सरकार के राजपत्र में प्रकाशित किए गए हैं।
उपायुक्त
नेहा सिंह ने बुधवार काे बताया कि वास्तविक पनीर में दूध की वसा या मिल्क सॉलिड्स की जगह वनस्पति
तेल, रिफाइंड वसा या अन्य गैर-डेयरी सामग्री से तैयार उत्पाद को पनीर के नाम से बेचना
कानूनन अपराध है। जिले के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरर्स और क्लाउड किचन संचालक ऐसे
पनीर का निर्माण, भंडारण, बिक्री या अपने व्यंजनों में इस्तेमाल न करें। ग्राहकों को
निर्धारित मानकों के अनुरूप असली डेयरी पनीर ही उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने
बताया कि निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले उत्पाद को घी के नाम से भी नहीं
बेचा जा सकता। पूजा का घी, हवन का घी, दीया घी, वनस्पति घी या कुकिंग घी जैसे नामों
से गैर-मानक उत्पाद बेचकर ग्राहकों को भ्रमित नहीं किया जा सकेगा। वनस्पति वसा या तेल
से बने मार्जरीन और फैट स्प्रेड को मक्खन या माखन के नाम से बेचना और परोसना भी प्रतिबंधित
है। उपायुक्त
ने कहा कि मिठाई निर्माताओं और हलवाइयों को पैक की गई मिठाइयों पर इस्तेमाल की गई वसा
या तेल की स्पष्ट जानकारी देनी होगी। यह बताना जरूरी होगा कि मिठाई देशी घी में बनी
है या वनस्पति वसा अथवा तेल में।
उन्होंने
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को जिले के खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच करने
के निर्देश दिए हैं। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित उत्पाद जब्त कर नियमानुसार
नष्ट किए जा सकते हैं। इसके अलावा जुर्माना और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत
अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रतिबंध
निर्धारित गुणवत्ता वाले असली डेयरी घी और मक्खन पर लागू नहीं है। इसका उद्देश्य गैर-मानक
और भ्रामक नामों से बिक रहे उत्पादों पर रोक लगाकर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और हितों
की रक्षा करना है। उन्होंने लोगों से खाद्य उत्पाद खरीदते समय लेबल और गुणवत्ता की
जानकारी जांचने की अपील की।