क्या इजराइल को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए ?

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Smoke billows from an Israeli air strike on the Hanadi compound in Gaza City, controlled by the Palestinian Hamas movement, on May 11, 2021. (Photo by MOHAMMED ABED / AFP)

इजरायल के एक वरिष्ठ सैन्य कमांडर ने कहा कि गाजा पट्टी में उसके हमले ने “हमास को कई साल पीछे धकेल दिया है , और इसे फिर से बनाना बहुत मुश्किल होगा”।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को यह टिप्पणी इजरायल और हमास के बीच तड़के दो बजे प्रभावी बात चीत होने के बाद गाजा पट्टी में 11 दिनों तक चले रक्तपात को समाप्त करने के बाद आई है।


11 दिनों की ख़ूंरेज़ लड़ाई के दौरान गाजा में लगभग 230 फलस्तीनियों शहीद होने की ख़बरें आम हैं और लगभग 2,000 अन्य घायल हो गए। जबकि इज़राइल में,सिर्फ 13 लोग मारे जाने की खबर पर विशेषज्ञों का इश्काल है , ये तादाद कहीं ज़्यादा होसकती है ।नाम पोशीदा रखने की शर्त पर इज़राइली Commander विदेशी पत्रकारों को यह जानकारी दी , वरिष्ठ कमांडर ने इज़राइल द्वारा किए गए लक्ष्यों की संख्या के बारे में बताते हुए कहा , कि उनमें से हजारों थे।यानी हज़ारों missile दाग़े गए होंगे .

उन्होंने कहा, “इजरायल का लक्ष्य हमास की गणना को बदलना था जब वह इजरायल को भड़काने का फैसला करता है,” ।

लड़ाई तब शुरू हुई जब इसरायली पुलिस ने अल-अक्सा मस्जिद के अंदर जुमा की नमाज़ अदा करने वाले मासूमों पर बेरहमी से फायरिंग और आंसू गैस के गोलों की बौछार करदी .और इसके अलावा शेख जर्राह में वहां के फलस्तीनी बाशिंदों को ज़बरदस्ती उनके घर से निकलने में इसरायली Civilian की मदद सहयोनि पुलिस ने की .

यरुशलम और फलस्तीन के इलाक़ों में हफ्तों के तनाव के बाद इसरायली फ़ौज की जारहियत (आतंक ) के जवाब में हमास ने तिल अबीब पर Rockets दाग़े , इसके जवाब में इजराइल ने हवाई हमले किये । हालांकि हमास के हमले ने इज़राइल को आश्चर्यचकित कर दिया और इसके बाद इजराइल ने बौखलाकर बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई करते हुए Air Strike करनी शुरू की . और साथ ही सेना द्वारा “दीवार इ गिरया रक्षक ” नामक एक ऑपरेशन की शुरुआत भी की गयी ।

इज़राइल रक्षा बलों (आईडीएफ) के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान, हमास की ओर से तिलबीब पर 4,000 से अधिक रॉकेट दागे गए थे।

“इसरायली फ़ौज का हवाई आक्रमण “मध्य पूर्व में इज़राइल के अन्य विरोधियों को सावधान करने” की नीयत से भी किया गया था यह ब्यान आईडीएफ के वरिष्ठ कमांडर Operation ने दिया . वरिष्ठ कमांडर ने कहा, कि “ग़ाज़ा में हमारी लड़ाई Middle East को नज़र बंद करने का शुभारम्भ है ।”

इस बीच जैसे-जैसे ऑपरेशन बढ़ा इसरायली फ़ौज ने फिलीस्तीनी Civilians को निशाना बनाया , अस्पतालों और बच्चों को निशाना बनाना शुरू करदिया तो अन्तर्राष्ट्री स्तर पर इसकी निंदा शुरू होगई मरने वालों की संख्या बढ़ी, इज़राइल कठोर अंतरराष्ट्रीय आलोचना के अधीन आ गया ।

इजराइल को सबसे अधिक आलोचना उस वक़्त झेलनी पडी जब उसने अपने हवाई हमलों के ज़रिये , एसोसिएटेड प्रेस और अल जज़ीरा के कार्यालयों वाली एक बिल्डिंग और एक हाउसिंग सोसिएटी ईमारत को ध्वस्त कर दिया था ।

हालांकि इसरायली सूचना के अनुसार इन इमारतों में रहने वाले लोगों को कुछ घंटे पहले ही बिल्डिंग खाली करने के लिए कह दिया गया था . आईडीएफ का दावा था कि हमास उसी इमारत से बड़े अभियान चला रहा है।

इज़राइली वरिष्ठ कमांडर ने कहा कि “यह संवेदनशील और खुफिया जानकारी मिली है जिसे हमको अमेरिकी वरिष्ठअधिकारियों ने साझा किया था ”की यह इमारत का इस्तेमाल हमास द्वारा खुफिया, अनुसंधान और विकास गतिविधि के लिए किया जाता था.

अब इस पूरी रिपोर्ट के परिपेक्ष में कई सवाल उभर कर आते हैं जिनमें यह भी है की क्या हमास को अपने शहरियों की सुरक्षा का अधिकार नहीं है , जिस तरह इजराइल ने Al Jazeera और Associated Press के कार्यालयों पर हमला किया , इसकी निंदा विश्व भर में हुई , लेकिन क्या Internationaly Renowned और Recognised Media Houses जैसे Associated Press और Al Jazeera को आज़ादाना तौर से दुनिया को सच बताने का हक़ नहीं है ? ये सब अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार और Righ To Freedom Of Speech and Expresions का खुला उल्लंघन है जिसके लिए इजराइल को सज़ा मिलनी ही चाहिए .

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