दिल्ली औद्योगिक नीति-2026 को कैबिनेट की मंजूरी, 1,000 करोड़ रुपये की मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना भी स्वीकृत

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर । मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली मंत्रिमंडल ने दिल्ली औद्योगिक नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। दस वर्षों के लिए तैयार की गई इस नीति का उद्देश्य राजधानी को स्वच्छ, ज्ञान आधारित और उच्च तकनीक वाले औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री उद्यमश्री योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों में 1,000 करोड़ रुपये के प्रावधान को भी स्वीकृति दी गई है। सरकार का दावा है कि नई नीति से निवेश आकर्षित करने, उद्योगों के आधुनिकीकरण और रोजगार सृजन को गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बुधवार को जारी जानकारी के अनुसार, नीति में सूचना प्रौद्योगिकी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर, अनुसंधान एवं विकास, स्वास्थ्य सेवाएं, शहरी लॉजिस्टिक्स, सर्कुलर इकोनॉमी, प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग, कौशल विकास और एमएसएमई आधुनिकीकरण सहित 10 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इन क्षेत्रों में पूंजीगत निवेश, कार्यालय किराया, नई नियुक्तियों, कौशल विकास, अनुसंधान, ऊर्जा दक्षता और तकनीकी उन्नयन के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली औद्योगिक नीति-2026 का उद्देश्य राजधानी को उन्नत तकनीक, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर, स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास तथा आधुनिक विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत स्वच्छ और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे निवेश और रोजगार दोनों में वृद्धि होगी।

नीति के तहत आईटी, आईटीईएस और डिजिटल सेवाओं को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कार्यालय किराये, क्लाउड सेवाओं और नई नियुक्तियों पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। वहीं ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों को डिजिटल ढांचे, अनुसंधान एवं विकास, प्रमाणन और रोजगार सृजन के लिए विशेष सहायता मिलेगी। डेटा सेंटर क्षेत्र के लिए पूंजीगत निवेश, जल संरक्षण आधारित कूलिंग सिस्टम और साइबर सुरक्षा अनुपालन पर भी सहायता का प्रावधान किया गया है।

अनुसंधान एवं विकास, परीक्षण सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को भी विशेष प्रोत्साहन मिलेगा। बड़े अस्पतालों, वेलनेस परियोजनाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाणनों पर वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसी प्रकार शहरी लॉजिस्टिक्स, कोल्ड चेन और हरित ऊर्जा आधारित ढांचों को भी बढ़ावा देने की घोषणा की गई है।

सर्कुलर इकोनॉमी और अपशिष्ट प्रबंधन के तहत पुनर्चक्रण, ई-कचरा प्रबंधन और जैविक कचरा प्रसंस्करण परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई क्षेत्र में तकनीकी आधुनिकीकरण, ऊर्जा दक्षता और सौर ऊर्जा अपनाने के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

नई नीति में महिला उद्यमियों और महिला कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को अधिकांश योजनाओं में अधिक वित्तीय सहायता मिलेगी। महिला कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले संस्थानों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि कौशल विकास कार्यक्रमों में महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

नीति के तहत ‘इन्वेस्ट दिल्ली’ को निवेशकों के लिए एकल संपर्क केंद्र बनाया जाएगा। यह एजेंसी निवेशकों को परियोजनाओं की स्थापना, मंजूरियों, प्रोत्साहन राशि जारी कराने तथा शिकायत निवारण से जुड़ी सहायता एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगी। दिल्ली उद्योग मित्र पोर्टल के माध्यम से यह व्यवस्था निवेश संबंधी प्रक्रियाओं को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने का काम करेगी।

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