भारतीय अध्यात्म परम्परा विश्वभर में श्रेष्ठ—राज्यपाल

राज्यपाल श्री बागडे ने ‘अखिल भारतीय पूर्णवाद युवा फोरम’ सम्मेलन में भाग लिया

भारत ने दी विश्व में ज्ञान परम्परा की दृष्टि

भारतीय अध्यात्म परम्परा विश्वभर में श्रेष्ठ—राज्यपाल

जयपुर, 1 मार्च। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने रविवार को मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में अखिल भारतीय पूर्णवाद युवा फोरम और पूर्णकन्या प्रतिष्ठान द्वारा आयेाजित ‘युवा सम्मेलन’ में भाग लिया।
राज्यपाल श्री बागडे ने इस दौरान ‘पूर्णवाद विचारधारा’ से जुड़े महान दार्शनिक एवं आध्यात्मिक आचार्य डॉ. आर. पी. पारनेरकर तथा डॉ. वी. आर. पारनेरकर को स्मरण करते हुए कहा कि पूर्णवाद जीवन से जुड़ा आलोक है। उन्होंने भारतीय अध्यात्म परम्परा को विश्व की महान देन बताते हुए कहा कि भौतिक जीवन के प्रत्येक पक्ष में पूर्णवाद से ही समग्र संतुष्टि और संतोष भाव को प्राप्त किया जा सकता है।
राज्यपाल ने ईशावास्योपनिषद के पूर्णमिदम् शांति पाठ का उल्लेख करते हुए कहा कि सृष्टि अपने आप में पूर्ण है। इसलिए पूर्ण से पूर्ण भी यदि निकाल दिया जाता है तो मूल पूर्णत्व में कोई कमी नहीं आती। उन्होंने भारतीय वैदिक, विज्ञान और खगोल विद्या के उत्कर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्यभट्ट ने शून्य का सटीक मान ही विश्व भर को नहीं दिया बल्कि गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत और पृथ्वी गोल होने का वैज्ञानिक तथ्य बहुत पहले ही विश्वभर को बता दिया था।
श्री बागडे ने संतुलित और प्रसन्नचित जीवन के लिए पूर्णता के भाव को सभी स्तरों पर अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को ‘व्यष्टि नहीं समष्टि’ भाव के साथ ‘विकसित भारत’ के संकल्प में सहभागिता निभाने पर जोर दिया।
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