भूमिपूजन और पेटपूजा ,आस्था और भूक का खेल

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विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक कहे जाने वाले देश भारत के प्रधान मंत्री ने अयोध्या राम मंदिर भूमि पूजन के अवसर पर दोहराया किस तरह से गरीब, पिछड़े, दलित, आदिवासी सहित सभी वर्ग के लोग एकसाथ मिलकर श्री राम की​ विजय, श्री कृष्ण गोवर्धन को उठाने, और गांधीजी के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन को चलाने जैसे कार्यों का सशक्त माध्यम बने। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण भी लोगों की मदद और योगदान से शुरू हुआ है।

काश इस अवसर पर व्यापक मन से प्रधान मंत्री इसका पश्चाताप कर लेते कि हम स्वराज लाने में , ग़रीबो , आदिवासियों,दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को दिलाने में नाकाम रहे हैं , कोरोना काल में लोक डाउन के दौरान भूक से मरने वालों के प्रति अपनी संवेदना और दुःख प्रकट कर देते.

गाँधी का नाम लिया ही था तो गोडसे को अपना हीरो मानने वालों को नसीहत कर देते कि भविष्य में गोडसे का गुणगान करने वालों और सांप्रदायिक बात करने वालों से सख्ती से निबटा जाएगा और साथ ही 135 करोड़ देश वासियों के प्रधान मंत्री की हैसियत से बाबरी मस्जिद के नाम से आवंटित ज़मीन पर जाकर भी उसका संगे बुनियाद रखने की बात ही कर देते , लेकिन ये सब उनके अजेंडे में था ही नहीं , जो था वो बोल दिया और कर दिया , किन्तु जनता सब जानती है .मगर फिर उल्लू बन जाती है शायद यही जादू है मोदी का .

आपको तो याद है न ये वही श्री राम हैं न ,,,,,जिन्होंने अपने साम्राज्य में शान्ति और सद्भाव तथा अम्न के लिए सिंहासन त्याग दिया था ,और 14 साल का बनवास ले लिया था , मर्यादा पुषोत्तम राम ,,,, किन्तु राम के भक्त मोदी जी और उनकी cabinet के कई मंत्री , अपने जुमले ही त्यागने को तैयार नहीं हैं जिनसे समाज का अम्न बर्बाद होता है , सिंहासन त्यागने की बात ही छोड़ दें ,,,, उल्टा कई राज्यों में सत्ता जुगाड़ और जनता की पसंद को रौंदकर क़ब्ज़ा ली गयी . हमें मालूम है कुछ लोगों के पास इसका जवाब होगा किन्तु तर्गसंगत (वाजिब ) नहीं होगा , नैतिक और संवैधानिक नहीं होगा .अगर है तो बात करें …..

श्री राम के चरित्र का स्मरण करते हुए प्रधान मंत्री ने कहा कि वह हमेशा सत्य पर टिके रहे,,,,, (और मोदी सरकार झूट पर टिके रहने का संकल्प ले चुकी है , 2014 में जितने भी चुनावी वादों की घोषणा की गयी थी उनमें से उन कार्यों को करने में सारा समय लगा दिया जिनसे ग़रीब ,मज़दूर , आदिवासी ,दलित या अल्पसंख्यक के बिलकते बच्चों और बूढ़ों की भूक दवा और शिक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा का दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है ……….

बल्कि आम आदमी और ग़रीब के छोटे रोज़गार और मज़दूरियाँ छीन ली गयी हैं .GDP यानि Gross Domestic Products आज तक के सबसे निचले पायदान पर आ गिरा है , आपको बता दें GDP किसी भी देश की आर्थिक सेहत को मापने का सबसे जरूरी पैमाना है , इसका ऊपर जाना और नीचे गिरना देश की आर्थिक हालत को दर्शाता है , आज हमारा देश तारिख की सबसे कम GDP पर आ गिरा है जो इंतहाई चिंता का विषय होना चाहिए था , मगर नहीं है .

