मोदी सरकार का रवैया देश के लिए घातक : मनमोहन सिंह

Date:

सरकार का ‘एकपक्षीय’ रवैया Federal Politics के लिए ठीक नहीं :मनमोहन सिंह

नई दिल्ली: राजधानी में एक राष्ट्रीय परिचर्चा को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 15वें वित्त आयोग के विषय और शर्तों में बदलाव के तरीके को ‘एकपक्षीय’ बताते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एकपक्षीय सोच संघीय नीति और सहकारी संघवाद के लिये ठीक नहीं है।

सिंह ने वित्त आयोग के समक्ष रखे गए अतिरिक्त विषयों और राज्यों पर उनके संभावित प्रभाव के बारे में राजधानी में एक राष्ट्रीय परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘सरकार वित्त आयोग के विचारणीय विषय व शर्तों में फेरबदल करना भी चाहती थी तो अच्छा तरीका यही होता कि उस पर ‘राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन’ का समर्थन ले लिया जाता। यह सम्मेलन अब नीति आयोग के तत्वावधान में होता है।”

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं करने से यह संदेश जाएगा कि धन के आवंटन के मामले में केंद्र सरकार राज्यों के अधिकारों को छीनना चाहती है।’ मनमोहन सिंह ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम अपने देश की जिस संघीय नीति और सहकारी संघवाद की कसमें खाते हैं, यह उसके लिये ठीक नहीं है।’ सिंह ने कहा, ‘आयोग की रिपोर्ट वित्त मंत्रालय जाती है और उसके बाद इसे मंत्रिमंडल को भेजा जाता है। ऐसे में मौजूदा सरकार को यह देखना चाहिए कि वह राज्यों के आयोगों पर एकपक्षीय तरीके से अपना दृष्टिकोण थोपने के बजाय संसद का जो भी आदेश हो उसका पालन करे।’

आपको बता दें कि 15वें वित्त आयोग को राज्यों के बीच राशि के बंटवारे का आधार जो पहले 1971 की जनगणना के आधार पर था अब उसको 2011 की जनसंख्या को उसका आधार बनाने के लिये प्रस्ताव रखा गया है।जबकि दक्षिण भारत के कुछ राज्य इसका विरोध कर रहे हैं। प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एन। के। सिंह की अध्यक्षता में 15वें वित्त आयोग का गठन 27 नवंबर 2017 को किया गया था।

इस आयोग को अपनी सिफारिशें 30 अक्टूबर 2019 तक पेश करनी थी , अब इसकी तिथि बढ़ा कर 30 नवंबर 2019 कर दिया गया है। पूर्व PM मनमोहन सिंह ने कहा, ‘मैं अभी भी तमाम Authorities ( प्राधिकरणों) से यह निवेदन करता हूं कि वे इस संबंध में किसी भी विवाद की स्थिति में मुख्यमंत्रियों के सुझावों पर गौर करें।’ उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद में परस्पर समझौते करने की जरूरत होती है। पूर्व PM ने ज़ोर देकर कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार राज्यों की बात सुने और उन्हें साथ-साथ लेकर चले, इसी से हमारा संघिये ढांचा और federal structure मज़बूत बना रह सकता है वरना जो स्तिथि आज है उससे भी खराब होती जायेगी ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

धरने पर बैठे राहुल गांधी को पुलिस घसीटकर ले गई हिरासत में

पीएम आवास के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी...

जौहर यूनिवर्सिटी, जंतरमंतर पर धरना और आमरण अनशन

अब देश में शिक्षा और शिक्षा केंद्रों की रक्षा...

लोकतंत्र का अपहरण: जब सत्ता सवाल से और….

कपिल बर्मन (जाग्रत भारत) लोकतंत्र का अपहरण: जब सत्ता सवाल...

सांप्रदायिक शक्तियों ने माहौल को पूरी तरह खराब कर दिया है: मदनी

प्रेस विज्ञप्ति नफ़रत की आँधियों में हम मोहब्बत के चिराग़...