मलिक ज़ादा उर्दू भाषा और साहित्य के सांस्कृतिक दूत थे- प्रो0 अनीस अशफ़ाक़

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लखनऊ 28 अप्रैल। प्रो0 मलिक ज़ादा मन्जूर अहमद उर्दू भाषा और साहित्य के ऐसे दूत थे। जिन्होने विश्व के कोने कोने मे उर्दू सस्कृति को पहुँचाया। वो एक विशिष्ट सहित्यकार और कवि तो थे ही उनका एक बड़ा काम यह है कि ऐसे समय में जब राजनीतिक रुप से उर्दू हर जगह से हटायी जा रही थी तब उन्होने लोगो के दिलो में उर्दू को जगह दिलाई। उर्दूजो ख्याति शायद उसे पिछले दौर में प्राप्त न थी वो ख्याति उसे मलिकजादा ने दिलाई। उनके निधन से ऊर्दू दुनिया का एक दौर खत्म हुआ बल्कि आगे का रास्ता भी साफ नही रहा। इन विचारो को हिन्दी उर्दू साहित्य आवर्ड कमेटी और शहर की अन्य साहित्यिक संगठनो की तरफ से अयोजित एक कार्यक्रम जिसका विषय श्रद्वांजलि मलिक ज़ादा की याद मे अपने अध्यक्षीय भाषा में प्रो0 अनीस अश्फाक ने प्रकट किया।

 

हिन्दी उर्दू साहित्य आवर्ड कमिटी व लखनऊ के विभिन्न साहित्यिक संगठनो की ओर से प्रो0 मलिक जादा की याद में एक श्रद्वांजली सभा का आयोजन किया गया।  जो राय उमानाथ बली प्रेक्षाग्रह के जयशंकर सभागार मंे अयोजित हुआ जिसमें शहर के सम्मानित लोगो ने उपस्थित होकर प्रो0 मलिक जादा मन्जूर अहमद को श्रद्वांजलि प्रकट की। कार्यक्रम मे हिन्दी उर्दू सहित्य अवार्ड कामेटी के अध्यक्ष के अतिरिक्त राष्ट्रीय इत्तिहाद मिल्लत कन्वेशन, अदबी संस्थान, सिदरा एजूकेषनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी, मसीहा उर्दू सोसायटी ,नागरिक अधिकार परिषद, न्यूक्लियस एजूकेषनल एण्ड वेलफेयर सोसायटी व जनहित संघर्ष मोर्चा आदि संगठनो के लोग उपस्थित थे।

अतहर नबी व सुहैल काकोरवी ने संयुक्त रुप से कहा कि प्रो0 मलिक जादा मेरे व मेरी सोसायटी के सरपरस्त थे और उर्दू भाषा के संरक्षक थे उन्होने गुरु के रुप में उर्दू सहित्य में प्रवेश किया और शायर व आलोचक के रुप मे ख्याति प्राप्त की मगर विश्व ख्यति उन्हाने मुशायरे के संचालक के रुप मे प्राप्त की उनका व्यक्तित्व बहुत ही महान था वो एक ऐसे संचालक थे जिसने शायरी को आवाम के करीब किया मलिक जादा मन्जुर अहमद ने मुशायरे के संचालन को बुलन्दी पर पहुचाया उन्होने मुशायरे की संस्कृति को पस्ती से निकाल कर नई बुलन्दी पर पहुँचाया उनके देहान्त उर्दू जगत में जो शून्य पैदा हुआ है उसको भर पाना सम्भव नही है।

विश्व विख्यात मुशायरा संचालक अनवर जलालपुरी व डा0 असमत मलिहाबादी ने संयुक्त रूप से कहा कि विश्व विख्यात मुशायरा संचालक मलिक जादा मंजूर अहमद की साहित्यिक सेवाओं को भुलाया नहीं जा सकता। जियाउल्लाह सिददीेकी, डा0 मसीहउददीन खान, निसार अहमद व रफी अहमद ने संयुक्त रूप से कहा कि मलिकजादा की शायरी विशेष रूप  से उनकी ही शैली है न केवल वे एक अच्छे शायर थे बल्कि वे एक अच्छे गध लेखक भी थे। इस अवसर पर विशेष रूप से डा0 उरफी फैजाबादी, प्रो0 काजी अब्दुल रहमान, सिराज मेहदी, अतहर नबी, अनीस अन्सारी, उपकुलपति डा0 खान मसूद, असमत मलिहाबादी, डा0 अब्बास रजा नैयर, सुहैल काकोरवी, नोमान आजमी, डा0 मसीहउददीन खान, जियाउल्लाह सिददीकी, रफी अहमद, मो0 आफाक, हाजी फहीम सिददीकी, शहजादे मन्सूर अहमद, शहरयार जलालपुरी, सुल्तान शकिर हाशमी, अब्दुल वहीद फारूकी, मारूफ खान सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।BY अतहर नबी

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