आरएसएस ने प्रणव को पहनाई काली टोपी?

प्रणब मुखर्जी की संघ को उनके घर में नसीहत, भारत में नहीं चलेगी हिंदू राष्ट्र विचारधारा 

आरएसएस IT सेल ने प्रणव को फोटोशॉप द्वारा पहनाई काली टोपी ,हालाँकि RSS ने इसको बताया साज़िश

 

नागपुर: पूर्व राष्ट्रपति और वरिष्ठ कोंग्रेसी नेता प्रणब मुखर्जी के नागपुर में संघ के मुख्यालय  पर संघ के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करने के फैसले पर देश के सियासी गलियारों में चर्चा जारी है . गुरुवार की शाम को उन्होंने जो भाषण दिया उसका हर कोई अपने-अपने हिसाब से मायने निकाल रहा है. प्रणव दा के नागपुर पहुँचने से पहले कांग्रेस सहित उनकी बेटी शर्मिष्ठा भी असहज नज़र आरही थीं .

 

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि आरएसएस के प्रोग्राम में डॉ.मुखर्जी का भाषण किसी को याद नहीं रहेगा हां, उनकी तस्वीर का इस्तेमाल जरूर किया जाएगा. लेकिन कुशल राजनेता मुखर्जी ने बेबाक अंदाज़ में संघ के कार्यक्रम में अपने ‘उच्चस्तरीय’ भाषण के जरिये संघ के घर में जाकर कई नसीहतें दें डालीं.जिसका टाइम्स ऑफ़ पीडिया पहले से इशारा करचुका था .हिंदी हिन्दू हिन्दुस्थान का नारा देने वाली संघ के घर में प्रणब मुखर्जी ने अपना भाषण अंग्रेजी में दिया ,जिसपर किसी संघ नेता को कोई आपत्ति नहीं हुई , शायद अंग्रेज़ों से पुराणी दोस्ती याद आरही होगी . मगर बीच-बीच में वह अपनी मातृभाषा बांग्ला के मुहावरों का इस्तेमाल भी कर रहे थे. हालांकि पहले डॉ. मुखर्जी  ने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार को भारत माता का सच्चा सपूत भी कहा. यह बात उन्होंने विजिटर डायरी में लिखी है.

 

हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को अपनी विचारधारा का केंद्र मानने वाले संघ के मंच पर पूर्व राष्ट्रपति ने भारत की बहुलतावादी संस्कृति को ही देश कि खूबसूरती बताया .

 

उन्होंने कहा आरएसएस को समझना चाहिए कि राष्ट्र की आत्मा बहुलवाद और पंथनिरपेक्षवाद में बसती है.

 

प्रणब मुखर्जी ने प्रतिस्पर्धी हितों में संतुलन बनाने के लिए बातचीत का मार्ग अपनाने की जरूरत बताई. और साफ़ किया कि घृणा से राष्ट्रवाद कमजोर होता है और असहिष्णुता से राष्ट्र की पहचान ख़त्म हो जाएगी.

 

उन्होंने आगे कहा, ‘सार्वजनिक संवाद में भिन्न मतों को स्वीकार किया जाना चाहिए.’

एक सफल सांसद व प्रशासक के रूप में अपने लम्बे राजनीतिक जीवन की कुछ सच्चाइयों को साझा करते हुए प्रणब ने कहा, ‘मैंने महसूस किया है कि भारत बहुलतावाद और सहिष्णुता में बसता है.’ लिहाज़ा इससे कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए .

 

उन्होंने कहा, ‘हमारे समाज की यह बहुलता सदियों के पैदा हुए साझा विचारों से घुलमिल कर  बनी है. पंथनिरपेक्षता और समावेशन हमारे लिए विश्वास का विषय है. यह हमारी मिश्रित संस्कृति है जिससे हमारे राष्ट्र का निर्माण हुआ है ‘.

 

महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के दर्शनों की याद दिलाते हुए मुखर्जी ने कहा कि राष्ट्रीयता एक भाषा, एक धर्म और एक शत्रु का बोध नहीं कराती है.बल्कि यह 1.3 अरब लोगों के भीतर एक सार्वभौमिकतावाद है जो अपने दैनिक जीवन में 122 भाषाओं और 1,600 बोलियों के अंदाज़ का इस्तेमाल करते हैं.और ये सब सात प्रमुख धर्मो का पालन करते हैं और तीन प्रमुख नस्लों से आते हैं और एक व्यवस्था से जुड़े हैं.इनको अलग नहीं किया जासकता .

 

उनका एक झंडा है. साथ ही भारतीयता उनकी एक पहचान है और उनका आपस में कोई शत्रु नहीं है. यही भारत को विविधता में एकता की पहचान दिलाता है.”

प्रणव जी कि नसीहतों का कितना सकारात्मक असर आरएसएस के प्रशिक्षित कैडर लेंगे इसका तो नहीं पता किन्तु उनकी नागपुर यात्रा के सम्बन्ध में कांग्रेस में पैदा होने वाली बैचेनी का ज़रूर खात्मा होगया होगा .टॉप ब्यूरो 

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