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सुना है विचारधारा हुआ करती है ?

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Ali Aadil khan
Ali Aadil Khan Editor's Desk

सुना है विचारधारा हुआ करती है ?

प्यारे देश वासियो ,

क्या आपने कोई ऐसी विचारधारा या नज़रया देखा है जो हर पल बदलता है , मैंने देखा है , वो है सत्ता के भिकारी व् तथाकथित सियासत के रखवालों का नज़रया , यानी सियासत में विचारधारा जितना तेज़ी से बदलती है इतना कहीं नहीं ..कहीं भी नहीं..Actually सियासत में विचारधारा नहीं अवसरवाद है totally अवसरवाद  .

 

आगे बढ़ने से पहले आपको एक और सच बताता चलूँ ,,,तानाशाही उतनी ही मज़बूत होती है जितना कमज़ोर लोकतंत्र .और लोकतंत्र के कुछ नियम या उसूल खिलाफत पर आधारित हैं .लेकिन जो बुनयादी फ़र्क़ इन दोनों में ,मैं समझा हूँ वो यह है की , लोकतंत्र का मतलब , जनता का , जनता के लिए और जनता द्वारा , जबकि खिलाफत में रब का , रब के लिए  और रब के द्वारा ….इसपर हमारा तफ्सीली लेख रहेगा .. फिलहाल धार्मिक कट्टरपंथ को भी हम discuss नहीं कररहे हैं , वैसे भी कट्टरपंथ धर्म के साथ तो नहीं जुड़ना चाहिए और अगर जुड़ा है तो इस नज़रिये में संदेह और शक की गुंजाइश है . क्योंकि धर्म के साथ यदि कुछ जुड़ा है तो वो है ,त्याग , तपस्या ,समर्पण , विनम्रता , स्नेह , सहयोग , नैतिकता और प्यार … सिर्फ प्यार ….

 

चलिए बढ़ें मुद्दे की ओर ,,चरमपंथ , वाम पंथ , दक्षिणपंथ , मार्क्सवाद , लेनिनवाद , फासीवाद और हिटलरवाद , ये सब किसी विचारधाराओं का हिस्सा हैं .या यूँ कहें की ये सभी अपने अपने तौर पर विचारधाराएं या नज़रिये हैं .उपरोक्त सभी विचारधाराओं की परिभाषा में समय काफी लगेगा ,,मगर संक्षेप (मुख़्तसर)  में हम यह समझ लें आज दुनिया में बहु चर्चित दो ही विचार धाराएं हैं वामपंथ यानि लेफ्टिस्ट और दक्षिणपंथ यानी रइटिस्ट   ………..

 

पहले left यानि वाम विचारधारा को संक्षेप में देखलें …

 

इस विचारधारा का असल मलतब है समाज में पिछड़े लोगों को बराबरी पर लाना। यह विचारधारा धर्म , जाती , वर्ण , समुदाय , राष्ट्र और सीमा को नहीं मानती ; इसका वास्तविक कार्य है पिछड़ते लोगों को एक साथ एक मंच पर लाना। यह विचारधारा उन लोगों के प्रति सहानुभूति रखती है जो किसी कारणवश समाज में पिछड़ गए हों, शक्तिहीन हो गए हों या उपेक्षा का शिकार हों ऐसे में ये वामपंथ विचारधारा उन सभी पिछड़े लोगों की लड़ाई लड़ती है और उनको समान अधिकार देनें की मांग को रखती है। ..यह अलग बात है इसका मुख्य पक्षधर रूस , सीरिया के मामले में उल्टा कररहा है यानी विचारधारा के विपरीत होरहा है या यूँ कहें की पूर्वाग्रह से ग्रहस्त नज़र आता है ….

 

दूसरी right यानि  दक्षिण  विचार धारा ……

ये विचारधारा वामपन्थ के ठीक विपरीत है जो विश्वास करती है धर्म में, राष्ट्र में और अपने धर्म से जुड़े रीति रिवाजों में। यह वो विचारधारा है जो सामाजिक स्तरीकरण या सामाजिक असमता को अपरिहार्य, प्राकृतिक, सामान्य या आवश्यक मानते हैं। इनकी खासियत यह है कि ये समाज की परम्परा, अपनी भाषा, जातीयता, अर्थव्यवस्था और धार्मिक पहचान को बढ़ाने की चेष्टा करते हैं। दक्षिणपन्थी की ये धारणा है कि प्राकृतिक नियमों के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए और समाज को आधुनिकता के अलावा अपने पुराने रिवाजों को साथ लेकर भी चलना चाहिये।” हालांकि प्रकृति के साथ खिलवाड़ पर ही इनकी बुनियाद रखी है ” अब आप वर्तमान (current) हालात पर नज़र डालें और बताएं की ऊपर ज़िक्र की गयी विचार धाराओं में क्या कोई भी विचारधारा कहीं Exist करती है या किस हद तक करती है .?

कुछ फ़र्क़ तो है …

हालांकि एक फ़र्क़ जो हमको सियासत के पटल पर देखने को मिलता है वो यह है की left विचारधारा से जुड़े cadre आम तौर पर अवसरवादी नहीं होते और अपने जीवन में सादगी रखते दिखाई देते हैं लेकिन लेफ्ट में भी EXTRIMISM (उग्रवाद) राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिलता रहा है ।

आपका

अली आदिल खान

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