चीन की दादागीरी रोकने के लिए आठ वर्ष की योजना बनाएंगे भारत और वियतनाम.

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जनरल जियांग के बीच बैठक में 2030 तक द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी पर साझा विजन दस्तावेज पर भी हस्ताक्षर हुए। हिंद-प्रशांत में चीन की बढ़ती दादागीरी को देखते हुए इससे दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में रक्षा व सुरक्षा सहयोग और बढ़ाने में मदद मिलेगी।

वियतनाम उन देशों में शामिल है जिनके साथ दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन का विवाद चल रहा है। वहीं, लद्दाख और अरुणाचल को लेकर भारत के साथ भी चीन के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों मंत्रियों ने वियतनाम भारत से मिलने वाले 50 करोड़ डॉलर के रक्षा ऋण को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति जताई। इसके अलावा रक्षा साझेदारी को समृद्ध करने के लिए आगे के रास्ते तलाशने पर भी सहमति जताई गई है.

राजनाथ सिंह ने जियांग से भेंट के बाद कहा वियतनाम के साथ भारत के करीबी सुरक्षा संबंधों से हिंद-प्रशांत में स्थिरता आएगी। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह मंगल को तीन दिनी दौरे पर हनोई पहुंचे और इस दौरान राष्ट्रपति नुयेन शुआन फुक से भी भेंट की। दोनों नेताओं के बीच संपूर्ण रणनीतिक संबंधों को लेकरवियतनाम, आसियान (दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्र संगठन) का एक अहम देश है और उसका दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन के साथ क्षेत्रीय विवाद है।

भारत, दक्षिण चीन सागर में वियतनामी समुद्र क्षेत्र में तेल निकालने संबंधी परियोजनाएं चला रहा है। भारत और वियतनाम साझा हितों की रक्षा के वास्ते पिछले कुछ वर्षों में अपने समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रौद्योगिकी विकास कोष योजना के तहत हर परियोजना की फंडिंग 10 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये करने को मंजूरी दे दी है। इससे देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान के जरिए दी है।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की ओर से संचालित टीडीएफ योजना, एमएसएमई और स्टार्ट-अप द्वारा उत्पादों, प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास के लिए सहायता देती है। 2022-23 के बजट में रक्षा अनुसंधान और विकास के लिए आवंटित राशि का एक चौथाई हिस्सा निजी उद्योग, स्टार्ट-अप और अकादमियों के लिए निर्धारित किया गया था।

मंत्रालय के मुताबिक, टीडीएफ के तहत बढ़ी फंडिंग बजट घोषणा के अनुरूप है और यह रक्षा में आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को बढ़ावा देगी।

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