कड़ी किये जाना स्वाभाविक था . हालाँकि आज पूरे Lutians Zone में ही जिस तरह का सुरक्षा का इंतज़ाम था उसमें मीडिया कर्मियों का  भी आना जाना काफी मुश्किल भरा रहा और आम आदमी तो उधर से गुजरने की सोच भी नहीं सकता था , और वो होना भी चाहिए था जिस तरह से लाल क़िले पर उग्र भीड़ ने झंडा फेराया उससे लगता था की वो कहीं भी पहुँच सकते हैं .हालाँकि लाल क़िले पर झंडा फेरने वाले व्यक्ति को देख रहे सुरक्षा कर्मियों का सुकून और इत्मीनान बता रहा था कि मानो उसको पारी खेलने का मश्वरा पहले ही हो चुका हो, जिसके इमकान कम हैं किन्तु शक ज़रूर है .   

Deep Sidhu flag being hoisted at Red Fort

लाल क़िले की प्राचीर से कुछ ही देर पहले प्रधानमंत्री अपना भाषण देकर निकले थे सुरक्षा के वहां भी कड़े इंतज़ाम रहे होंगे ,वो सुरक्षा कर्मी इस उग्र भीड़ को काबू क्यों नहीं कर सके ?इनको इतना आसानी से झंडा क्यों फेरने दिया गया ये सब सवाल भी आगे उठाये जाएंगे .

आपको याद होगा जब 26 नवम्बर को सिंघु बॉर्डर पर किसान जत्थों को रोकने के लिए और दिल्ली में घुसने से रोकने के लिए लाठी चार्ज और आंसू गैस तथा पानी की तेज़ बौछार की गयी और सडकों को खोद दिया गया था . तब हरियाणा सरकार की काफी निंदा हुई थी  , इसपर गोदी मीडिया में एक समाचार चला था की लाल क़िला या इंडिया गेट पर खालिस्तान का झंडा फेराने की कोशिश को नाकाम बनाने के लिए यह क़दम उठाया गया . Canada में किसी संस्था ने कहा था की इस बार 26 जनवरी को खालिस्तान का झंडा इंडिया गेट पर लहराया जाएगा . क्या वो सच होगया ? या खालिस्तानी Narative को सच बनाया गया ? ये भी सवाल किये जाएंगे . लेकिन जो हुआ वो शर्मनाक था .

आज सभी मंत्रियों और VVIPs की सुरक्षा बढ़ाये जाना भी स्वाभाविक था , लेकिन आम नागरिक और Emergency में निकलने वाले लोगों को जो परेशानियों का सामना करना पड़ा वो काफी दुःख भरा रहा .लोग दिन भर अपने मरीज़ों को लेकर घूमते रहे मारे मारे .

कई लोग हमसे मदद मांगते रहे किन्तु हम भी मजबूर थे और पुलिस को VVIP सुरक्षा तथा law and Order को संभालना प्राथमिकता थी .काश आम जन की भी पुलिस ने सुध ली होती और ये उग्र Group आजकी घटना अंजाम न देता तो गणतंत्र का मज़ा ही कुछ और आता . दरअसल गणतंत्र का मतलब तो यही होता है कि जनता की सुविधाओं को प्राथमिकता मिले ,देश कि सम्प्रभुता ,एकता और शक्ति का प्रदर्शन हो , जनता के हित कि योजनाओं के किर्यान्व्यन का संकल्प हो , और सेवक तथा प्रधान सेवक जनता कि सुरक्षा के लिए मैदान में हों  , किन्तु यह हमारे यहाँ संभावनाओं से भी परे की बात है ..

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