मनुष्य निर्माण से ही राष्ट्र का पुनरुत्थान संभव : किशोर टोकेकर

बांसवाड़ा, 23 अगस्त । राष्ट्र का पुनरुत्थान केवल राजनीतिक व्यवस्थाओं, संस्थागत ढांचों या आर्थिक विकास से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सशक्त चरित्र, अनुशासन, सेवा-भाव और राष्ट्रबोध से संपन्न मनुष्यों का निर्माण आवश्यक है। यह विचार विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव किशोर टोकेकर ने श्री पीताम्बरा आश्रम में आयोजित ‘मनुष्य निर्माण से राष्ट्र पुनरुत्थान’ विषयक विशेष वैचारिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।

कार्यक्रम का आयोजन गायत्री मंडल बांसवाड़ा एवं विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी, राजस्थान प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। अध्यक्षता श्री बड़ा रामद्वारा के प्रमुख संत एवं आध्यात्मिक चिंतक संत रामप्रकाश महाराज ने की।

टोकेकर ने कहा कि राष्ट्र केवल राजनीतिक या भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक चेतना है। यह साझा इतिहास, परंपराओं और मातृभूमि के प्रति आत्मीय भाव से निर्मित होती है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद का स्मरण करते हुए कहा कि भूमि को केवल भौतिक संसाधन नहीं, बल्कि मातृभूमि मानना भारतीय राष्ट्रबोध का मूल तत्व है। उन्होंने युवाओं में चरित्र निर्माण, सांस्कृतिक अस्मिता और सेवा-भाव विकसित करने पर जोर दिया। टोकेकर ने कहा कि अधिकारों के साथ नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना होगा। आधुनिकता और विकास के दौर में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मौलिकता को सहेजकर रखना आज का युगधर्म है। विवेकानन्द केन्द्र इसी ध्येय के साथ देशभर में व्यक्ति निर्माण और समाज जागरण के कार्यों में सक्रिय है।

कार्यक्रम में राजस्थान प्रांत संचालिका शकुन्तला दीदी, प्रांत संगठक शीतल दीदी, बांसवाड़ा जिला संचालक हिमांशु सिंह, प्रकल्प प्रमुख कान्तिलाल व्यास और कमलकान्त भट्ट ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन अनन्त जोशी ने किया।

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