नई दिल्ली, 20 अगस्त । दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की वसंत विहार स्थित संपत्ति को एक बिल्डर को बेचने के 2016 के एक आर्बिट्रेशन अवार्ड को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर ने कहा कि ललित मोदी ये साबित करने में असफल रहे कि एकल आर्बिट्रेटर को इस मामले में फैसला करने का अधिकार नहीं था।
कोर्ट ने कहा कि शुरुआत में वो ललित मोदी की याचिका को मंजूर करने जा रहे थे, लेकिन याचिका पर काफी नजदीक से गौर करने पर अपना फैसला बदला। विवाद वसंत विहार स्थित 32 पश्चिमी मार्ग स्थित 858 वर्ग गज की संपत्ति का है। बीडीआर बिल्डर्स ने 2009 से 2012 के बीच ललित मोदी की आर्थिक रूप से मदद की थी। इसके बाद 2014 में दोनों पक्षों के बीच करार हुआ कि ललित मोदी वो संपत्ति बेच देंगे। बाद में इस विवाद को आर्बिट्रेशन में भेज दिया गया।
दोनों पक्षों ने विवाद सुलझाने के लिए 2016 में संयुक्त रूप से वकील नरेश गुप्ता को आर्बिट्रेटर नियुक्त किया। आर्बिट्रेटर ने नवंबर, 2016 में फैसला किया कि ललित मोदी करार की शर्तों का पालन करते हुए बीडीआर बिल्डर्स के डायरेक्टर राजेश गुप्ता को संपत्ति का कब्जा सौंपें। दोनों पक्षों ने आर्बिट्रेटर के आदेश पर अपनी सहमति का हस्ताक्षर भी किया, जिसमें कहा गया था कि वे इसे चुनौती नहीं देंगे, लेकिन ललित मोदी ने इस आर्बिट्रेशन के आदेश को चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने ललित मोदी की याचिका को खारिज करते हुए बीडीआर बिल्डर्स को संपत्ति सौंपने का आदेश दिया।