
17 अप्रैल को सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी, अपने 11 वर्ष के कार्यकाल में पहली बार बिल पास नहीं करवा पाई, क्या सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन बिल को जोड़कर, अपनी बाजीगरी दिखाई? अब भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अपनी सरकार बनाएगी?
यदि भारतीय जनता पार्टी के पुराने चुनावी ट्रैक रिकार्ड को देखें तो, इसके राजनीतिक पेंतरे कुछ इस तरह के ही नजर आएंगे. भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकार कांग्रेस सहित विपक्षी दलों को चुनावी मौसम में बड़ा मुद्दा खड़ा कर, कांग्रेस और विपक्षी दलों को खुश करके, अपने जाल में फंसाती है.
कांग्रेस सहित विपक्षी दल, भाजपा के जाल में फंसकर, भाजपा की चुनाव रणनीति को समझे बगैर ही सतर्क नहीं होने की जगह खुश होते है और चुनाव में जीती हुई बाजी को हार जाते हैं !
क्या पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी अपनी सरकार बनाएगी ? यह चुनौती भारतीय जनता पार्टी को नहीं बल्कि कांग्रेस, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस के सामने बड़ी है. क्योंकि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की सरकार है जबकि तमिलनाडु में स्टालिन की पार्टी डीएम के और कांग्रेस गठबंधन की सरकार !
यदि 17 अप्रैल के दिन संसद में तीन बिलों की बात करें तो, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के लिए खुशी का दिन 17 अप्रैल नहीं, बल्कि 4 मई का है, जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आएंगे.
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम में यदि भारतीय जनता पार्टी की हार होती है और कांग्रेस सहित विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस और डीएमके अपनी सरकार बनाती है, तो यह विपक्षी दलों की संसद में तीन बिल पास नहीं होने की खुशी से भी बड़ी खुशी होगी !
इससे यह भी पता चलेगा कि केंद्र में भाजपा सरकार देश में जनता के बीच कितनी लोकप्रिय रह गई है या कमजोर हुई है ! पांच राज्यों के चुनाव परिणाम यह भी बताएंगे कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी संसद से लेकर सड़क तक कमजोर हो गई है !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 18 अप्रैल को रात के 8:30 बजे जनता को संबोधन इशारा तो यही कर रहा है कि भाजपा और उनके नेता अभी भी जीत को लेकर आश्वस्त हैं और विपक्ष के राजनीति मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे !
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी विपक्षी दलों के नेताओं को लंबे समय से आगाह कर रहे थे कि विपक्षी दल सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एकजुट हो जाओ ! विपक्षी दलों की एकता 17 अप्रैल को संसद में नजर भी आई और क्या यह एकता 2029 के लोकसभा चुनाव परिणाम तक बरकरार रहेगी?
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खड़गे तो यहां तक कहते हैं कि यदि एकजुट नहीं हुए तो खत्म हो जाओगे !
जब भी भाजपा के खिलाफ कांग्रेस और राहुल गांधी ने मुद्दे उठाए, और विपक्षी एकता के नाम पर बैठक हुई तब, सबसे ज्यादा चर्चा में तृणमूल कांग्रेस और उसकी नेता ममता बनर्जी रही.
शायद इस सवाल ने मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन को सबसे ज्यादा परेशान किया, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का ऐलान हुआ तब कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन नहीं हुआ.
और फिर कांग्रेस ने भी पश्चिम बंगाल की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए तब मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा हुई कि इंडिया गठबंधन टूट गया ! इसके बावजूद 17 अप्रैल को संसद में इंडिया गठबंधन एकजुट नजर आया.
लेकिन इंडिया गठबंधन के लिए संसद में एकजुटता दिखाकर सत्ताधारी भाजपा को राजनीतिक मात देना बड़ी बात है मगर विपक्ष के लिए इससे बड़ी और खुशी की बात पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव इंडिया गठबंधन जीत हासिल कर लेने के बात होगी. और इसके लिए 4 मई तक इंतजार करना होगा !