भारत में फिर से दिखेंगे 70 साल पहले लुप्त हुए चीते.

दुनिया में सबसे तेज दौड़ने वाला एशियाई चीता करीब 70 साल पहले भारत में विलुप्त घोषित किया जा चुका है, लेकिन अब फिर से इसका दीदार किया जा सकेगा. साउथ अफ्रीका से इन चीतों की पहली खेप इस साल अगस्त में लाई जा रही है. पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक, इस दौरान 5-6 चीतों को दक्षिण अफ्रीका से लाया जाएगा और उन्हें मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में रखा जाएगा. ये अभ्यारण भोपाल से लगभग 340 किलोमीटर दूर चंबल क्षेत्र में 750 किलोमीटर इलाके में फैला है.

पहला मौका है, जब इतने बड़े किसी मांसाहारी जीव को एक से दूसरे महाद्वीप लाया जा रहा है. चीतों को पिछले साल नवंबर तक लाने की योजना थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसमें देरी हुई. वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने बताया कि अफ्रीकी चीतों का पहला बैच जब भारत के माहौल में ढल जाएगा, तब आने वाले दशकों में 35-40 चीतों को देश भर में अलग-अलग जगहों पर रखने की संभावना है.

पर्यावरण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक्सप्रेस को बताया कि इन एशियाई चीतों को भारत लाने के लिए दक्षिण अफ्रीका के साथ समझौता हो चुका है और सभी कार्यवाही पूरी कर ली गई हैं. अब विदेश मंत्रालय से अंतिम मंजूरी का इंतजार है.

दक्षिण अफ्रीका से विशेषज्ञों का एक दल 15 जून को भारत आकर चीतों को रखने की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेगा.

दुनिया में चीतों की दो प्रजातियां हैं. एशियाई चीते भारत और ईरान जैसे कई एशियाई देशों में पाए जाते थे जबकि अफ्रीकी चीते अफ्रीका के कई देशों में पाए जाते हैं. पूरी दुनिया में सिर्फ़ अफ्रीका में ही गिने-चुने चीते बचे हैं. 2009-10 में चीते को अफ्रीका से लाकर दोबारा भारत में बसाने की कोशिशें शुरू हुई थी. चीता भारत से उस समय लुप्त हो गया था, जब महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने 1947 में भारत में आखिरी तीन दर्ज एशियाई चीतों का शिकार किया था. 1952 में भारत सरकार ने चीता को विलुप्त घोषित कर दिया. चीता देश में शिकार और रहने-खाने की समस्याओं की वजह से विलुप्त होने वाला एकमात्र बड़ा मांसाहारी जीव है.

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