याद आई ईसा को दवा मेरे मरने के बाद ……..

टॉप ब्यूरो //बड़ोखर बुजुर्ग (बांदा) यू पी के रहने वाले नाथू सिंह के घर चार दिन से चल रही फाकाकशी के बाद वह समाजवादी राहत राशन लेने जा रहा था की रास्ते में ही उसकी मौत होगई। भूमिहीन दलित नाथू सिंह को इंतज़ार था की समाजवादी रहत राशन बटेगा तो उसके घर चूल्हा जलेगा किन्तु ग़रीब का चूल्हा तो न जल सका किन्तु चिता ज़रूर जलगई ।काश यह राशन उसको घर पर एक रोज़ पहले मिला होता तो शायद उसकी मौत भूक से न होती। चुनाव के समय वोट के लालच में हरवोटर के घर की डिटेल होती है नेता जी के पास किन्तु किसके घर चूल्हा जल और कौन भूका सोया इसकी परवाह कभी नहीं होती उनको ।
यह एक घटना है जो मीडिया के सामने आने से पता चली ऐसी हज़ारों घटनाएं देश में होती रही होंगी मगर सत्ता के भूके इन भूखों की परवाह किये बगैर अपने स्वार्थ और महत्वकांक्षाओं के पेट को भरने में मसरूफ हैं ।देश में पैदा हिंे वाले हरेक इंसान की रोटी , स्वस्थ और शिक्षा की ज़िम्मेदारी वहां की सरकारों की होती है किन्तु हमारे देश में सोशल सिक्योरिटी के नाम पर सिर्फ सियासत है धरातल पर कुछ नहीं बस वोट डालने की लाइन में लगा रहने का अधिकार मिला है हमारे नागरिक को?टॉप ब्यूरो