बीएचयू के शैक्षणिक दौरे पर आए उत्तराखंड के शिक्षकों के साथ कुलपति ने किया संवाद

वाराणसी,07 अगस्त । उत्तराखंड के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों से आए 40 शिक्षकों के दल ने शुक्रवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू)परिसर में शैक्षणिक भ्रमण किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने खुद शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल से संवाद किया। मुख्यमंत्री-उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन एवं ज्ञानवर्धन प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत राज्य के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों से आए शिक्षकों ने परिसर स्थित केन्द्रीय कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में अपना अनुभव साझा किया तथा विश्वविद्यालय की मेज़बानी और शैक्षणिक वातावरण की सराहना की। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने सभी शिक्षकों का स्वागत किया और कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा शिक्षकों के लिए प्रारंभ की गई यह योजना अत्यंत सराहनीय है। जिस प्रकार विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक भ्रमण आवश्यक होता है, उसी प्रकार शिक्षकों को भी विभिन्न शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली, शैक्षणिक वातावरण तथा अनुभवों को जानने-समझने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि उन्हें विश्वविद्यालय में जो भी अच्छी शैक्षणिक, शोध अथवा प्रशासनिक व्यवस्थाएँ दिखाई दी हैं, उन्हें अपने-अपने संस्थानों में अपनाने का प्रयास जरुर करें। किसी भी अच्छी व्यवस्था को केवल बड़े संस्थानों तक सीमित मानकर छोड़ देना उचित नहीं है। आज साझेदारियों के माध्यम से संस्थान एक-दूसरे की विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग कर शिक्षा एवं अनुसंधान की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकते हैं। प्रो. चतुर्वेदी ने प्रतिभागियों से उनके महाविद्यालयों में संचालित स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि भ्रमण के शेष समय का उपयोग शिक्षण, शोध, प्रयोगात्मक शिक्षा तथा संस्थागत चुनौतियों पर खुली चर्चा के लिए किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परस्पर सीखने और अनुभव साझा करने का सशक्त मंच है।

कार्यक्रम के दौरान बीएचयू कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की महान परिकल्पना का जीवंत स्वरूप है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार की इस योजना की सराहना करते हुए इसे शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना के संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया। प्रतिनिधिमंडल के नोडल अधिकारी डॉ. अजीत कुमार सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय ने प्रतिनिधिमंडल को विभिन्न संकायों, विभागों, शोध केंद्रों एवं संस्थानों की कार्यप्रणाली से निकटता से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि 03 अगस्त से प्रारंभ हुए इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय की अनेक शैक्षणिक इकाइयों का भ्रमण किया तथा शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित किया।

सहायक कुलसचिव (सामान्य प्रशासन) अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि इस भ्रमण के दौरान प्रतिभागी विभिन्न संकायों, विभागों एवं संस्थानों में गए और वहां के संकाय सदस्यों से संवाद कर शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों अवगत हुए। यह आदान प्रदान काफी समृद्ध रहा। छात्र अधिष्ठाता का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रो. फतेह बहादुर सिंह ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड से आए शिक्षकों का विश्वविद्यालय में आगमन विश्वविद्यालय परिवार के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय स्वयं उनका आभारी है कि प्रतिभागियों ने अपने शैक्षणिक भ्रमण के लिए विश्वविद्यालय का चयन किया। प्रतिनिधिमंडल की ओर से शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ अनुशासन एवं नैतिकता का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला। विभिन्न संकायों एवं विभागों के भ्रमण तथा विद्यार्थियों से संवाद के दौरान यह अनुभव हुआ कि यहाँ विद्यार्थियों में केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि अनुस्पर्धा की भावना विद्यमान है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार द्वारा दिए गए आत्मीय सहयोग एवं आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया तथा कहा कि यहाँ से प्राप्त अनुभव उनके शिक्षण कार्य में उपयोगी सिद्ध होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.