मोदी का कैशलेस Economy का सपना जल्द होगा पूरा ,‘अब ओरिएंटल बैंक में 390 करोड़ का घोटाला’

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बैंकों में सफाई का काम जारी –PNB के बाद ‘अब ओरिएंटल बैंक में 390 करोड़ का घोटाला’

देश में बैंकिंग घोटालों का सिलसिला लगातार जारी है . 12000 हजार करोड़ का PNB घोटाले के बाद अब एक और घोटाला सामने आया है. जो ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) से जुड़ा है.

दिल्ली की ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) की एक शाखा में 389.85 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ. इस मामले में सीबीआई ने गुरुवार को द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की ओर से इस मामले में करीब 6 माह पहले सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई गई थी. शिकायत को 6 महीने से दबाए बैठी सीबीआई ने अब दिल्ली स्थित एक ज्वैलरी आउटलेट के खिलाफ केस दर्ज किया है. सीबीआई केस की जांच में जुटी है.

सीबीआई अधिकारियों ने 390 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में गुरुवार को करोल बाग स्थित द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल के खिलाफ केस दर्ज किया है. यह कंपनी गोल्ड, सिल्वर और डायमंड ज्वैलरी की मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग का काम करती है. कंपनी का जिम्मा पंजाबी बाग निवासी सभ्य सेठ और रीता सेठ के हाथों में है. सीबीआई द्वारा दर्ज FIR में सराय काले खां निवासी कृष्ण कुमार सिंह और रवि कुमार सिंह के नाम भी हैं, जो इस कंपनी से जुड़े हुए हैं.

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कंपनी ने ओबीसी से 2007 से 2012 के दौरान कुल 389 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. बैंक की ओर से कराई गई जांच में पाया गया कि कंपनी ने लेटर ऑफ क्रेडिट का इस्तेमाल सोने और दूसरे कीमती रत्नों की खरीद का भुगतान करने के लिए किया. कंपनी ने फर्जी लेनदेन का उपयोग कर सोने और धन को देश से बाहर भेजा.

सीबीआई ने कंपनी के निदेशकों सभ्य सेठ, रीता सेठ, कृष्ण कुमार सिंह, रवि सिंह एवं एक अन्य कंपनी द्वारका दास सेठ एसईजेड इनकॉर्पोरेशन के खिलाफ मामला दर्ज किया है. बैंक ने अपनी पड़ताल के बाद दावा किया कि सभ्य सेठ और अन्य निर्देशक अपने परिवार वालों समेत पिछले 10 महीनों से अपने घरों में नहीं मिले. ऐसा संदेह है कि सभ्य सेठ ने भारत छोड़ दिया है.

सेठ और अन्य निर्देशकों की लोकेशन का अभी पता नहीं चला पाया है. सीबीआई का कहना है कि यह कंपनी कुछ ऐसी कंपनियों के साथ भी लेनदेन कर रही थी, जो अस्तित्व में ही नहीं हैं.

यदि बैंकों की लूट इसी तरह जारी रही तो कहा जासकता है की मोदी सरकार के स्वच्छ अभियान के साथ कैशलेस बैंकों के चलते कैशलेस इकॉनमी का सपना भी जल्द पूरा होजायेगा ।

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