सैनिकों को पेंशन नहीं मिलेगी ?

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अग्निपथ योजना विवाद:पूर्व नौसेना प्रमुख ने अग्निवीरों की युद्ध क्षमता पर उठाए सवाल

सैनिक और अग्निवीर में क्या कोई फ़र्क़ है ? क्या इनके भत्तों और पेंशन के बाद के लाभों में भी कोई अंतर है ? क्या अग्निवीर को सैनिक कहा जा सकता है ? अगर नहीं तो वीर तो बहुत होते हैं करणवीर , सतवीर , धर्मवीर , जयवीर,परमवीर , शाहवीर , तनवीर वग़ैरा वग़ैरा . लेकिन सैनिक सिर्फ़ सैनिक ही होता है .

अर्ध सैनिक , सैनिक , पुलिस अग्निवीर , शहीद , पेंशन इस सब पर जानकारी केलिए नीचे दिए लिंक में पंजाब के मानसा जिले के गांव कोटली कलां के रहने वाले 19 साल के अमृतपाल सिंह भारतीय सेना में बतौर अग्निवीर की पूरी रिपोर्ट पढ़ें और फैसला करें कि क्या है अग्निवीर को मिलने वाले लाभों की सच्चाई

https://hindi.newsbytesapp.com/news/india/what-is-the-controversy-around-punjab-s-agnivir-jawan-and-guard-of-honor/story

पूर्व नौसेना प्रमुख ने एक पोस्ट के माध्यम से पूछा है कि क्या कोई लड़ाकू इकाइयों में अग्निवीरों की तैनाती को लेकर भी चिंतित है, जो बहुत कम प्रशिक्षित जवानों को सेवा में रखने के लिए मजबूर हैं?

नई दिल्ली: युद्ध नायक और वीरता पुरस्कार विजेता पूर्व नौसेना प्रमुख अरुण प्रकाश ने विवादास्पद नव सैन्य भर्ती योजना ‘अग्निपथ’ को वापस लेने की विपक्ष की मांग के बीच अग्निवीरों की युद्ध दक्षता पर सवाल उठाया है.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2004 से अक्टूबर 2006 के बीच नौसेना का नेतृत्व करने वाले अरुण प्रकाश ने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा, ‘सेवा में असमानताओं और युवा अग्निवीरों का सेना में कार्यकाल खत्म होने के बाद उनका भविष्य क्या होगा ? इस पर काफ़ी ध्यान दिया जा रहा है.

लेकिन क्या कोई लड़ाकू इकाइयों में उनकी तैनाती को लेकर चिंतित है, जो बहुत कम प्रशिक्षित जवानों को सेवा में रखने के लिए मजबूर हैं?’ उन्होंने यह भी कहा कि अग्निवीर उतने ही प्रशिक्षित रहते हैं जिससे वो एक संतरी की नौकरी कर सकें.

एक्स पर उन्हें जवाब देते हुए पूर्व सैनिक सचिन पवार ने कहा, ‘तब तक कुछ नहीं बदलेगा जब तक कि तीनों प्रमुख इसका विरोध नहीं करते और अग्निवीर में बदलाव की मांग नहीं करते. यह बिल्कुल स्पष्ट है कि यह योजना सशस्त्र बलों के लिए हानिकारक है.’

राहुल गाँधी अपनी चुनावी रैलियों में अग्निवीर योजना पर सवाल खड़े करते रहे हैं. उन्होंने कहा हम सर्कार में आएंगे तो 2 तरह के जवानो वाली योजना को ख़तम करेंगे . लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले ही संबोधन में भी राहुल गांधी ने हितधारकों के बिना किसी परामर्श के इस योजना को शुरू करने के लिए सरकार पर हमला किया था.

योजना की आलोचना करते हुए राहुल ने कहा कि सरकार कहती है कि दो प्रकार के जवान होंगे – एक वो जिनको पेंशन मिलती है और दुसरे वो जिन्हें पेंशन नहीं मिलेगी . हम ऐसा नहीं होने देंगे राहुल गाँधी ने दोहराया . याद रहे जून 2022 में इस अग्निवीर को लागू किया गया था , जिसके बाद देशभर में इसका विरोध हुआ था.

उन्होंने आगे कहा अग्निवीर यूज एंड थ्रो वाले श्रमिक हैं.उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मरणोपरांत अग्निवीर के परिवार को सरकार द्वारा कोई मुआवज़ा नहीं दिया जाता है. एक जवान को पेंशन मिल रही है, जबकि दूसरे को नहीं. ऐसा कर के जवानों के बीच विभाजन पैदा किया जा रहा है.

संसद में राहुल गाँधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता संसद में गलत सूचना फैला रहे हैं क्योंकि सरकार अग्निवीर शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देती है.

जबकि अग्निपथ योजना के तहत आने वाले सैनिकों को चार साल के अनुबंध के आधार पर पैदल सेना, वायु सेना और नौसेना में भर्ती किया जाता है. वे ग्रेच्युटी, पेंशन के हकदार नहीं होते और उनमें से 75 प्रतिशत को चार साल पूरा होने के बाद सेनानिवृत्त कर दिया जाता है. इस योजना से पहले, एक सैनिक को 15-18 साल की सेवा करनी होती थी.

हालांकि, सरकार सेवा के दौरान एक अग्निवीर की मृत्यु होने पर एक करोड़ रुपये की मुआवजा राशि प्रदान करती है, लेकिन अग्निपथ योजना में नियमित सैनिकों को उपलब्ध व्यापक लाभों का अभाव है.

सरकार पिछले साल एक और विवाद में फंस गई थी जब पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपने संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में लिखा था कि अग्निपथ ने सेना को आश्चर्यचकित कर दिया था.सेना के दिग्गजों ने सरकार पर बिना परामर्श के इस योजना को लागू करने का भी आरोप लगाया था.

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