माल्या को किसने भगाया इंग्लैंड ?

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क्या माल्या को भगाने में वित्त मंत्री ने मदद की??

किंगफ़िशर एयरलाइन्स का मालिक व प्रमुख शराब का धंदा करने वाला भगोड़ा विजय माल्या जब 7000 करोड़ रुपये देनदारी को छोड़कर विदेश जा रहा था तो उसको विदेश यात्रा से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस हवाई अड्डों को जारी करदी गईं थी.

ऐसे में विजय माल्या को विदेश जाने के लिए किसी प्रभावशाली नेता की मदद की जरूरत थी जो एरोड्रम पर उसकी गिरफ्तारी न होने दे.रिपोर्ट के अनुसार इस कार्य के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली से विजय माल्या मिला और उसके बाद वह भारत से भाग गया .

बस उसके बाद से शुरू हुआ राजनैतिक ड्रामा .इस बीच सरकार अपनी जवाबदेही से भी आसानी से न ही बच सकती थी , इसी लिए अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए माल्या को इंग्लैंड से देश में लाने के लिए एक राजनीतिक बयानबाज़ी का सिलसिला शुरू होगया .

देखना यह है कि यदि इस तरह का मामला किसी विपक्ष के नेता या उसके सहयोगी या जानकार के साथ हुआ होता तो क्या सीबीआई प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर उस नेता की गिरफ्तारी न कर लेती ? यह सवाल देश कि जनता सरकार से करना चाहती है .

इस प्रकरण में राहुल गाँधी ने अरुण जटेली को कहा कि उनको तुरंत रिजाइन करदेना चाहिए ,क्योंकि उनको माल्या के सम्बन्ध में तमाम जानकारियों के बावजूद एजेंसीज को अँधेरे में रखा या उनको इसकी जानकारी नहीं दी. यह अपने में बड़ा जुर्म है और देश के साथ गद्दारी में आता है .

इस पूरे प्रकरण में वरिष्ठ नेता और भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने 12 जून को ट्वीट किया जिसमें उन्होंने सवालिया अंदाज़ में सर्कार से पूछा था, “माल्या आसानी से देश नहीं छोड़ सकता क्योंकि हवाई अड्डों पर उसके खिलाफ कड़ा लुक आउट नोटिस जारी हो चुका था. इसके बाद वो दिल्ली आया और उसने किसी प्रभावी शख्स से मुलाकात की जो विदेश जाने से रोकने वाले उस नोटिस को बदल सकता था. वो शख्स कौन है जिसने नोटिस को कमजोर किया?” इस ट्वीट में सुब्रमण्यम अपनी बात केह्गाये जो उनको कहना था .

आज विजय माल्या द्वारा जब यह स्वीकार कर लिया गया कि देश छोड़ने से पहले उसने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी. इस तथ्य को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अभी तक देश से छिपाए रखा था.

अब सवाल यह पैदा होता है कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच मचने वाली जनता कि लूट पर काबू पाने के लिए कौन आएगा , या सत्ता और विपक्ष के बीच इसी तरह सत्ता परिवर्तन होता रहेगा ?देश कि जनता जानती है कि इस समय सीबीआई अमित शाह के तोते के रूप में जानी जाती है.अब यदि हमारी खुफया एजेंसीज सत्ता पक्ष नेताओं के प्रवक्ता और सहयोगी बन जाएँ तो देश किस ओर जारहा है आप भली भांति समझ सकते हैं .टॉप ब्यूरो

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