धन काला मगर कपड़े सफ़ेद ….

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धन काला मगर कपड़े सफ़ेद .

देश में काला धन और सफ़ेद कपड़ों का मिलन पुराना है , यानी काला धन अक्सर उन्ही के पास होता है जिनके कपडे सफ़ेद होते हैं (आध्यात्मिक और मज़हबी लोगों को छोड़कर) और कभी कभी कुछ लोग इनमें भी काला धन वाले मिल जाएंगे….यह एक विडंबना है की सफ़ेद कपडे शरीफों और पाक दामन लोगों का लिबास होता था ,आज तमाम चोर, धोकेबाज़ और काला बाज़ारी वाले लोग सफ़ेद वस्त्र पहनने लगे हैं और वो भी कलप लगे पहनते हैं .

 

देश का मज़दूर , किसान , ग़रीब या औसत दर्जे का नागरिक सफ़ेद खादी के चमचमाते कपडे पहन ही नहीं सकता और अगर कोई अपनी मेहनत  से कमाए पैसों से शौकिया खादी के सफ़ेद कलप वाले कपडे पहन रहा है तो इनकी तादाद बहुत कम है और वो सिर्फ शौकिया है जो बेचारा दिन भर मेले कुचले कपड़ों में अपने काम में मसरूफ रहता और शाम को अपना शौक़ पूरा करने या दिल के बहलाने के लिए सफ़ेद खादी के कलप लगे कपडे पहनकर 2 घंटे बाद उतार देता है ,अगले दिन फिर वही , इस तरह वो 40 रूपये में धुले कपड़ों को कम से कम 4 दिन चलाकर पैसे वसूल करता है ,.

 

मगर दिन में 2 और 3 जोड़े बदलने वालों को क्या कहेंगे आप ? ये वही लोग हैं जो शायद काले धन वाले हैं या उनकी सर परस्ती करने वाले लोग हैं .क्या स्विस बैंक में पैसा जमा करने वाले भी सफ़ेद वस्त्र धारी ही हैं ? अनुमान एहि है सुपारी या सूट वाले भी होसकते हैं …

 

ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार स्विस बैंक में भारतीय अकाउंट होल्डर्स ने 2017 में पिछले सालों के मुक़ाबले 50 .2 % ज़्यादा रक़म जमा की है .जो 7000 करोड़ तक पहुँच गयी है .अच्छा यह देश के बैंक छोड़कर स्विस में ही क्यों रखते हैं काला धन . अगर वो काला नहीं तो देश में सरकारी बैंकों को  निवेश के लिए क्यों नहीं देते ये अमीर खाता धारक . चलिए इसको आप समझिये इस लिंक पर जाकर :

आपको याद होगा जब देश की आम जनता बैंकों की लाइन में लगकर अपनी रक़म जमा करा रही थी और दिन व रात लाइन में खड़े रहने की परेशानियों का सामना करके अपनी मेहनत की कमाई को जमा करा रहे थे या निकाल रहे थे  जिसके चलते 100 से ज़्यादा मौतें भी हुईं , ठीक उसी के आसपास देश का एक वर्ग सफ़ेद लिबास में काला धन ठिकाने लगाने की फिराक में लगा हुआ था आज जो स्विस बैंक का डाटा आया है उसमें काला धन जमा करने वालों की लिस्ट भी बढ़ी है और कुल पैसा भी . कल तक काले धन पर कांग्रेस को घेरने वाली बीजेपी खुद सवालों के घेरे में आगई है .

 

पियूष गोयल जिनको वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है जब उनसे सवाल किया गया की स्विस बैंक में इस वर्ष अचानक 50 % बढ़ी हिन्दुस्तानियों की रक़म के बारे में बताएं की यह ब्लैक है की नहीं , उन्होंने कहा ” मोदी जी के नेतृतव में स्विज़रलैंड के साथ जो संधि हुई है उसके तहत माली साल ख़त्म होने तक यानी मार्च 2019 तक हमारे  पास सभी दस्तावेज़ आजायेंगे तभी हम कुछ इस बारे में जवाब दे पाएंगे ” .यानी तब तक चुनाव की गहमा गहमी शुरू होजायेगी और काला धन का मुद्दा दब जाएगा , और तीन तलाक़ की तरह हलाला और बहु विवाह (एक से ज़्यादा शादियां) जैसे मुद्दों को हवा देदी जायेगी .जिसका देश की तरक़्क़ी या विकास से कोई लेना देना नहीं होगा .

 

मगर यह सब विपक्ष पर निर्भर करेगा की वो सत्ता पक्ष को किस तरह देश और जनता हित में घेरकर लाती है , हालांकि विपक्ष ख़ास तौर पर कांग्रेस आजतक बीजेपी के साम्प्रदायिकता जैसे मुद्दे का विकल्प नहीं ढूंड पाई है  और बीजेपी हमेशा इस मुद्दे को भुनाकर सफलता हासिल करती रही है .

100 दिन  में भारत का काला धन देश में लाकर देश के हरेक नागरिक को 15 लाख दिलाने     वाले मोदी जी आजकल  कबीर के दोहे सुनाने में व्यस्त  हैं ,आजकल साहिब संत कबीर नगर के मगहर कबीर की समाधि पर माथा टेकने पहुंचे हुए थे .वहां मोदी जी कहते हैं  कबीर ,नानक और गोरखनाथ एक साथ बैठकर आध्यात्म  पर  चर्चा किया करते  थे जबकि सच्चाई यह है कि इन तीनो के काल में 200 से 300 वर्षों का अंतर  है . गोरखनाथ 1100 ईस्वी के प्रारम्भ में और नानक देव 1469 में और खुद कबीर 1398 में पैदा हुए थे.ऐसे में मोदी जी ने तीनो को एक ही काल में जमा करदिया और इन तीनो को साथ बिठाकर चर्चा भी करादी .. हैना विचित्र ,वादों और बातों  के  शहंशाह मोदी जी अभी  और कितना  ऐतिहासिक  गड़बड़यां  पैदा  करेंगे  जनता ही बताएगी  .

 

मगर मोदी जी हैं कुछ  भी कर सकते हैं इंसान के शरीर में हाथी कि सूंड लगादें या ….एक प्राइवेट TV चैनल को इंटरव्यू देते समय वो कहते हैं की में हाई  स्कूल तक ही पढ़ पाया , यानी 10 क्लास पास . उसके बाद वो कहते सुने जाते हैं की मेने DU से BA और GU से MA किया .अब मोदी जी हैं जो चाहें कहदें .

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