इशरत जहां एनकाउंटर पर लिखी किताब पर पाबंदी क्यों ?

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मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में बरी हुए वाहिद शेख़ की इशरत जहां एनकाउंटर पर लिखी किताब सार्वजनिक जानकारी, सीबीआई जांच और इशरत के परिजनों से बातचीत पर आधारित है. महाराष्ट्र पुलिस इससे जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दे रही यह कहते हुए कि ‘सरकार विरोधी’ है.

किताब विमोचन कार्यक्रम को हर बार रोका गया है और अब पुलिस ने चर्चा को यह कहते हुए रोका है कि पुस्तक ‘सरकार विरोधी है, इसलिए वे किताब को लेकर किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या चर्चा की अनुमति नहीं दे सकते.

26 अगस्त को मुंबई के बाहरी इलाके भिवंडी में आयोजित एक कार्यक्रम में पुलिस ने अंतिम समय में अनुमति रद्द कर दी और यह दावा किया कि इस कार्यक्रम से आसपास के हिंदू संगठनों का गुस्सा भड़क जाएगा.

आयोजक और स्थानीय अधिकार कार्यकर्ता नविद अहमद ने द वायर को बताया कि उन्होंने जरूरी अनुमति के लिए पहली बार 12 अगस्त को पुलिस से संपर्क किया था. नविद ने दावा किया, ‘मैंने एक पत्र, वक्ताओं के नाम और किताब की एक प्रति सौंपी थी. लेकिन पूरे एक हफ्ते तक पुलिस मुझसे थाने आते रहने के लिए कहती रही. उन्होंने चिट्ठी स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया.’

आख़िरकार, आयोजन से कुछ दिन पहले निज़ामपुर थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक (पीआई) ने एक पत्र जारी किया, जिसमें कार्यक्रम की अनुमति से इंकार कर दिया गया. पत्र में वही दोहराया गया कि चूंकि पुस्तक ‘सरकार विरोधी’ है और अतीत में विवाद’ पैदा कर चुकी है, इसलिए इससे आसपास के हिंदू दक्षिणपंथी समूहों को आपत्ति हो सकती है. इन कारणों से वह इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं दे सकते.

आठ महीने पहले उर्दू में प्रकाशित इस किताब की पहुंच सीमित थी और अब तक इस पर कोई खास चर्चा नहीं हुई है. द वायर ने कई बार पवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है. अगर वे जवाब देते हैं तो खबर अपडेट की जाएगी.

वाहिद शेख को 2006 में 11 जुलाई, मुंबई सीरियल ट्रेन विस्फोट मामले के आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया था. उन्हें लगभग नौ साल तक लंबी कैद का सामना करना पड़ा, जिसके बाद विशेष मकोका अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया.

जेल में रहते हुए शेख ने अपना संस्मरण लिखना शुरू किया, जो बाद में उर्दू में प्रकाशित हुआ और बाद में कई भाषाओं में उसका अनुवाद किया गया. शेख ने मामले में फंसे और दोषी ठहराए गए अन्य लोगों की पैरवी करना जारी रखा है. शेख का कहना है कि उनकी तरह मामले में दोषी ठहराए गए अन्य सभी निर्दोष हैं और मुंबई पुलिस ने उन्हें बलि का बकरा बनाया है.

पब्लिक डोमेन में मौजूद जानकारी के अनुसार, इशरत जहां एनकाउंटर पर शेख की किताब इस केस की सीबीआई जांच और इशरत की मां और परिवार के अन्य सदस्यों के साक्षात्कार पर आधारित है.

मुंब्रा की रहने वाली इशरत को जून 2004 में गुजरात पुलिस ने तीन लोगों के साथ एक ‘मुठभेड़’ में मार गिराया था. इस बारे में हुई मजिस्ट्रियल जांच, एसआईटी जांच और सीबीआई जांच, सभी ने निष्कर्ष दिया था कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था और पुलिस का दावा कि ‘आत्मरक्षा’ में इशरत पर गोली चलाई गई थी, झूठा था. Curtesy The वायर

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