“हार्मनी डायलॉग सेशन – I” का भव्य आयोजन समारोह

इंटर फेथ हार्मनी फाउंडेशन ने नई दिल्ली में सफलतापूर्वक “हार्मनी डायलॉग सेशन – I” का आयोजन किया

कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने नई दिल्ली में सद्भाव संवाद में समावेशी समाज को बढ़ावा देने में शिक्षा की भूमिका पर ज़ोर दिया

विश्वास बनाने और दूरियों को पाटने के लिए अंतर-धार्मिक संवाद ज़रूरी : डॉ. ख्वाजा इफ़्तिखार अहमद

इंटर फेथ हार्मनी फाउंडेशन ने नई दिल्ली में सफलतापूर्वक “हार्मनी डायलॉग सेशन – I” का आयोजन किया

नई दिल्ली, 15 अप्रैल, 2026: इंटर फेथ हार्मनी फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली के मीना बाग स्थित हार्मनी सेक्रेटेरिएट में अपने बहुप्रतीक्षित “हार्मनी डायलॉग सेशन – I” का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह सत्र “शांति, सद्भाव और एक एकजुट समाज के लिए अंतर-धार्मिक संवाद” विषय पर केंद्रित था। इसमें विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ को मज़बूत करने के उद्देश्य से गहन विचार-विमर्श और रचनात्मक चर्चाएँ हुईं।
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संवाद ही सह-अस्तित्व की नींव है। उन्होंने समावेशिता, सहिष्णुता और सम्मान के मूल्यों को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसे स्थानों के रूप में काम करना चाहिए जहाँ विविधता का सम्मान और उसे समझा जाए।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए, फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. ख्वाजा इफ़्तिखार अहमद ने आज के समय में अंतर-धार्मिक समझ को बढ़ावा देने की तात्कालिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतर-धार्मिक संवाद केवल एक चर्चा नहीं है, बल्कि विश्वास बनाने और दूरियों को पाटने की दिशा में एक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने आगे इस बात पर ज़ोर दिया कि समुदायों के बीच निरंतर जुड़ाव गलत सूचनाओं का मुकाबला करने और अपनेपन की साझा भावना को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।
कार्यक्रम का समापन एक आशावादी संदेश के साथ हुआ। इसमें ऐसे संवादों को जारी रखने और आपसी सम्मान व सहयोग को बढ़ावा देने वाले मंचों को मज़बूत करने का सामूहिक आह्वान किया गया। प्रतिभागियों ने सार्थक बातचीत के लिए एक मंच तैयार करने की फाउंडेशन की पहल की सराहना की और समाज में शांति व एकता को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
फाउंडेशन के कानूनी प्रमुख फ़ौज़ान अहमद ख्वाजा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सम्मान और समझ को मज़बूत करने के लिए ऐसे सार्थक संवाद अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजकों के बहुमूल्य योगदान के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह की पहल एक अधिक शांतिपूर्ण, समावेशी और एकजुट समाज का मार्ग प्रशस्त करती है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीबा ने किया। उन्होंने बड़ी कुशलता से चर्चा को आगे बढ़ाया और यह सुनिश्चित किया कि प्रतिभागियों के बीच एक संतुलित और सार्थक संवाद हो। ‘हार्मनी डायलॉग’ का समापन, अंतर-धार्मिक सद्भाव और नैतिक सह-अस्तित्व के संदेश को देश के हर कोने तक पहुँचाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

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