जंग मसलों का हल नहीं….

आज़ादी के बाद से भारत , चीन और पाकिस्तान से कुल 5 जंगें लड़ चुका है जिसके नतीजे में भारत को काफी जानी और माली नुकसान हुआ था जबकि दुश्मन फ़ौज का भी भारी नुकसान रहा किन्तु मसला आज भी ज्यों का त्यों है ,पड़ोसियों के साथ भारत के रिश्ते अच्छे नहीं हैं लेकिन सात समुन्द्र पार रिश्तों की मज़बूती में कोई कमी नहीं  हैं .1947-48 की जंग में दोनों देशों की अवाम के साथ सैनिकों का  भी भारी जानी नुकसान हुआ था जिसमें भारतीय सेना के लगभग कुल 1 ,800  सैनिक शहीद हुए, और 3150 ज़ख़्मी हुए ।जबकि पाक के लगभग 4000 सैनिक मारे गए और इतने ही ज़ख़्मी हुए नतीजे में UN की मध्यस्ता से लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल (LOC) बना दी गयी जिसकी वास्तविक आज कोई हैसियत नहीं मसला ज्यों का त्यों ,आये दिन LoC पर फायरिंग दोनों जानिब से हम सुनते रहते हैं ,1965 में दोबारा जंग हुए और पाक के लगभग 8000 और भारत के 3500 जवान शहीद होगये ।फिर 1971 में तीसरी जंग हुयी जिसमें भारतीय सेना का भारी नुकसान हुआ हालाँकि बांग्लादेश के रूप में भारत को कामयाबी मिली ।

 

इस बीच 1962  में चीन के साथ हुई जंग के नतीजे में भी भारत को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था और ये वो जंगें थीं जब आधुनिक हथ्यार नहीं थे आज एटॉमिक और नुक्लेअर हथ्यारों के दौर में कितना नुकसान होता है इसके लिए हमारे सामने अरब के कई मुल्कों की मिसाल सामने है ।जो मुल्क दुनिया की तमाम नेमतों से मालामाल थे जहाँ की अवाम खुश हाल और बहाल थी आज वहां भुकमरी और मारा मरी है इंसानी लाशों के ढेर हैं लोग भीक मांगने पर मजबूर हैं खूबसूरत और हसीन इमारतें मलबे का ढेर हैं , ये दुनिआ के लिए नमूना है ।

ग़र्ज़ जंगों से मसलों का हल नहीं निकलता है बल्कि आपसी बात चीत से ही मसले हल होपाते हैं ऐसे में क्या चीन या पाक के साथ भारत की संभावित जंग को क्षेत्र के लिए लाभकारी कहना मुनासिब होगा ?क्या इससे कोई हल निकल पायेगा ? हमें लगता है जंग को हर हाल में टालने की नीति और योजना होनी चाहिए ।छोटे से कारगिल incident में Indian Army को दुश्मन के मुकाबले भारी नुकसान हुआ था ।ऐसे में कहा जासकता है की जंग मसलों का हल हरगिज़ नहीं है ।editor ‘s desk

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