बोंडी बीच हमला: जब इंसानियत ने डर पर जीत हासिल की
यहाँ दो Characters थे, ज़ालिम और मुजाहिद और दोनों एक ही मज़हब से थे लेकिन कामयाब बचाने वाले को कहा गया, जबकि ज़ालिम को कायर !
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में बोंडी बीच पर हुआ हमला एक भयावह घटना थी, लेकिन उसी अफरा-तफरी के बीच इंसानियत की एक मजबूत तस्वीर भी उभरकर सामने आई। इस तस्वीर का नाम है अहमद अल अहमद।
अहमद उस दिन किसी मिशन पर नहीं थे न ही उनके हाथ में कोई हथियार था।वह तो बस एक आम दिन की तरह, एक दोस्त के साथ कॉफ़ी पीने निकले थे।
लेकिन अचानक सामने जो मंजर था, उसने एक आम इंसान को असाधारण नायक में बदल दिया।
जब अहमद ने देखा कि एक हमलावर निर्दोष लोगों पर गोलियां चला रहा है, तो उन्होंने डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने न भागने का फैसला किया, न छिपने का
बल्कि आगे बढ़ने का साहस दिखाया। हमलावरों का ताल्लुक़ पाकिस्तान से बताया जा रहा है।
अहमद ने अपनी जान की परवाह किए बिना हमलावर को रोका और उससे बंदूक छीन ली। इस दौरान उन्हें कंधे और हाथ में गोली भी लगी, लेकिन उनकी हिम्मत नहीं डगमगाई। कल तक जो अहमद ज़िंदगी और मौत के बीच थे आज अल अहमद की हालत स्थिर है और उनका इलाज जारी है। उनके परिवार के मुताबिक, उनकी सेहत में सुधार हो रहा है।
अहमद के पिता मोहम्मद फ़तेह अल अहमद कहते हैं, “मेरा बेटा किसी योजना के तहत नहीं बढ़ा था। वह अपनी अंतरात्मा, अपनी भावनाओं और अपनी मानवता से प्रेरित होकर आगे बढ़ा।”
बोंडी बीच की यह घटना बताती है कि नायक हमेशा वर्दी में नहीं होते। कभी-कभी वे आम कपड़ों में, आम ज़िंदगी जीते हुए सिर्फ सही वक्त पर सही फैसला लेते हैं।ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने भी अहमद की बहादुरी और निडरता को सलाम किया और उनको हीरो का लक़ब दिया।
अहमद अल अहमद की बहादुरी और अमल हमें याद बताती है कि हिंसा के सबसे अंधेरे पल में भी इंसानियत की रोशनी जल सकती है या जलाई जा सकती है। यहाँ दो characters थे और दोनों एक ही मज़हब और विचारधारा से थे लेकिन लेकिन कामयाब बचाने वाले को कहा गया, जबकि ज़ालिम को कायर ।

