निखत जरीन के मुक्कों ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में मचाया कोहराम, जीता गोल्ड.

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भारतीय मुक्केबाज निखत जरीन गुरुवार को विश्व चैंपियन बन गईं। उन्होंने 52 भारवर्ग के फाइनल में थाईलैंड की जितपोंग जुटामेंस को एकतरफा 5-0 से हरा दिया। तेलंगाना की मुक्केबाज भारत की ऐसी पांचवीं महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप में सोने का तमगा अपने नाम किया है।

निखत की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बधाई दी।

निखत जरीन के मुक्कों ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में मचाया कोहराम, थाई बॉक्सर को पीट जीता गोल्डप्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, ” निखत जरीन को महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में शानदार स्वर्ण पदक जीतने के लिए बधाई। मैं मनीषा मौन और परवीन हुड्डा को भी इसी प्रतियोगिता में कांस्य पदक के लिए बधाई देता हूं।’

निखत से पहले दिग्गज एम सी मैरीकॉम ने 2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018 में खिताब जीते थे। इसके अलावा 2006 में सरिता देवी, जेनी आर एल और लेखा केसी ने अपने-अपने भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।

विजेता की घोषणा होने के बाद जरीन अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं। वह खुशी में कूदने लगी और अपने आंसू नहीं रोक पाई। जुटामस के खिलाफ यह जरीन की दूसरी जीत है।

निखतभारतीय मुक्केबाज ने इससे पहले थाईलैंड की मुक्केबाज को 2019 में थाईलैंड ओपन में भी हराया था। हैदराबाद की मुक्केबाज जरीन इस साल बेहतरीन फॉर्म में रही हैं। वह फरवरी में प्रतिष्ठित स्ट्रेंजा मेमोरियल में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं थी। जरीन के स्वर्ण पदक के अलावा मनीषा मौन (57 भारवर्ग) और पहली बार विश्व चैंपियनशिप में खेल रही प्रवीण हुड्डा (63 भारवर्ग) ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इन दोनों को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था।

इस बार फाइनल में पहुंचने वालीं पहली भारतीय मुक्केबाज बनीं। 

सेमीफाइनल में जरीन ने ब्राजील की कैरोलिन डि अलमेडा को भी 5-0 से पराजित किया था। भारत की ओर से 12 सदस्यीय टीम ने हिस्सा लिया था। भारत ने चार वर्ष के बाद स्वर्ण पदक हासिल किया है। इससे पहले 2018 में एम सी मैरीकॉम ने जीता था।

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