डॉ कफील की रिहाई रासुका पर क़ानूनी हथोड़ा

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दोस्तों आज दिनांक 01 sep २०२० को अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने Dr कफील के Habeas Corpus Writ case में सुनवाई करते हुए 42 Page पर आधारित एक बड़ा और एहम फैसला किया जिसमें कहा गया की DR कफील के खिलाफ investigative Agencies वो Meterial पेश नहीं कर पाईं जिसकी बुनियाद पर Dr कफील को जेल में रखा जाए , Hona’ble HC ने यह भी mention किया की Dr कफील द्वारा AMU में दी गयी स्पीच को बारीकी से सुनने के बाद ऐसा कुछ नहीं मिला है जिसकी बुनियाद पर NSA (National Security Act ) जैसी धरा लगाई जाए . लिहाज़ा कोर्ट डॉ कफील को रिहा करने का आर्डर करती है .

चुनांचे अब समाज के ज़रूरतमंद वर्ग की सेवा कर पाएंगे DR कफील जिसके लिए वो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को भी लिख चुके हैं ,उन्होंने जेल से एक लेटर PM मोदी को लिखकर कहा था ,, अगर में बाहर होता तो corona काल में मानवता की मदद करता ,….

आज के बड़े फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत डॉक्टर कफील को 6 माह हिरासत में रखने और उसे बढ़ाए जाने को गैरकानूनी करार दिया . और डॉक्टर कफील खान को तुरंत रिहा करने के आदेश जारी कर दिए हैं.

कोर्ट ने फैसले में कहा, ‘वक्ता (कफील) सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे थे और इस दौरान उन्होंने कुछ उदाहरण दिए। लेकिन उस पर कहीं से भी हिरासत में लेने की संभावना भी नहीं बनती थी। डॉक्टर कफील का भाषण हिंसा या नफरत वाला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अखंडता और नागरिकों के बीच एकता बढ़ाने वाला था।’

कितना फ़र्क़ है कार्यपालिका और न्यायपालिका के बयानों में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ आप कह सकते हैं , कार्यपालिका कफील के भाषण को राष्ट्र विरोधी कहती है तो माननिये HC अल्लाहाबाद उनकी स्पीच को देश में एकता बढ़ने वाला कहता है .

आपको बता दें कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि दिसंबर में भाषण देने के बाद फरवरी में कफील खान पर रासुका क्यों लगाया गया। कफील की रासुका की अवधि गत 6 मई को तीन महीने के लिये बढ़ाई गई थी। गत 16 अगस्त को अलीगढ़ जिला प्रशासन की सिफारिश पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने गत 15 अगस्त को उनकी रासुका की अवधि तीन माह के लिये और बढ़ा दी थी।

अब देखना यह होगा की HC के इस तारीखी फैसले के बाद डॉ कफील और उसकी परिवार को इस बीच जो प्रताड़नाएं या मुश्किलें सहनी पड़ीं , और उनका उनके परिवार का जो Harracement हुआ उसके लिए कोर्ट किस तरह से जांच एजेंसियों के ज़िम्मेदारों को सजा सुनाता है या इस मामले में कफील के परिवार के नुकसान की भर पाई करता है ???

हम अपने दर्शकों की मालूमात के लिए Habeas corpus के बारे में यहाँ थोड़ी जानकारी शेयर करना चाहेंगे …… दोस्तों
बंदी प्रत्यक्षीकरण को अंग्रेजी में हैबियस कार्पस (Habeas corpus) कहा जाता है जिसका शाब्दिक अर्थ है ….. शरीर लेकर आओ। हिंदी Term का भी यही अर्थ होता है कि बंदी को न्यायालय के सामने पेश किया जाए। इस रिट के द्वारा न्यायालय ऐसे व्यक्ति को जिसे निरुद्ध किया गया है या कारावास में रखा गया है , न्यायालय के सामने हाज़िर किया जा सकता है ,,,,और Court उस व्यक्ति के Detain किये जाने के कारणों की जांच कर सकता है।

यदि कारावास का कोई Legal Justification नहीं है तो उसे बा इज़्ज़त बरी कर दिया जाता है।तो आरोपी को तत्काल जेल से रिहा किया जा सकता है .यह Habeas Corpus writ का सारांश हुआ ….यह writ सबसे पहले इंग्लैंड में लगाई गयी थी जिसके माध्यम से प्रत्येक नागरिक की state या किसी अन्य संस्था या व्यक्ति द्वारा निरुद्ध किये जाने पर रक्षा की जा सकती है ।

दोस्तों आपको बतादें की …

डॉ कफील की रिहाई के सम्बन्ध में कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने ‘मुख्‍यमंत्री योगी को लेटर लिखा, इसके माध्‍यम से डॉक्‍टर कफील खान की पीड़ा का ज़िक्र करते हुए कहा की वो अब तक लगभग 450 से ज्‍यादा दिन जेल में गुजार चुके हैं.प्रियंका गाँधी ने डॉ कफील को न्‍याय दिलाने में उनकी पूरी मदद करने का भी आश्वासन दिया था .

लेटर का अंत उन्‍होंने इस संदेश से किया -मन में रहिणों, भेद न कहिणों, बोलिबा अमृत वाणी, अगिला अगनी होईया , हे अवधू आपणा होइबा पाणी. इसके मायने हैं किसी से भेद न करो, मीठी वाणी बोलो , यदि आपके सामने वाला आग बबूला होरहा हो तो ,,,, हे योगी तुम पानी बनकर उसे शांत करो.

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