कर्तव्य पथ कहाँ जाता है ……….जी ? मुसलमान को सेवक ए हिन्द का ख़िताब किसने दिया

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Ali Aadil khan

Editor’sDesk

कर्तव्यपथ , Article 51 A ,सुभाष चंद्र बोस , आज़ाद हिन्द फ़ौज और मुसलमान

मुसलमान राष्ट्रप्रेमी होता है राष्ट्रभक्त नहीं इस लेख

में इसको हक़ीक़त को समझना होगा ….

 

 यह सम्पादकीय तीन हिस्सों में लिखा गया है कृपया तीनों भाग

देखें तभी किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है

अगर कोई झूठा राष्ट्र भक्त हैं तो………….’

Part 1 …

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी राजपथ को कर्तव्य पथ का नाम देकर एक नया Vision देना चाहते होंगे …इसके माध्यम से शायद यह बताना मक़सद है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग जब 26 जनवरी और 15 अगस्त को कर्तव्यपथ पर आएंगे तो अपने कर्तव्यों का निर्वाह देश और मानवता की सेवा करने का संकल्प लेंगे .क्या यही मंशा है न मोदी जी आपकी ?

लेकिन यहाँ एक सवाल करना मैं अपनी Profesional ज़िम्मेदारी समझता हूँ की अब तक जितनी भी Roads , इमारात , Railway Stations .,छोटे बड़े शहरों के जो नाम तब्दील किये गए हैं उसके बाद कौन कौन से फायदे देश की जनता को हासिल हुए ? अगर हुए तो कर्तव्यपथ से भी लाभ की उम्मीद होनी चाहिए वरना यह भी जुमले बनकर देश की जनता को भ्रमित करने और धोखा देने जैसा ही रहेगा ….हालाँकि पूर्व PM जवाहर लाल नेहरू के दौर में यह रोड जब किंग्स वे से राज पथ हुआ था तो भी कोई फायदा देश की जनता को तो नहीं हुआ था …..

मोदी जी कर्तव्य पथ के उद्घाटन दिवस के अवसर पर कह रहे थे , हमने पिछले 8 वर्षों में कई ऐसे निर्णय लिए हैं जिनमें नेताजी के सपनों और आदर्शों की छाप है ,अगर वास्तव में ऐसा है , तो नेता जी के उस सहयोगी का भी इस अवसर पर कम से कम नाम ही ले लेते जिसने अपनी करोड़ों की संपत्ति देश की आज़ादी के नाम पर लुटा दी थी , और खुद एक सिपाही की तरह आज़ाद हिन्द फ़ौज में शामिल हुए , उनका नाम था मेमन अब्दुल हबीब हुसैन युसूफ मार्फ़ानी .

नेता जी उनके जज़्बा ए आज़ादी और इस बड़े कारनामे से बहुत प्रभावित थे , पूरे भारत से किसी ने भी आर्थिक योगदान के सम्बन्ध में यह हिम्मत और जज़्बा नहीं दिखाया था जो युसूफ मेमन जी ने दिखाया था , हालाँकि कई दुसरे बड़े अमीर लोग भारत में ही मौजूद थे | उनके इस जज़्बे को सलाम करते हुए नेता जी सुभाष ने उनको सेवक ए हिन्द का ख़िताब दिया था . और यक़ीनन यह युसूफ मर्फ़ानी जी का देशप्रेम ही था जो उनको अपना सब कुछ क़ुर्बान करने पर मजबूर कर रहा था . इसके साथ वो अपने मज़हब इस्लाम पर पाबंदी से अमल करते थे , क्यों कि उनके मज़हब में भक्ति , ज़मीन आसमान , और इसके बीच जो कुछ भी है उसके बनाने वाले की है न कि किसी देश में बनी इमारतों या भवनों की या ज़मीन के टुकड़ों की ..

