JIH ने दलित वर्गों पर बढ़ते अत्याचार की निंदा और चिंता वयक्त की

जमाअत इस्लामी हिन्द के मुख्यालय में मासिक संवाददाता सम्मलेन में अमीर जमाअत मौलाना जलालुद्दीन उमरी ने कहा कि देश में दलित वर्गों पर बढ़ते हुए अत्याचार पर अत्यंत चिंता प्रकट करती है और इन घटनाओं की पुरजोर निन्दा करती है। गत दिनों गुजरात के ऊना तहसील के एक गांव में मुर्दा गाय की खाल उतारने के आरोप में दलित वर्ग के सात लोगों को बेरहमी से नंगा करके पीटा गया। अत्यचार और हिंसा की यह केवल एक घटना नहीं है। बल्कि देश के हर भागों में कई तरह का बहाना बनाकर दलितों को निष्कृष्टतम अत्याचार का निशाना बनाया जा रहा है। वह चाहे महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक दलित लड़की के बलात्कार का मामला हो या बहुजन समाज पार्टी की मुखिया सुश्री मायावती के खिलाफ अभद्र शब्दों के इस्तेमाल का हो। इन सभी घटनाओं में जातीय श्रेष्ठता की मांसिकता काम करती नजर आती है। केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से इस प्रकार की मांसिकता में तेजी आयी है। अफसोस की बात है कि प्रधानमंत्री इन घटनाओं पर खामोशी अपनाये हुए हैं । नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़े के अनुसार हर साल केवल दलित महिलाओं के साथ बलात्कार की 2500 घटनायें होती हैं। दलितों के साथ अन्य अपराध और भेदभाव के मामले अलग हैं।

आजादी के 68 साल बाद भी सभी संवैधानिक सुरक्षा और कानून और राजनीति प्रयासों के बावजूद भारतीय व्यवस्था दलित वर्ग को मानवीय सम्मान तो दरकिनार इंसान समझने के लिए भी तैयार नहीं है। जमाअत इस बात पर बल देती है कि इंसान को सम्मान की दृष्टि से देखा जाए।  जातीय श्रेष्ठता की भावना समाज के लिए अभिशाप है जिसे हर कीमत पर दूर किया जाना चाहिए। सभी मानवजाति को सम्मान दिया जाना चाहिए और मानवता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। जमाअत इस्लामी हिन्द मांग करती है कि दलितों पर अत्याचार के सिलसिले पर रोक लगाई जाए। दोशी और अपराधी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और पुलिस और प्रशासन को जवाबदेह बनाया जाये।

जमाअत इस्लामी हिन्द देश की तेजी से बिगड़ती हुई आर्थिक स्थितियों पर और आम लोगों की कठिनाइयों पर अत्यंत चिंता प्रकट करती है। आर्थिक मंदी ने कारोबारी वर्गों की कमर तोड़ रखी है। बढ़ती हुई महंगाई ने अनिवार्य वस्तुओं तक को आम आदमी की पहुंच से बाहर कर दिया है और बेराजगारी ने नौजवानों को बेचैनी में डाल दिया है। देश का निर्यात कम हो रहा है और मौजूदा सरकार के केवल दो साल के मुद्दत में आधी हो गयी है जो चिंतनीय है । कृषि] व्यापार और औद्योगिक जैसे क्षेत्र जो अवाम के लिए रोजगार के अवसर पैदा करते हैं पतन के शिकार हैं और इन क्षेत्रों में पैदावार बढ़ाने के लिए कोई प्रभावकारी योजना नहीं है। देश में पूंजी निवेश कम हो रहा है। नये उद्योगों और व्यापार के लिए पूंजी निवेश के अवसर लगतार कम होते जा रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और राष्ट्रीय संपत्तियों के बेचने का सिलसिला और धीरे धीरे महत्वपूर्ण विभागों में विदेशी पूंजी निवेश की शुरुआत भी वे नीतियां हैं जो देश की जनता की आर्थिक परेषानियां बढ़ाने का कारण बन रही हैं। जमाअत यह महसूस करती है कि अनिवार्य सामग्रियों की कीमतों में असाधारण बढ़ौतरी का मूख्य कारण कृषि क्षेत्रों पर तवज्जोह की कमी है। इसके अतिरिक्त वायदा व्यापार जैसे कारण भी इस बढ़ौतरी के लिए उत्तरदायी हैं। इस सूरतेहाल का एक प्रतीक देश में बैंकिग व्यवस्था की स्थिति भी है। गरीब जनता के टैक्स से वसूली गयी पूंजी राष्ट्रीय बैंकों के जरिए बड़े बड़े पूंजी निवेशकों को जा रही है और ऐसे बैंकों की ओर से बड़े निवेशकों को दिये गए भारी कर्जों की राशि बढ़ती जा रही है। ये कर्जे वापस नहीं हो सकते हैं और भारतीय बैंकों के ऐसे कर्ज अब कई लाख करोड़ तक पहुंच चुके हैं जिनकी वापसी की कोई उम्मीद नहीं। जमाअत इस्लामी हिन्द सरकार को याद दिलाती है कि भारतीय संविधान की आत्मा के अनुसार देश को एक कल्याणकारी राज्य की भूमिका निभानी चाहिए। इसलिए सरकार को ऐसी आर्थिक नीतियां अपनानी चाहिए जिनसे नये धन के सृजन के प्रोत्साहन के साथ संसाधन का न्यायसंगत वितरण हो। साथ ही दौलत का बहाव अमीरों से गरीबों की तरफ हो। जमाअत मांग करती है कि कृषि\ ग्रामिण अर्थव्यवस्था और औद्योगिक क्षेत्रों पर ध्यान को बढ़ाया जाए] अप्रत्येक्ष करों का बोझ कम किया जाए] पेट्रोलियम पर ड्यूटी घटायी जाए] खाद्य सामग्रियों और अनिवार्य चीजों में सट्टाबाजी पर पाबंदी लगाई जाए और रोजगार बढ़ाने और बाजार की मंदी को दूर करने पर पूरा ध्यान दिया जाए।

मौलाना उमरी ने कहा कि सऊदी अरब में बेरोजगार हो जाने के कारण लगभग 10 हज़ार भारतीय कामगार फंस गये हैं। तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट की वजह से सऊदी सरकार ने अपने निर्माण परियोजना को बंद कर दिया। भारत सरकार ने घोषणा की है कि सभी कामगारों को अपने घर वापस लाया जाएगा। संबंधित मंत्रालय फंसे कामगारों की मदद के लिए सऊदी अरब जाएगी। चूंकि उनकी संख्या काफी अधिक है इसलिए उन्हें पानी के जहाज से लाया जाएगा। जमाअत इस्लामी हिन्द को उम्मीद है कि भारत सरकार बहुत जल्द वहां फंसे लोगों को अपने वतन वापस ले आएगी और उचित वित्तिय सहायता देकर उनके पुनर्वास के लिए शीघ्र उपाय करेगी।

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