……….और चौकीदार ही सोगया

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2014 आम लोक सभा चुनाव से पहले खुद को चौकीदार बताने वाले PM मोदी जो बाद में प्रधान सेवक के नाम से जाने गए भले ही सत्ता में बने रहने के  लिए सियासी हथकंडे इस्तेमाल करते रहे मगर सच्चाई यही है कि उनकी चौकीदारी में एक के बाद दुसरे चोर उनके सामने से भागते या भगाते नज़र आरहे हैं ।हालांकि इतने चौड़े सीने वाले चौकीदार के सामने से कोई चोर निकल जाए यह अजीब लगता है  , होसकता है चोर इनको मूर्ख बनाकर निकल गया हो और यह शर्म में न रोक पाए हों , या फिर चौकीदार ने आँखें मूंदली हों .

मोदी जी की चौकस और चुस्त इंटेलिजेंस सभी मुजरिमों पर पैनी नज़र रखती है और यह भी उसकी नज़र से नहीं चूकता कि कौन , कब और क्या  लिख रहा है , होसकता है हमारा लेख भी उनकी नज़र में कोई जुर्म साबित हो क्योंकि हम उस सच्चाई को ब्यान करने की जुर्रत कर रहे हैं जो उनके पक्ष में नहीं जाता लेकिन हमको हमारा संविधान इसकी इजाज़त देता है . और संविधान की अक्षुणता बनाये रखने की शपथ खुद प्रधान मंत्री भी लेते हैं ।

हमको पत्रकारिता के कर्तव्य को हर हाल में निभाना है और देश तथा जनता के हित में में लिखना है और साथ ही सरकार के उन सकारात्मक कामों की भी सराहना करना भी हमारा काम है जो पिछली सरकारें नहीं कर सकीं , मगर दुःख के साथ कहना पड़ता है अभी तक कोई उपलब्धि नहीं नज़र आई , सरकार के रूटीन काम तो होने ही हैं मगर  उनका भी अभाव है .

हम जिन मुजरिमों की बात कर रहे हैं वो ललित मोदी , नीरव मोदी , माल्या , और जय शाह जैसे चहीते अमीरों के बारे में है जो अपनी अमीरी दिखाने के लिए करोङो रुपयों की घड़ियाँ इस्तेमाल करते हैं यह अलग बात है की वो उसमें समय नहीं देखते मगर समय इनको ज़रूर देख रहा होता है ।

सवाल पैदा होता है कि 7 मई 2015 को पूरे घोटाले की शिकायत लिखित रूप में प्रधान मंत्री कार्यालय , कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय , सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टीगेशन ऑफिस , एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ,SEBI , महाराष्ट्र सरकार और गुजरात सरकार को दी गयी थी तो सरकार और एजेंसियों ने 29 जनवरी 2018 तक इसपर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की ?

मनमोहन सिंह के काल में आरोपी ए. राजा , कलमाड़ी , कनी मोझी , राम लिंगा राजू ,सहारा श्री , संजय चंद्र , विनोद गोयंका तथा अन्य को जेल हुई जबकि नरेंद्र मोदी जी की चौकीदारी में विजय माल्या , ललित मोदी , संजय भंडारी , सुशिल मोदी ,जतिन मेहता ,नीरव मोदी , मेहुल चौकसी , और अब ओरिएण्टल बैंक घोटाले में निदेशक सभ्य सेठ अपनी परिवार के साथ देश से बाहर भाग गए हैं , इसका समाचार मिल रहा है   .जनता कह रही है क्या जन धन योजना में इसी दिन के लिए ग़रीबों के खाते खुलवाए गए थे . ग़रीब और किसान व युवा लुट रहा है और मोदी सरकार के चहीते देश को लूट रहे हैं, शायद देश की जनता लूट को 2019 में नहीं दोहराने देगी , देश भर में सांप्रदायिक दंगों के माध्यम से वोट ध्रुवीकरण होजाये या EVM मंतर चल जाए तो अलग बात है . ……जबकि देश की जनता कांग्रेस को भी सबक़ सिखाना अच्छी तरह जानती है !

 

दुनिया को भारत में निवेश का निमंतरण देने वाले मोदी जी कितने देशों से निवेश कराने में सफल हुए कृपा करके इसको सार्वजानिक करें .2014 से 2018 तक कितने नौजवानों को रोज़गार किस विभाग में दिलाया गया , किसानो और ग़रीबों के लिए किन किन योजनाओं को शुरू करदिया गया , और उनका लाभ कितने लोग उठा रहे हैं यह सब सार्वजानिक करने का कष्ट करें .योजनाओं का विज्ञापन जैसे किया जाता है इसी प्रकार उनके कर्यान्व्यन का भी सार्वजानिक कार्यक्रम रखा जाना चाहिए . ताकि सच्चाई जनता के सामने रहे ,,और यही लोकतंत्र की मान्यता है!

राहुल गाँधी मोदी जी पर हमला बोलते हुए कहते हैं की देश के किसानो और ग़रीबों का पैसा साहूकारों की जेब में भरा जारहा है , और मोदी जी देश के 10 बड़े साहूकारों के क़र्ज़ माफ़ करने में लगे जबकि किसान आत्म हत्याएं कररहे हैं . इसपर अमित शाह जी कहते हैं की राहुल झूट बोल रहे हैं , बड़े नेताओं के इन सियासी बयानबाज़ी से जनता मूर्ख बन रही है सवाल पैदा होता है यदि सत्ता पक्ष जनता , किसान और देश के खिलाफ कार्यों में मसरूफ है तो क्यों नहीं विपक्ष सड़कों पर उतरकर जनता का सहयोग हासिल करता , मसला यह है बड़े नेता प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुँचाने का काम करते हैं , जबकि जनता अब बयान बाजियों को महज़ सियासी जुमलेबाज़ी ही समझती है . मगर एक चिंता की बात यह है की देश को धर्म और जाती के नाम पर बांटा जारहा है , वोट धुर्वीकरण के लिए नफरत की राजनीती हो रही है , सीधी या मूर्ख जनता को मरवाया जारहा है जबकि नेता खुद सरमायेदार हुआ जारहा है ..मेरे अपने पत्रकारिता काल में कोई एक नेता ऐसा नहीं मिला जो राजनीती में आने के बाद ग़रीब होगया हो . यदि आप किसी को जानते हैं तो मुझे भी उसका पता दें ताकि उसपर फीचर लिख सकूँ.

अब इधर उधर की न बात कर यह बता के बैंक क्यों लुटा  ।

मुझे लुटेरों से कुछ गिला नहीं तेरी चौकीदारी का सवाल है ॥

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