मोदी जी आप सन 2012 में नेता जी के ऊपर आयोजित एक कार्यक्रम के मौके पर भाषण देते हुए गुजरात से निकलने वाले एक अख़बार के रिपोर्टर जिन्होंने आज़ाद हिन्द फ़ौज पर EXCLUSIVE रिपोर्ट प्रकशित की थी उनका गुणगान कर रहे थे . उनका कई बार नाम तो लेते हैं , और लेना चाहिए लेकिन इस मुसलमान स्वतत्रता संग्रामी का नाम लेना पसंद नहीं करते हैं जिसने अपना सब कुछ देश की जनता की आज़ादी पर लुटा दिया था , और आज़ाद हिन्द फ़ौज के संस्थापक की ऐसे समय मदद की थी .जब देश से कोई आर्थिक मदद के लिए आगे नहीं आरहा था |

शायद इसलिए आपने उनका नाम लेना मुनासिब नहीं समझा कि वो एक मुस्लमान थे ? यदि उनका नाम देश की जनता को मालूम होगया तो देश की आज़ादी में मुसलमानो के किरदार का जनता को पता लग जाएगा …यह संकीर्ण और भेदभाव वाली सोच को दर्शाता था ….शायद वो आपका राजनितिक अंदाज़ गुजरात के मुख्यमंत्री की हैसियत SUIT करता होगा , लेकिन 140 करोड़ के देश के प्रधान मंत्री के रूप में ऐसे बयानों की उम्मीद देश आपसे नहीं करता , जिसकी पुनरावृत्ति हो रही है … जिस तरह कर्तव्यपथ के उद्घाटन के अवसर पर आपने दिया , जब नेता जी की मूर्ती का भी अनावरण किया जा रहा था .

नेताजी सुभाष के एक बहुत क़रीबी मेमन युसूफ मार्फानी पर ज़रा एक तारीख़ी सच को भी जान लेते हैं ,,,,जब कर्तव्य पथ पर नेता जी की मूर्ती का अनावरण होरहा था ,अच्छा होता की मोदी जी या कम से कम उनकी कैबिनेट का कोई मंत्री ही इस सच को बयान कर देता तो इससे देश की एकता और अखंडता को बल मिलता और विकास की राह हमवार होती , लेकिन वो नियत नहीं दीखाई देती ,,, .

जब देश की आज़ादी के लिए सुभाष चंद्र बोस आज़ाद हिन्द फ़ौज की स्थापना कर रहे थे तब इस बड़े काम के लिए धन की शदीद ज़रुरत थी ,उस वक़्त गुजरात एक बड़े कारोबारी मेमन अब्दुल युसूफ हुसैन मार्फानी का परिवार रंगून में रहता था ‘आज़ाद हिन्द फौज’ को आर्थिक मदद का संदेश जैसे ही मेमन अब्दुल हबीब युसूफ मार्फानी को मिला , अब्दुल युसूफ मार्फानी ने अपनी सारी जायदाद,नकदी सब कुछ देश की आज़ादी के लिए सुभाष चंद्र बोस के हवाले करदी जिसकी कीमत उस ज़माने में एक करोड़ रूपए थी उसे ‘आजाद हिन्द बैंक’ में जमा कर दिया गया ..

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने उनके इस योगदान पर कहा था की ‘हबीब सेठ ने आजाद हिन्द फौज की मदद की है उनक यह योगदान हमेशा याद रखा जायेगा।नेताजी ने मेमन अब्दुल हबीब युसूफ मार्फानी का धन्यवाद देते हुए उनको ‘सेवक-ए-हिन्द‘ का खिताब दिया था | इतिहासकार राज मल कासलीवाल अपनी किताब ‘आज़ाद हिन्द फौज एंड आफ्टर’ में इस पूरे वाक़िये को तफ्सील से लिखते हैं …

इतना ही नहीं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की आजाद हिन्द फौज’ में 40% मुसलमान थे आज़ाद हिन्द फौज में जिस शख्स को सेना में भर्ती करने का काम सौंपा गया था उनका नाम गुलाम हुसैन मुश्ताक रंदेरी था ,वे भी गुजरात सूरत के रहने वाले थे।

To be continued,,,,,,,,

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