राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान नहीं कर सकेंगे बजट सत्र को सम्बोधित

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दशकों पुरानी परंपरा ख़तम करने जा रही है केरल सरकार , राज्यपाल नहीं कर सकेंगे बजट सत्र को सम्बोधित

क्यों नहीं करंगे राज्यपाल आरिफ मोहम्मद बजट सत्र को सम्बोधित ?

राज्यपाल आरिफ खान और राज्य सरकार के बीच चल रहे तनाव में नया मोड़ आ गया है . राज्यपाल केरल के विश्वविद्यालयों में VC की नियुक्तियों में चल रही अनिमितताओं को लेकर विजयन सरकार पर हमलावर रहे है . गवर्नर बनाम मुख्यमंत्री की लड़ाई इस कदर आगे बढ़ चुकी है कि सरकार ने दशकों से चली आ रही बजट सत्र को राज्यपाल द्वारा सम्बोधित करने कि परंपरा को ख़तम करने का फैसला किया है .

याद रहे …..

राज्यपाल ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट अपने एक फैसले में कह चुका है कि वीसी की नियुक्ति में राज्य सरकार की भूमिका नहीं होनी चाहिए। खान ने आगे कहा था कि , ‘मैं निजी लड़ाई लड़ने नहीं आया हूं और बदले की मेरी कोई भावना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने मुझे एक मौका दिया है। मैं राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था को सुधारना चाहता हूं। यहां विवि में नियुक्तियों के लिए नेताओं के फोन वीसी के पास आते हैं। यह रुकना चाहिए।

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केरल के राज्यपाल खान ने केरल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि ‘केरल के विश्वविद्यालयों में राजनीतिक दखल से कई नियुक्तियां हुई हैं। सीपीएम के लोग विश्वविद्यालयों में नियुक्त हुए हैं। अवैध तरीके से अपात्र लोगों की ये नियुक्तियां कोर्ट में लंबित हैं। उन्होंने कहा ‘मेरी कोशिश है कि विवि की स्वाधीनता बनी रहे। ‘विश्वविद्यालयों के कामकाज एवं नियुक्तियों में सरकार का दखल नहीं होना चाहिए। इस बात को कार्यपालिका को समझना चाहिए।’

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पूरे मामले में क्या कहा लोक सभा के पूर्व महासचिव ने ?

राज्यपाल

संविधान विशेषज्ञ और लोक सभा के पूर्व महासचिव पी डी टी आचार्य ने कहा , “संविधान का अनुच्छेद 176 कहता है कि प्रत्येक वर्ष के पहली शुरुवात राज्यपाल के अभिभाषण से ही होगी . अगर वह उन्हें छोड़ देते है तो अगले सत्र में उन्हें बोलना ही होगा .

इसके आगे कहा, “कायदे से विधानसभा सत्रकी समाप्ति के बारे में राज्यपाल को सूचित करना चाहिए , लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया ताकि राज्यपाल को फिर से न बुलाने कि सुविधा मिल सकें . लेकिन जब सरकार अगला सत्र बुलाएगी तो राज्यपल को उपस्थित होना होगा और तकनीकी रूप से , वह वर्ष का पहला सत्र माना जाएगा

 

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