[t4b-ticker]
Home » Events » येदियुरप्पा बने चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री

येदियुरप्पा बने चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री

Spread the love

येदियुरप्पा बने चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री

शाम साढ़े छह बजे बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बी।एस। येदियुरप्पा ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली,कितने दिन के बाद शुरू होगा कर्णाटक का सियासी ड्रामा, दिसंबर में मध्यवर्ती चुनाव की पूरी हैं संभावनाएं , कर्णाटक की जनता इस बोझ को उठाने लिए रहे तैयार

एक बार फिर कर्नाटक के राज्यपाल वाजूभाई वाला ने येदुरप्पा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ उनके मंत्रिमंडल के किसी और सदस्य ने शपथ नहीं ली है। येदियुरप्पा सोमवार 29 जुलाई को विश्वास मत पेश करेंगे।विश्वास मत पेश किये बिना मुख्यमंत्री की शपथ कितना संवैधानिक है हमको अभी यह समझना बाक़ी है ।हालांकि नेता प्रतिपक्ष को ऐसी स्तिथि में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है बिना संसदीय दाल की बैठक किये , किन्तु कर्णाटक का नाटक कुछ ज़्यादा ही पेचीदा है इसलिए अभी देखना होगा कितना संवैधानिक है ?

विपक्ष और पक्ष में आने जाने का सिलसिला अभी और चलेगा इसपर कुछ कहा नहीं जा सकता मगर उम्मीद ऐसी ही है ।जेडीएस-कांग्रेस की सरकार गिरने से पहले वह विधानसभा में विपक्ष के नेता थे।वहीं, गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के दो और एक निर्दलीय बाग़ी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया ।

येदियुरप्पा चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सड़कों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं का जश्न का शोर शराबा शुरू हो गया ,वैसे आजकल नार्थ इंडिया में कांवड़ियों का काफी शोर है , सड़को , गली मोहल्लों में हर तरफ हाई पीच पर दज पूरी मस्ती के साथ , और खुली छूट के साथ चल रहे ।मुझे तो बहुत मज़ा आरहा है , रौनक होजाती है गीत संगीत ,भले वो कैसे ही हों ।

अरे यदुरप्पे जी की खबर से कहाँ DJ पर आगये , मगर मेरे कई हिन्दू भाई काफी परेशां और गुस्से में नज़र आये इस noise pollution से और वो यहाँ तक कहने लगे की अब कहाँ गया सोनू निगम और उस जैसे लोग जिनको अज़ान की आवाज़ बुरी लगती थी , हालाँकि अगर अज़ान माइक पर न दी जाए तो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ना चाहिए , मगर इन दज वालों पर कोनसा क़ानून चलेगा जो आये दिन pollution करते रहते हैं ।

तो कर्णाटक के पुराने और नए मुख्यमंत्री ने इस बात के भी संकेत दिए थे कि बाकी बाग़ी विधायकों को लेकर भी वो अपना फ़ैसला जल्दी ही देंगे। कहा जा रहा है कि इसी वजह से बीजेपी सरकार के गठन में कोई देरी नहीं करना चाहती है।येदियुरप्पा चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभालने जा रहे हैं। हालाँकि उनके रिकॉर्ड में एक बात और ख़ास दर्ज है की इससे पहले जब भी उन्होंने सीएम का पद संभाला, कभी कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।

KINDLY VISIT AT :https://www.youtube.com/watch?v=_okS6ESM-fA

मगर इस बार उन्होंने शुक्रवार की सुबह मंदिर में उन्होंने काफी समय लगाया होसकता है भोले की कृपा अबकी बरसात में बरस पड़े , मगर chances ज़रा कम ही हैं क्योंकि मानसून भी थोड़ा लेट ही आया है कर्णाटक में , मोदी जी भी गुफा में चुनाव परिणाम से पहले तपस्या में चले गए थे तो बंपर नतीजा आया ।

