अपुन को क्या?

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journalist pramod agarwal

✍️ वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद अग्रवाल

असली नोटों से उद्योग पतियों की ऋण माफी और नकली नोटों से बाजार का संचालन और फर्जी आंकडो से तीसरी अर्थव्यवस्था, यही हमारा सच है. लेकिन…

अपुन को क्या करना है, अपुन तो बहुत मजे में है, मस्त फुकट का खाना, संसद मे भी गाली बक जाना, जहाँ तहां खुदवाना, हिंदुराष्ट्र बनवाना, बाकी मुमकिन का नारा लगाना.

देश के वित्तमंत्री राज्यमंत्री ने संसद में बताया कि विगत ग्यारह वर्ष के मोदी कार्यकाल मे सरकारी बैंक ने उद्योग पतियों का लगभग 17 लाख करोड रुपया राईट आफ कर दिया है, लेकिन अपुन को क्या, डूबा तो डूबा ये तो सरकार का पैसा है हमारा थोडे ही है।

नोटबंदी से आतंक की कमर तोडने और पाकिस्तानी नकली नोटों को बाजार से हटाने वाली सरकार के अनवरत चल रहे कार्यकाल में नोटबंदी के बाद से अब तक सिर्फ पांच सौ रूपये के 37% नोट जो बाजार में हैं नकली है.

लेकिन अपुन को क्या, अपने पास तो पांच सौ का नोट आता ही नहीं जिनका हो भुगते, अपने को तो मुमकिन सरकार ने बताया है कि देश की जीडीपी आठ प्रतिशत दर से बढ रही है, जो विश्व में सबसे तेज है, भले ही अपुन को नहीं मालूम की जीडीपी का मतलब क्या होता है।

 

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