आफ़ात काल है आज का यह आपातकाल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पत्रकारों को उनकी बेहतरीन पत्रकारिता के लिए रामनाथ गोयनका अवॉर्ड देते हुए कहा था कि आपातकाल को हमें नहीं भूलना चाहिए और उसके महज़ एक दिन बाद ही सरकार ने एनडीटीवी इंडिया को एक दिन के लिए बैन करने का फरमान जारी कर दिया। शायद वो यह कहना चाहते थे कि सभी देशवासी ,मुख्यतया मोदी सरकार के खिलाफ लिखने या बोलने वाले आपातकाल को न भूल जाएँ उसको ज़िंदा करने केलिए ही हम लोग आये हैं ।

 

देश की सेक्युलर और ग़ैरतमंद  जनता पर हिन्दू राष्ट्र को लागू करने और लोकतंत्र कि जड़ों को कमज़ोर करने तथा संविधान को बदलने के लिए आपातकाल थोपना ज़रूरी भी है ,  क्योंकि आसानी से देश की अवाम संविधान की गरिमा और देश कि एकता और अखंडता को छिन्न भिन्न  नहीं होने देगी , और वो मोसुलौनी व सावरकर के शर्मिंदा ख्वाब को ताबीर करने के लिए एड़ी चौटी कि जान लगा देंगे , जिस ख्वाब की ताबीर में सिर्फ खून खराबा और विनाश है ।लगभग 100 साल की लंबी कोशिश के बाद आज संघ कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ना चाहेगी जिसमें वो अपने एजेंडे को पूरा न कर ले ।

 

ऐसे में देश की विपक्ष कांग्रेस की भूमिका एहम रहेगी  ,देश के हालात रफ्ता रफ्ता आपातकाल की तरफ बढ़ रहे हैं विपक्ष मौजूद सरकार पर सियासी आक्रमण की जगह अक्सर बचाव की स्तिथि में दिखाई देते हैं उसकी २ कारण नज़र आते हैं या तो राहुल खेमे में कोई सलाहकार या कोई और ख़ास है जो RSS  का कैडर है ,इस बात की चर्चा भी आम है की कांग्रेस में अच्छी खासी तादाद संघी विचार धारा की प्रवेश कर चुकी है । दुसरे कांग्रेस के कार्येकर्ताओं और पार्टी आला कमान के बीच काफी फासला है जो दशकों से बना हुआ है ।इस फासले को दूर  करना पार्टी की ज़रुरत है  , कुल मिलाकर विपक्ष LEADERSHIP मज़बूत नहीं है , वरना देश की सबसे पुरानी पार्टी का हाल ये न होता जो आज है  ।

 

खैर अब तो सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष की टीम को क्रीज़ पर जमने का काफी मौक़ा दिया जा रहा है और एक बड़ा स्कोर बनाने का पूरा चांस है ,कोनसा मौक़ा ? जैसे संविधान व लोकतंत्र को पैदा किया जा रहा खतरा , महिलाओं को खतरा , अल्पसंख्यको ,दलितों और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को खतरा ,देश में बढ़ती असहिष्णुता ,शिक्षा का भगवाकरण ,साथ   ही पूँजीवाद , साम्राजयवाद और साम्प्रदायिकता जैसे नासूर को बढ़ावा , जैसे मुद्दे मोदी सरकार को फॉल ऑन खेलने पर मजबूर कर सकते हैं , मगर विपक्ष की टीम पूरी तरह से न तो तैयार है और न ही आपस में कॉर्डिनेशन बहुत अच्छा है यही वजह राहुल गाँधी की काफी मेहनत के बावजूद कुल मिलाकर प्रदर्शन अच्छा नहीं है ।

 

होसकता है कांग्रेस खेमे को हमारी यह बात मायूस करे मगर हमारा मक़सद उसको मज़बूत करना है ताकि मोदी सरकार देश में हिन्दू राष्ट्र के एजेंडे को कामयाब न होने दिया जाए जो खुद हमारे हिन्दू भाइयों के पक्ष में नहीं है यह बात सभी सेक्युलर हिंदुस्तानी जानता है , हालांकि कभी कभी हमको ऐसा लगता है की कांग्रेस जान बूझकर मोदी सरकार को हिन्दू राष्ट्र के एजेंडे पर अमल करने के लिए और देश में आपातकालीन स्तिथि आने देने के लिए छूट देरही है ताकि NDA का भी इसी तरह सफाया होजाये जैसा कांग्रेस का इमरजेंसी के बाद हुआ था ।

 

माना जा रहा है कि NDTV पर पाबंदी , जो अपनी बेबाक , न्यायसंगत , निष्पक्ष तथा बेलाग पत्रकारिता की वजह से  समाज में अपना स्थान बना चुका है और संघ तथा फ़ासिस्ट विचार धारा का मुखालिफ भी  है या यूँ कहे की उस विचार धारा को धारा शाही करदेने की कोशिश करता रहा है देश की सियासत में टर्निंग पॉइंट का काम करसकता है।लकिन यह समझ नहीं आया जिस एयर बेस या रक्षा संबंधी अड्डों को मोदी सरकार ने पाक कि जांच टीम को बुलाकर खुद  मुआयना कराया हो ,उसी पठान कोट एयर बेस के बाहर खड़े होकर NDTV के CORRESPONDENT द्वारा की गयी रिपोर्टिंग को देश द्रोह के दर्जे में रखकर मोदी सरकार अभिवियक्ति की आज़ादी पर पाबंदी के सिवा और क्या साबित करना चाहती है ?

 

ZEE TV के डायरेक्टर और मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट सुभाष चंद्रा ने ट्वीट किया कि एनडीटीवी इंडिया पर एकदिवसीय प्रतिबंध नाइंसाफी है, यह सजा बहुत कम है। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ के लिए उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाना चाहिए था। मेरा तो यह भी विश्वास है की अगर एनडीटीवी इंडिया न्यायालय में जाए तो उसे वहां से भी फटकार ही मिलेगी।

मुझे तो लगता है यदि हालात पर देश की सेक्युलर जनता ने काबू पाने के लिए तत्काल (फ़ौरन) एकजुटता न दिखाई तो देश में आपातकाल के हालात आफ़ात काल में बदल जायेंगे और देश व जनता का  भारी नुकसान होगा और देश में विनाश ,लिहाज़ा आज ज़रुरत इस बात की है देश की सभी सेक्युलर संस्थाएं , सियासी पार्टियां और अवाम , मुट्ठी भर सांप्रदायिक लोगों को अपनी एक जुटता से सबक़ सिखाएं और उनकी सियासी ताक़त को कमज़ोर करें ।आज  जो लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं याद रखें नफरत व साम्प्रदायिकता की इस आग से वो भी नहीं बच पाएंगे जो बहुत तेज़ी से चल रही है । EDITOR ‘S  DESK

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