येदुरप्पा जी के भगवान कि कृपा कब तक बनी रहेगी यह देखना अभी बाक़ी है , मगर फिलहाल कुमारस्वामी के ऊपर से सत्ता की शक्ति का हाथ तो हट गया है । एक ट्वीट में येदियुरप्पा ने लिखा, “पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा के निर्देश का पालन करते हुए मैं कर्नाटक के महामहिम राज्यपाल से मुलाक़ात करके सरकार बनाने का दावा पेश कर रहा हूं।”उन्होंने कहा कि अभी वो कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं इसलिए विधायक दल की बैठक बुलाने की ज़रूरत नहीं है।

राज्यपाल वजुभाई वाला को लिखे पत्र में उन्होंने सरकार बनाने के लिए पर्याप्त विधायकों के समर्थन होने का दावा किया है। अभी बीजेपी के पास कुल 105 विधायक हैं और वो विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है।वहीं कांग्रेस की ओर से भी इस संबंध में ट्वीट किया गया है।कांग्रेस ने लिखा है, “कर्नाटक बीजेपी की जैसी स्थिति है उसे देखते हुए सरकार बनाने के दावे का कोई आधार नहीं दिखता।”

कांग्रेस के खेमे में 76 विधायक हैं। गुरुवार को स्पीकर ने कांग्रेस के तीन विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया। राज्य में कांग्रेस की सहयोगी पार्टी जेडीएस के पास 37 विधायक हैं। तीन विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 224 से घटकर 221 रह गई है।कांग्रेस के 76 विधायकों में से 13 अब भी ऐसे विधायक हैं जिनकी सदस्यता को लेकर स्पीकर को फ़ैसला देना है।

जेडीएस के 37 विधायकों में से तीन के Resignations पर भी स्पीकर को निर्णेय देना है। इन सभी के साथ ही दो विधायक (कांग्रेस के श्रीमंत पाटिल और बीएसपी के एन महेश) ऐसे हैं जिन्होंने त्यागपत्र तो नहीं दिया है लेकिन विश्वासमत की कार्यवाही से ख़ुद को अनुपस्थित रखा है।

नाम नहीं बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ”यह एक ऐसा फ़ैसला था जिसे केंद्र के नेतृत्व को लेना था। जैसा की हमने राज्य में एचडी कुमारस्वामी की सरकार को गिरा दिया तो ऐसे में यह बड़ा ही अजीब होता अगर हम सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करते। हां, ये हमें पता है कि बाग़ी विधायकों के बीच में कुछ तनाव की स्थिति ज़रूर है।”

बताया जा रहा है स्पीकर रमेश कुमार ने गुरुवार को रमेश जारकिहोली और महेश कुमताहल्ली को अयोग्य घोषित कर दिया था। इन्हें ऑपरेशन कमल 4 में मुख्य भूमिका निभाने वाला माना जाता है।बीजेपी ने कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार को गिराने के लिए इन दो कांग्रेसी नेताओ को आधार बनाया।

पत्रकार ने स्पीकर रमेश कुमार से पूछा कि क्या बाग़ी विधायकों के पास अब भी वक़्त है कि वो अपना इस्तीफ़ा वापस ले सकते हैं?
इस सवाल के जवाब में रमेश कुमार ने कहा, “मैं जानता हूं कि आप ये सवाल क्यों पूछ रहे हैं और इससे किसे फ़ायदा होगा। मैं भी उस बात को लेकर परेशान हूं कि ये एक काल्पनिक सवाल है जिसका मैं जवाब नहीं दे सकता।” इससे स्पीकर की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगे हैं

प्रोफ़ेसर हरीश रामास्वामी का कहना है कि गठबंधन सरकार के गिरने के बाद कांग्रेस को फ़ायदा लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है। यह सिर्फ़ बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने की कोशिश है।वो कहते हैं “यह सारा कुछ एक संवैधानिक संकट की ओर बढ़ रहा है, जैसे राष्ट्रपति शासन लगाना।” प्रोफेसर रामास्वामी का मानना है कि संभव है कि हम दिसंबर में मध्यावधि चुनाव होते देखें। इसकी सम्भावनाये हमको भी नज़र आती हैं , मगर मोदी है तो मुमकिन है कैसे भूल जाएंगे आप!!!

Please follow and like us:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Scroll To Top
error

Enjoy our portal? Please spread the word :)