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दुःख में डूबा अंकिता का परिवार और सड़कों पर जनता का दिखा ग़ुस्सा

दुःख में डूबा अंकिता का परिवार और सड़कों पर जनता का दिखा ग़ुस्सा

अंकिता नौकरी मिलने के बाद खुश थी , लेकिन मुतमईन नहीं थी ,अंकिता के रिश्तेदारों में नाराज़गी

Dehradoon// ::देश में चलने वाले दुसरे स्लोगन्स और नारों की तरह बेटी बचाओ का नारा भी फ़ैल हो चुका है , या यूँ कहें इस मैदान में भी सरकारें फ़ैल हो गयी हैं …क्योंकि देश में महिलाओं के साथ कुकर्म के बाद हत्या के मामलों का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है .

अब जिस तरह उत्तराखंड के श्रीनगर में अंकिता के साथ कुकर्म हुआ वो इसी Failure का हिस्सा है . मगर यह दिलचस्प यह है कि हर एक सरकार अपने सुशासन के लिए अपनी पीठ थपथपाती रहती हैं |

अंकिता भंडारी मेहनती व अनुशासित छात्रा थी। 12 वीं कक्षा की परीक्षा में 88 % अंकों से पास कर के उसने देहरादून से एक वर्षीय होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया था। अंकिता ने पारिवारिक परिस्थितियों को बदलने के लिए नौकरी की राह चुनी थी.|

तहसील यमकेश्वर के गंगा भोगपुर स्थित एक रिजॉर्ट में उसको नौकरी भी मिल गयी अंकिता नौकरी मिलने के बाद बहुत खुश थी।इसी बीच उसके सपने साकार हो पाते उससे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई। ज्वाइनिंग के दिन वह अपने पिता के साथ गंगा भोगपुर के वनतारा रिजॉर्ट भी गई थी।

मन में सपनों को संजोये अंकिता रफ़्ता रफ़्ता अपनी सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ ही रही थी कि अचानक उसकी मौत की खबर ने परिवार को झकझोर कर रख दिया . और उसके बाद रविवार को एनआईटी घाट पर अंकिता भंडारी का अंतिम संस्कार कर दिया गया.|

ऋषिकेश में अंकिता की कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी. बीजेपी के नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य पर अंकिता की हत्या का आरोप है. पुलिस ने इस सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ़्तार भी किया है.

शनिवार अंकिता के शव का पोस्टमॉर्टम ऋषिकेश एम्स में हुआ था . इसके बाद अंकिता का परिवार शव के अंतिम संस्कार के लिए ऋषिकेश से लगभग चार घंटे की दूरी पर अपने पैतृक गांव पहुँचा. परिवार वाले अंकिता के शव को लेकर जैसे ही अपने गांव पहुँचे, लोगों का आना हुजूम इकठ्ठा हो गया .

जैसे-जैसे वक़्त बीतता गया लोगों का आना-जाना बढ़ने लगा,और तब तक अंकिता के अंतिम संस्कार करने का परिवार का इरादा भी बदल गया. परिवार ने पुलिस प्रशासन के सामने तीन माँगें रखीं और उनके पूरा होने पर अंकिता का अंतिम संस्कार करने का इरादा बन गया .

परिवार की मांगों में एक मांग थी कि अंकिता की मौत का परिवार को उचित मुआवज़ा मिले , परिवार के एक सदस्य के लिए सरकरी नौकरी मिले और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मामले की जल्द सुनवाई कर अभियुक्तों को फांसी की सज़ा होनी चाहिए . प्रशासन और परिवार के बीच रविवार पूरे दिन इन माँगों को लेकर वार्ता (Negotiations) चलती रही.

अंकिता के घर मौजूद भीड़ और प्रदर्शनकारी अंकिता के दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग कर रहे थे और पोस्टमॉर्टम की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की जा रही थी.

इसी बीच शाम लगभग साढ़े पांच बजे के आस-पास अचानक कुछ पुलिस अधिकारी मोर्चरी (शव गृह) के गेट से निकल कर दावा करते हैं कि अंकिता के पिता से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की बात हो चुकी है.

 हालात बदलते हैं और कुछ ही पल में चारों तरफ खड़े पुलिसकर्मी मोर्चरी को घेर लेते हैं और वहां से अंकिता के शव को एक एंबुलेंस में रखकर पिता वीरेंद्र सिंह और भाई अजय सिंह को बिठाकर अंतिम संस्कार करवाने के लिए रवाना हो जाते हैं.

थोड़ी देर के लिए हाथरस की स्टोरी लोगों के सामने चलने लगी , क्योंकि यहाँ पुलिस अपनी Custody में अंकिता की चिटा का अंतिम संस्कार करना छह रही थी .और UK पुलिस प्रशासन का दावा था कि परिवार की सभी मांगें मान ली गई हैं.

इस बीच एडिशनल एसपी शिखर सुयाल ने मीडिया को बताया,कि “घरवालों की जो मांगें थीं, उसको लेकर सीएम साहब और अंकिता के पिता के बीच फोन पर बात हो गई थी, क्या बात हुई ये बात सीएम साहब या अंकिता के पिता को ही मालूम है, लेकिन वह (अंकिता के पिता) बेटी के अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए थे.”

हालांकि पुलिस के इस रवैये पर अंकिता के रिश्तेदारों में नाराज़गी बनी हुई है और गॉंव के लोग कह रहे हैं कि अंकिता और उसके परिवार के साथ इन्साफ नहीं हुआ है .

बहरहाल जैसे जैसे अंकिता कि चिता कि आग ठंडी होती जाएगी वैसे वैसे ये मुद्दा भी देश के दुसरे मुद्दों कि तरह ठंडा होजायेगा ,निर्भया की तरह अंकिता की अस्थियों का विसर्जन हो जायेगा और समाज भी कामों में मगन हो जायेगा मगर अंकिता के माँ बाप के जीवन में अंकिता की यादों अगन जलती रहेगी .

शासन प्रशासन अगले चुनावों में मगन होजायेगा और बस यह सिलसिला चलता रहेगा जब इन्साफ करने वालों कि हुकूमत नहीं आएगी , तो इन बादशाहों से इन्साफ और न्याय की उम्मीद तो नहीं की जासकती जिनकी सियासत का आधार ही अन्याय और भ्रष्टाचार एवं स्वार्थ हो .

अलबत्ता दुनिया को इंतज़ार है किसी कल्कि अवतार और मुंसिफ हुक्मरान का जो तमाम इंसानों को उनका हक़ दिलाये और सबके साथ बराबरी और इन्साफ का मामला करे . जय हिन्द

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