अमेरिका ईमानदारी दिखाए तो कूटनीतिक वार्ता को एक और मौका देने को ईरान तैयार : अब्बास अराघची

तेहरान, 22 अक्टूबर । ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि यदि अमेरिका विश्वास बहाली और उचित समाधान निकालने के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाता है तो तेहरान कूटनीतिक बातचीत को एक और मौका देने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन ने फिर से सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना, तो उसे पहले से भी बड़ी रणनीतिक विफलता का सामना करना पड़ सकता है।

के अनुसार अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि ईरान शांतिपूर्ण और कूटनीतिक समाधान के पक्ष में है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपनी नीयत और प्रतिबद्धता का ठोस प्रमाण देना होगा।

उन्होंने कहा, “यदि हमें अमेरिका की ओर से विश्वास कायम करने और किसी उचित समाधान तक पहुंचने की सच्ची इच्छा के ठोस सबूत मिलते हैं, तो ईरान कूटनीति को एक और मौका देने के लिए तैयार है।” साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि कूटनीति के बजाय युद्ध का विकल्प चुनने पर अमेरिका को और बड़ी रणनीतिक विफलता झेलनी पड़ सकती है।

ईरानी विदेश मंत्री ने इसको लेकर अपने हालिया आलेख का लिंक भी साझा किया। इस लेख में उन्होंने संघर्ष को लेकर ईरान का रुख, बातचीत की संभावनाएं और अमेरिकी सैन्य धमकियों के संभावित परिणामों पर विस्तार से चर्चा की है। अपने लेख में उन्हाेंने दोहराया कि ईरान सम्मानजनक और स्थायी कूटनीतिक समाधान चाहता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि देश अपनी संप्रभुता, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

उनके अनुसार, बातचीत के दौरान बार-बार सैन्य कार्रवाई किए जाने से अमेरिका पर ईरान का भरोसा कमजोर हुआ है। तेहरान का मानना है कि सार्थक वार्ता के लिए सैन्य दबाव और धमकियों के बजाय आपसी विश्वास बहाल करना जरूरी है।

अराघची ने बताया कि ईरान ने मध्यस्थों के माध्यम से संघर्ष समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के उद्देश्य से सात दिन की योजना का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, उनके दावे के अनुसार अमेरिका ने किसी ठोस समझौते की दिशा में पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने अमेरिकी परिवारों पर संघर्ष के आर्थिक प्रभावों का भी उल्लेख किया और कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने अपने सैन्य अभियानों के परिणामों का सही आकलन नहीं किया है।

अराघची के बयान से संकेत मिलता है कि ईरान बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता, लेकिन वह इसके लिए अमेरिका से ठोस कदमों और भरोसेमंद रुख की अपेक्षा करता है। उन्हाेंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देता है, तो समझौते की संभावना बनी रह सकती है। इसके विपरीत, सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होने पर संघर्ष और गहरा सकता है तथा अमेरिका को गंभीर रणनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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