नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर 12 अक्टूबर से शुरू हुआ आंदोलन तीसरे हफ़्ते में प्रवेश कर गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने लगभग 20 वर्षों बाद छात्रसंघ चुनाव कराने की मंज़ूरी दे दी है, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों ने इसे अधूरा आश्वासन बताते हुए विरोध जारी रखने का ऐलान किया है।
विवाद की असली वजह: प्रशासन ने छात्रसंघ संविधान की मंज़ूरी के 15 दिन बाद चुनाव कराने की बात कही है, लेकिन संविधान कब मंज़ूर होगा, इसकी निश्चित तारीख़ नहीं दी गई। छात्रों ने 20 दिसंबर तक संविधान को अंतिम रूप देने और चुनाव का स्पष्ट कार्यक्रम घोषित करने की मांग की है।
सोमवार को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं। रिपोर्टों के मुताबिक़ 40 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया गया। प्रशासन ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को धरनास्थल खाली करने का अंतिम नोटिस देकर क़ानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
विश्वविद्यालय ने प्रदर्शन के दौरान जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने तथा सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की जांच कराने की घोषणा की है। हालांकि, छात्रों ने निष्कासन और परिसर में प्रवेश पर पाबंदी जैसे मामलों के समाधान की मांग भी उठाई है।
ताज़ा स्थिति: आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। भूख हड़ताल जारी रहने की ख़बरें हैं और विश्वविद्यालय में ऑनलाइन कक्षाएँ 8 नवंबर तक बढ़ा दी गई हैं।
बड़ा सवाल: जब प्रशासन छात्रसंघ चुनाव के लिए सहमत है, तो क्या वह इसकी निश्चित तारीख़ घोषित करके विश्वविद्यालय में जारी गतिरोध समाप्त करेगा?