डॉ. शम्स इक़बाल के प्रयास सराहनीय : डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ

राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद में पाँच वर्षों से रुके कार्यों को आगे बढ़ाने में मिली सफलता

डॉ. शम्स इक़बाल के प्रयास सराहनीय : डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ

नई दिल्ली: उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ ने कहा कि राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद (एनसीपीयूएल) में पिछले पाँच वर्षों से रुके हुए कार्यों को दोबारा गति देने में डॉ. शम्स इक़बाल की मेहनत और सक्रिय भूमिका सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन उर्दू भाषा के संवैधानिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार कार्य कर रहा है। संगठन के संस्थापक महासचिव डॉ. परवाज़ुल उलूम तथा डॉ. लाल बहादुर के प्रयासों से उर्दू के पक्ष में कई महत्वपूर्ण मुकदमों में सफलता मिली है।

डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ ने कहा कि 4 सितंबर 2014 को सर्वोच्च न्यायालय में हिंदी साहित्य सम्मेलन के विरुद्ध मामले में मिली जीत उर्दू के इतिहास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। यदि उस मामले में हिंदी साहित्य सम्मेलन सफल हो जाता, तो सात राज्यों में उर्दू को प्राप्त द्वितीय राजभाषा का संवैधानिक दर्जा प्रभावित हो सकता था। सर्वोच्च न्यायालय ने भारत की बहुभाषी परंपरा को स्वीकार करते हुए उर्दू के अधिकारों की रक्षा की।

उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों की उर्दू अकादमियों की समस्याओं के समाधान के लिए संगठन ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों, संबंधित अधिकारियों तथा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र भेजे हैं, जिन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि उर्दू समाज संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए प्रयास करेगा तो भविष्य में भी महत्वपूर्ण सफलताएँ मिलेंगी।

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