
1st फेज़ की बम्पर पोलिंग की हर तरफ चर्चा है लेकिन इसका वास्तव में फायदा किसको होना है हम आपके लिए लाये हैं ऐसा विश्लेषण जो निष्पक्ष होने के साथ ज़मीनी मुद्दों से भी जुड़ा है ….
“दोस्तों , वेस्ट बंगाल के पहले चरण का मतदान मौसम की आग और लोकतंत्र की तपिश में संपन्न हुआ। … लेकिन सवाल खड़े कर गया —क्या फ़र्ज़ी रबिन्द्र नाथ का तिलिस्म टूटेगा … या फिर चलेगा ममता दीदी का जादू ?
“उत्तर बंगाल के पोलिंग स्टेशन्स पर इस बार महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं …
और हर चेहरे पर उभरते सवालों की लकीर थी —किसको चुना जाए ?
किस इलाक़े से कौन कैंडिडेट चुनाव लड़ेगा, अभी तक यह पार्टियों का फ़ैसला होता है , यानी पार्टियों की तरफ से प्रत्याशी क्षेत्र की जनता पर थोपे जाते हैं. हालाँकि पार्टियों को अपने प्रत्याशी, इलाक़े की जनता से पूछकर तय करना चाहिए . और यही प्रक्रिया लोकतंत्र को वास्तविक रूप में परिभाषित करेगी. हमारी राय है इस बार यह मुद्दा सदन में चर्चा का विषय होना चाहिए.
दुसरे delimitation का प्रारूप किसी भी सूरत में ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे किसी भी धर्म, जाती, समुदाय, लिंग या वर्ग को ऐसा आभास होने लगे की उसको या तो छिन्न भिन्न कर दिया जा रहा है या बाण दिया जा रहा है.
बंगाल के पहले चरण की बंपर वोटिंग को पार्टियां अपने अपने हिसाब से प्रसारित और प्रकाशित कर रही हैं, हालांकि इसका सटीक पता तो 4 मई को आने वाले नतीजों के बाद ही लग सकेगा.
मगर अधिकतर रिपोर्ट्स का इशारा है कि बंगाल की जनता का यह मैंडेट केंद्र सरकार और केन्द्र के नेतृत्व की मनमानी और जनविरोधी नीतियों, नीयत और अहंकार के खिलाफ किया है.
एक तरफ़ भावनात्मक, धुर्वीकरण और सांप्रदायिक सोच वाला नैरेटिव …तो दूसरी तरफ़ रोज़मर्रा की ज़िंदगी और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों वाला प्रचार। जबकि बंगाल का आम वोटर…इन दोनों के बीच अपना संतुलन तलाश रहा है।”
बाबरी निर्माण के भावनात्मक मुद्दे के साथ उतारे गए हुमायूँ कबीर की वायरल वीडियो आप सबने देख ही ली होगी. कल उनके क़ाफ़ले पर हमले को जिस तरह नेशनल मीडिया में बोलै गया उसने बीजेपी के चुनावी अजेंडे को मज़ीद उजागर कर दिया. सवाल यह नहीं कि कौन ज़्यादा बोल रहा है…सवाल यह है कि कौन अवाम को तोड़ रहा है और जोड़ कौन रहा है ।”
“पहले चरण के मताधिकार ने एक बात साफ कर दी—के यह चुनाव लहर का नहीं… बल्कि Layers का चुनाव है। “लेयर का चुनाव” मतलब—किसी एक वजह से वोट नहीं बल्कि कई अलग वजहों से वोट पड़ रहा है।
जैसे स्थानीय मुद्दे (सड़क, बिजली पानी के काम, और नेता का ज़ाती व्यवहार और चाल चलन भी ) यानी बंगाल में किसी की “लहर” यानी (wave) नहीं चल रही. बल्कि हर सीट के हर एक बूथ पर अलग-अलग कारण यानी (layers) मिलकर नतीजा तय करेंगे।
संक्षेप में कहा जा सकता है की ….“यह लहर का नहीं, बल्कि परत-दर-परत तय होने वाला layer का चुनाव है—जहाँ हर वोट के पीछे अलग वजह काम कर रही है।”
साथ ही यह भी समझ लिया जाए के… इस बार हर सीट और हर बूथ पर…छोटे-छोटे फर्क… बड़े नतीजों में तब्दील हो सकते हैं । पहले चरण में जिन सीटों पर चुनाव हुआ है इसमें पिछली बार यानी 2021 में बीजेपी को बढ़त मिली थी . इस बार बीजेपी अपनी ज़मीन बचाने में लगी है…और टीएमसी उसी ज़मीन को खिसकाने में मसरूफ दिखाई दी ।
इस बंपर पोलिंग को TMC और बीजेपी अपने अपने परसेप्शन के हिसाब से कोट कर रही हैं क्योंकि अगले चरण के nutral वोटर के लिए पहले चरण के बाद बनाये गए माहौल का काफी फ़र्क़ पड़ता है .
आपको बताते चलें के “2021 में पहले चरण की इन 152 सीटों में से BJP ने 59 सीटें जीती थीं। जबकि 29 अप्रैल को 2nd फेज की होने वाली 142 सीटों में से सिर्फ 18 सीटें बीजेपी जीत सकीय थी.
ऐसे में 2026 में बीजेपी के लिए नई सीटें जीतना ही लक्ष्य नहीं, बल्कि अपनी पुरानी ज़मीन बचाना भी बड़ी चुनौती है।” जबकि बीजेपी नेता अमित शाह ने कहा कि TMC का सूरज ढल चुका है. उधर तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी का कहना था, बंगाल की जनता ने SIR के खिलाफ बंपर वोटिंग की है. जबकि सभी दावों का सच 4 मई को चुनाव के नतीजे बताएँगे.
हम यह भी समझ लें कि ममता बैनर्जी सरकार की लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री, और स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाओं का असर महिलाओं के 2 % ज्यादा turnout की बड़ी वजह माना जा रहा है। इसी वजह से TMC इसे अपने ही पक्ष का संकेत मानती है. और राजनितिक गणित भी यही बता रहा है।
दूसरी बात यह कि … ग्रामीण इलाकों में TMC का बूथ-लेवल नेटवर्क बहुत मजबूत है।और इस बार ग्रामीण में पोल पहले से ज़्यादा हुआ है. और ज़्यादा मतदान अक्सर संगठित कैडर वाली पार्टी को लाभ देता है।
क्योंकि मतदान वाले दिन को छुट्टी का दिन मनाने वाले वोटर को पोलिंग स्टेशन तक पार्टी कार्यकर्त्ता ही लेकर आता है हिंदी भाषी क्षेत्रों में बीजेपी के लिए यही बात मशहूर है. और बंगाल में TMC का कैडर बहुत ज़्यादा मज़बूत है . इसलिए बम्पर पोलिंग का लाभ TMCको होने की ज़्यादा सम्भावना है.
दूसरी तरफ अगर देखें तो पहले चरण में उत्तर बंगाल और सीमावर्ती इलाके आते हैं जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहले से मजबूत हुई है। यहाँ high turnout को BJP “silent voter” और बदलाव की चाह के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
दूसरे ये के …बीजेपी के ध्रुवीकरण वाले मुद्दे भी इसमें शामिल हैं जैसे : सीमा सुरक्षा, NRC, CAA, घुसपैठ जैसे मुद्दों पर BJP ने लगातार अभियान चलाया। तो आपको यह समझना होगा अगर वोटर इन भावनात्मक मुद्दों पर निकला है, तो इसका लाभ BJP को भी मिल सकता है।