प्राचीन भारतीय कला में धर्म, दर्शन और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय : प्रो. ध्यानेन्द्र नारायण दुबे

गोरखपुर, 24 सितंबर । गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग की ओर से गुरुवार को महाविद्यालय सभागार में ‘प्राचीन भारतीय कला के विविध आयाम’ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. पूनम शुक्ला ने की। मुख्य वक्ता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के प्रो. ध्यानेन्द्र नारायण दुबे रहे।

विशिष्ट अतिथि के रूप में गंगोत्री देवी शिक्षण संस्थान के प्रबंध निदेशक आशुतोष मिश्रा उपस्थित रहे। उप प्राचार्य डॉ. प्रियंका त्रिपाठी भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं।

प्रो. ध्यानेन्द्र नारायण दुबे ने कहा कि प्राचीन भारतीय कला केवल सौंदर्यबोध की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि भारतीय समाज, धर्म, दर्शन, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं का सजीव दस्तावेज है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति की व्यापकता को समझने के लिए उसके कलात्मक आयामों का अध्ययन आवश्यक है।

उन्होंने धर्म और कला के पारस्परिक संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय कला के विकास पर धार्मिक मान्यताओं और दार्शनिक चिंतन का गहरा प्रभाव रहा है। प्राचीन साहित्य एवं सुभाषितों में प्रकृति, मानव जीवन और कला के विविध रूपों का उल्लेख मिलता है। मानव मन में उत्पन्न भावों, प्रकृति और मनुष्य के संबंध तथा भाव एवं रस की अभिव्यक्ति में कला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उप प्राचार्य डॉ. प्रियंका त्रिपाठी ने व्याख्यान को छात्राओं के बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विकास के लिए उपयोगी बताया। कार्यक्रम में श्रीमती प्रत्या उपाध्याय, डॉ. संगीता पाण्डेय, डॉ. रेनू गौड़, डॉ. कुमुद त्रिपाठी, डॉ. सीमा श्रीवास्तव, डॉ सुषमा मिश्रा,डॉ श्रुति त्रिपाठी, डॉ शिवांगी त्रिपाठी, डॉ शीला त्रिपाठी, डॉ गरिमा सिंह, प्रिया, डॉ तृप्ति सिंह, डॉ विकास गुप्ता, डॉ उगेश सहित महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्राएं और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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