‘मुझे गोली मार दीजिए’ लोकसभा चुनाव में हार की समीक्षा बैठक में बोले हरियाणा कांग्रेस प्रमुख
10 में से एक भी सीट नहीं जीतने पर हरियाणा में नेतृत्व परिवर्तन की उठी मांग , अशोक तंवर को लोक सभा चुनाव में पार्टी की पराजय के लिए नाराज़गी झेलनी पड़ रही

नई दिल्ली : लोेकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस की राज्य इकाईयों में मतभेद के स्वर बुलंद होने लगे हैं . राजस्थान के बाद अब हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमीटी में भी दरार पड़ने कि पूरी आशंकाएं दिख रही हैं .हरयाणा कांग्रेस पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख अशोक तंवर को हाल ही में हुए चुनाव में पार्टी की पराजय के लिए नाराजगी झेलनी पड़ी और उन्होंने गुस्से में कहा ,‘अगर आप मुझे खत्म करना चाहते हैं तो मुझे गोली मार दीजिए’.
पार्टी के हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने नई दिल्ली में मंगलवार को एक बैठक बुलाई थी. उस बैठक में मौजूद पार्टी के एक नेता ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के करीबी विधायकों ने तंवर को निशाना बनाया. विधायकों ने पार्टी के राज्य में लोकसभा की 10 में से एक भी सीट नहीं जीतने पर हरियाणा में नेतृत्व परिवर्तन की मांग की.

तंवर से गुरुवार को हमने संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि जब तक पार्टी अध्यक्ष और पार्टी नेतृत्व चाहता है, वह कांग्रेस को मजबूत करने का काम करते रहेंगे उन्होंने बताया कि बैठक में राज्य कांग्रेस के सभी 17 विधायकों ने भाग लिया.
बात चीत के दौरान उन्होंने बताया कि विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष तथा वर्तमान विधायक कुलदीप शर्मा ने करनाल लोकसभा सीट पर खराब प्रदर्शन के लिए तंवर को जिम्मेदार ठहराया. इस पर कुलदीप शर्मा और अशोक तंवर के बीच बहस शुरू हो गई.
बता दें कि शर्मा ने तंवर पर हाल ही में करनाल में आयोजित राज्य इकाई की बैठक में उन्हें नहीं बुलाने का आरोप भी लगाया. इस पर तंवर ने कहा कि शर्मा ने उनका फोन ही नहीं उठाया. इस वाद-विवाद के बीच हुड्डा समर्थकों ने राज्य इकाई के नेतृत्व परिवर्तन की मांग की.
इस पूरे विवाद पर हरयाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने उन्हें एकजुट हो कर काम करने की नसीहत दी क्योंकि कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. माना जाता है कि आजाद ने बैठक में कहा कि हरियाणा में नेतृत्व परिवर्तन पर कोई भी फैसला पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी लेंगे.
पूर्व हरयाणा मुख मंत्री महेंद्र सिंह हुड्डा के क़रीबी विधायक ने आरोप लगाया कि तंवर ने बैठक में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था. हालांकि तंवर ने कहा,‘मैंने अपना संयम नहीं खोया. मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं. मैं पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी पूरी क्षमता से लगा हूं.तंवर ने कहा हालांकि हम इस बार एक भी सीट नहीं जीत पाए लेकिन हमारा वोट प्रतिशत करीब 6 प्रतिशत बढ़ा है.
लोकसभा चुनाव 2019 में मिली हार के बाद राजस्थान कांग्रेस का मतभेद मतभेद भी गहराया हुआ है . राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायक पृथ्वीराज मीणा ने उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की भी मांग की है , जबकि उनके अलावा कई दुसरे विधायक भी इस सम्बन्ध में अपनी राय दे चुके हैं .