मोदी जी अपने भाषण में कह रहे थे ,,,,,श्री राम ने सामाजिक सद्भाव को अपने शासन का आधार बनाया …..जबकि आज राम के भक्तों की सत्ता धारी पार्टी के सांसद , विधायक और कार्यकर्ता साम्प्रदायिकता और नफरत बनाये रखना चाहते हैं , यह जग ज़ाहिर है कुछ भी छुपा नहीं है , प्रमाण मजूद हैं । काश वास्तविक राम राज होता जिसमें सत्ता का लालच नहीं था , स्वार्थ , भेद भाव नफरत द्वेष नहीं था ……तो देश के 40 करोड़ मज़दूर भी चैन की बांसुरी बजा रहे होते …मगर अभी तो उनपर डंडा बज रहा , घंटा , थाली , ताली बज रही . ग़रीब के घरों में सब्ज़ी छोंकने को तेल नहीं है और दिए जलवाने की बात हो रही है .

मोदी कहते हैं भगवन राम अपनी प्रजा से समान रुप से प्रेम करते थे लेकिन गरीबों और जरूरतमंदों के लिए उनके हृदय में विशेष दया भाव था (राम भक्तों की सरकार में प्रजा को वर्गों ,समुदायों में बाँट कर रखा जाना राजनीती और कूटनीति समझी जा रही है , और देखते ही देखते देश का २० करोड़ से ज़्यादा मज़दूर और ग़रीब सड़क पर आगया , 2 वक़्त कि रोटी से महरूम होगया , देश की संपत्ति चंद घरानो पर सिमट कर रह गयी है ,ऐसे में भगवन राम के के साथ विश्वासघात हो रहा है ,,,,जिसका introspection (आत्मनिरीक्षण ) होना चाहिए ,,,,अच्छा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए मित्रों )।

हमारे वज़ीर इ आज़म साहब इस बात पर जोर दे रहे थे कि मंदिर का निर्माण आपसी प्रेम और भाईचारे की नींव पर होना चाहिए।जबकि राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के मुद्दे को लेकर देश में ३००० के आसपास सांप्रदायिक दंगे हुए हज़ारों देश वासियों कि जानें गईं अरबों रुपयों की संपत्ति जली , कारोबार लुटे , इज़्ज़तें नीलाम हुईं . आज जब विपक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को चाहे अनचाहे क़ुबूल कर लिया ऐसे में इस बात का कोई औचित्य नहीं है कि मंदिर का निर्माण आपसी प्रेम और भाईचारे की नींव पर होना चाहिए .

देश में हर तरफ नफरत और द्वेष ही देखने को मिल रहा है .इंसानियत के रिश्ते टूट गए हैं , पडोसी पडोसी को दुश्मन की नज़र से देखता है .मार्किट और बाजार बात गए हैं कॉलोनियां अलग होगी हैं , बहुत सी कॉलोनियों में एक ख़ास समुदाय के लोगों को प्लाट न देने के sign board लगा दिए गए हैं , सब्ज़ी के ठेलों तक को सांप्रदायिक बना दिया गया है जो देश ने देखा ….

मोदी जी कह रहे थे कि ‘सबका साथ’ और ‘सबका विकास’ के साथ, हमें ‘सबका विश्वास ‘हासिल करना होगा और आत्म-विश्वास से भरा आत्मानिर्भर भारत बनाना होगा।लेकिन यहाँ एक बड़ा सवाल देश के 60 % से ज़्यादा लोगों के मन में पैदा हो रहा है क्या वास्तव में आज सबका विकास है ?? और विश्वास जीता गया है , ? अलबत्ता सबका साथ ज़रूर सरकार को मिल रहा है .

रही आत्मानिर्भर भारत बनाने की बात तो बेटा अपना खर्च बाप की जेब से बीवी पति की जेब से और नौकर मालिक की जेब से निकालकर कहने लगा है कब तक हम आपके ऊपर निर्भर रहेंगे अब हम आत्म निर्भर हो गए हैं , लूट का माहौल है देश में करोड़ों नौजवान बेरोज़गार होगया है .

और अब वो अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है .लोकदोन के दौरान राशन की गाड़ियों को सड़क पर लुटते आपने भी देखा ही होगा ..बक़ौल BJP के बड़े नेता सुब्रमण्यम स्वामी के देश ग्रह युद्ध की तरफ बढ़ रहा है .

अब यह नहीं पता यह उनका नजरिया था या उनसे यह कहलवाया गया था .उनके अलावा कई नेता यह बात कह चुके हैं . खुदा करे ऐसा न हो ,,,चूंकि ग्रह युद्ध का नतीजा सीरिया , यमन , इराक़ अफ़ग़निस्ता और क्यूबा जैसा ह आता है क्या आप भी वही चाहते हैं ????

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