लोकतान्त्रिक संस्थाओं पर बढ़ते हमले के खिलाफ रिहाई मंच 6 मई को करेगा लखनऊ में सम्मलेन

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लोकतान्त्रिक संस्थाओं पर बढ़ते हमले के खिलाफ रिहाई मंच 6 मई को करेगा लखनऊ में सम्मलेन

लखनऊ 28 अप्रैल 2018. रिहाई मंच , राजिंदर सच्चर की स्मृति में, शब्बीरपुर दलित विरोधी हिंसा को एक साल और मीडिया विजिल के दो साल पूरे होने पर 6 मई को लखनऊ में सम्मलेन करेगा. मंच ने कहा कि भाजपा सरकार में लोकतान्त्रिक संस्थाओं पर लगातार हमले हो रहे हैं और हाशिये पर खड़े समाज के ऊपर सरकारी दमन भी बढ़ा है, भीम आर्मी के नेता चन्द्रशेखर के ऊपर रासुका लगाकर जेल भेजना इसी साज़िश का हिस्सा है .

सहारनपुर से लेकर बलिया तक पूरा सूबा जातीय तथा साम्प्रदायिक आग में झुलस रहा है. मुठभेड़ के नाम पर दलित, पिछड़े और मुसलमानों की हत्याएं हो रही हैं. मनुवादी-सामन्ती ताकतों को खुली छूट हैं ,उत्तर प्रदेश में संविधान निर्माता बाबा साहेब की मूर्तियाँ दिन-दहाड़े तोड़ी जा रही हैं.

गाय के नाम पर कहीं दलितों को सर मुड़वाकर सरेराह घुमाया जाता है तो मुस्लिम समाज की दुधमुहे बच्चे और महिलाओं को जेल भेजा जा रहा है. एससी-एसटी एक्ट को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है और इसके खिलाफ 2 अप्रैल को देश व्यापी आन्दोलन में शामिल लोगों के ऊपर संगीन धाराओं में मुक़दमे लादकर जेलों में ठूस दिया गया है.

देश के तमाम संस्थानों में दलितों –पिछड़ों के प्रतिनिधित्व के विरुद्ध कानून बनाकर उसे कमज़ोर किया जा रहा है. उधर न्यायपालिका में भी सिर्फ राजनीतिक हस्तक्षेप ही नही बढ़ा है बल्कि पूरी व्यवस्था पर खतरा मडरा रहा है, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से लेकर असीमानंद तक पर संगीन मुक़द्दमों के मामलों में आदालतों के फैसले इसके उदाहरण हैं. इन सभी समस्यायों व परिस्थितिओं के सम्बन्ध में रिहाई मंच लखनऊ में सम्मलेन करने जारहा है .

रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज़ आलम ने जारी प्रेस नोट में बताया कि मानवाधिकार व् लोकतान्त्रिक आंदोलनों के संरक्षक राजिंदर सच्चर की याद में 6 मई को लखनऊ में सम्मलेन होना है. जिसमें मुख्य वक्ता के तौर भीम आर्मी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नौटियाल, गांधीवादी कार्यकर्ता हिमांशु कुमार, पूर्व आईजी एसआर दारापुरी, अल्पसंख्यक अधिकार मंच के शमशाद पठान और मीडिया विजिल के कार्यकारी संपादक अभिषेक श्रीवास्तव होंगे.

शाहनवाज़ आलम ने कहा की पूरे देश में मीडियाकर्मियों पर हमले हो रहे हैं. मीडिया संस्थान या तो बिक चुके हैं जो राष्ट्रवादी हैं या अपनी ज़िम्मेदारियों को निभा रहे हैं वो दमन और उत्पीड़न झेल रहे हैं. मीडिया विजिल के दो साल होने पर जरुरी है कि इस तरह की पत्रकारिता को सराहा जाए जिसका सरोकार आम लोगों से जुडा हुआ है. उन्होंने कहा जब लोकतंत्र पर चौतरफ़ा हमला हो रहा है तो ऐसे वक्त में मीडिया विजिल जैसे सभी दूसरे संस्थानों की भूमिका बढ़ जाती है.

द्वारा जारी-

शाहनवाज़ आलम

प्रवक्ता,रिहाई मंच

9415254919

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