चुनाव आयोग का चला चाबुक,BSP प्रमुख ने कहा लोकतंत्र की हत्या

चुनाव आयोग का आखिर चला चाबुक , मायावती पर 48 तो योगी आदित्य नाथ पर लगा 72 घंटे का बैन, BSP प्रमुख ने इसको कहा साजिश और लोकतंत्र की हत्या

चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई ,योगी आदित्यनाथ 72 घंटे और मायावती 48 घंटे तक चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे 

लोकसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित बनाने के लिए सभी पार्टियां झोंक रही है पूरी ताक़त , मगर इस बीच योगी आदित्यनाथ और मायावती पर चुनाव आयोग का डंडा बड़ा फैसला

लखनऊ :बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ और मायावती को उनके भाषणों में आपत्तिजनक बयानों के जरिए आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए ऐसा बन लगाया है. चुनाव आयोग ने इन दोनों को आचार संहिता के उल्लंघन में दोषी पाया है. बता दें कि चुनाव आयोग की यह बड़ी कार्रवाई ऐसे वक्त में आई है जब सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही पूछा था कि विद्वेष फैलाने वाले भाषणों को लेकर निर्वाचन आयोग ने अब तक क्या कार्रवाई की है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने चुनाव प्रचार के दौरान जाति एवं धर्म को आधार बना कर विद्वेष फैलाने वाले वाले भाषणों से निबटने के लिये आयोग के पास सीमित अधिकार होने के कथन से सहमति जताते हुये निर्वाचन आयोग के एक प्रतिनिधि को मंगलवार को तलब किया है.

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पीठ ने निर्वाचन आयोग के इस कथन का उल्लेख किया कि वह जाति और धर्म के आधार पर विद्वेष फैलाने वाले भाषण के लिये नोटिस जारी कर सकता है, इसके बाद परामर्श दे सकता है ओर अंतत: ऐसे नेता के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में शिकायत दर्ज करा सकता है.

लोकसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी पार्टियां अपनी पूरी ताकत झोंक देना चाहती हैं अब चाहे इसके चलते चुनाव आयोग नाराज़ हो या सुप्रीम कोर्ट रूठे , मगर इस बीच योगी आदित्यनाथ और मायावती पर चुनाव आयोग का डंडा तो चल ही गया है .

चुनाव आयोग की इस कार्रवाई का यह असर होगा की यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती को रैली और रोड शो नहीं कर पाएंगे . चुनाव आयोग ने योगी आदित्यनाथ को 72 घंटे और मायावती को 48 घंटे के लिए रैली और रोड शो करने पर बैन लगा दिया है. चुनाव आयोग का यह बैन 16 अप्रैल की सुबह 6 बजे से लागू हो चूका है .

आयोग की इस चाबुक बाज़ी के बाद बन किये गए नेताओं या पार्टियों का ब्यान आना लाज़िम था इसी के चलते बसपा प्रमुख मायावती ने चुनाव आयोग द्वारा उन पर लगाए गए 48 घंटे के प्रतिबंध को दबाव में लिया गया फैसला बताया.

उन्होंने कहा कि यह एक साजिश और लोकतंत्र की हत्या है. उन्होंने सोमवार देर रात प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि चुनाव आयोग ने सहारनपुर के देवबंद में दिए गए बयान पर उनकी सफाई को नजरअंदाज करते हुए यह कार्रवाई की है और यह लोकतंत्र की हत्या है.

उन्होंने कहा ‘संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत किसी को अपनी बात रखने से वंचित नहीं किया जा सकता, लेकिन आयोग ने अभूतपूर्व आदेश देकर मुझे बगैर किसी सुनवाई के असंवैधानिक तरीके से क्रूरतापूर्वक वंचित कर दिया. इसी लिए यह दिन काला दिवस के रूप में याद किया जान चाहिए . यह फैसला किसी दबाव में लिया गया ही प्रतीत होता है.’

ज्ञात रहे कि आयोग ने गत 7 अप्रैल को सहारनपुर के देवबंद में आयोजित चुनावी रैली में खासकर मुस्लिम समुदाय से वोट मांगने पर आचार संहिता का उल्लंघन मान लिया गया . बसपा प्रमुख ने कहा कि हमें अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा है कि वह आयोग के इस फैसले की मंशा को समझते हुए निडर होकर बसपा तथा गठबंधन प्रत्याशियों का समर्थन करते हुए भाजपा तथा अन्य विरोधियों की जमानत जब्त कराएं.

याद रहे लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 18 अप्रैल को है और प्रचार का समय कल 16 अप्रैल को खत्म हो होना था , ऐसे में आयोग के इस आदेश के कारण मायावती मंगलवार को आगरा में होने वाली महागठबंधन की संयुक्त रैली में बसपा और गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में शामिल नहीं हो सकेंगी.

मायावती का मन्ना है अगर आयोग की मंशा गलत नहीं थी, तो वह उसे एक दिन बाद लागू कर सकता था .”हालांकि 16 के बाद बन की एकमियत सजा के तौर पर बे मानी रहती ” . उन्होंने कहा कि आयोग ने 11 अप्रैल को उन्हें जो नोटिस भेजा था उसमें भड़काऊ भाषण देने का आरोप नहीं लगाया गया था.

आयोग के नोटिस के जवाब में साफ कहा गया था कि मायावती ने धार्मिक भावनाओं को नहीं भड़काया था, देवबंद की रैली में दो अलग-अलग लोगों से वोट बांटने की नहीं, बल्कि दो मुस्लिम उम्मीदवारों में से एक ही मुस्लिम उम्मीदवार को वोट देने की बात कही गई थी, ताकि प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी को हराया जा सके.

बसपा प्रमुख ने कहा कि जहां तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर 72 घंटे का प्रतिबंध लगाने के आयोग के आदेश की बात है तो उससे भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वह पार्टी के अध्यक्ष नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि आयोग ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नफरत फैलाने और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की खुली छूट दे रखी है.उनपर कोई पाबंदी नहीं है एहि सौतेलापन है जो देश को कमज़ोर करदेगा .टॉप ब्यूरो

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