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हिन्दू राजाओं द्वारा मंदिर तोड़ने का इतिहास , एक सच

हिन्दू राजाओं द्वारा मंदिर तोड़ने का इतिहास , एक सच

Ali Aadil Khan

Editor’s Desk

हिन्दू राजाओं द्वारा मंदिर तोड़ने का इतिहास , एक सच

केरल के श्री पद्मणेश्वर मंदिर से 1 ,20 ,000 करोड़ की धन-संपत्ति मिली

ज्ञानव्यापी मस्जिद के बारे में औरंगज़ेब के काल की तारिख को जान्ने से पहले यह भी समझना ज़रूरी है कि कश्मीर के 11वीं सदी के शासक राजा हर्षदेव सहित अनेक हिन्दू राजाओं ने संपत्ति के लिए मंदिरों को लूटा और कई को नष्ट भी किया. मराठा सेनाओं ने टीपू सुल्तान को नीचा दिखाने के लिए मैसूर के श्रीरंगपट्टनम मंदिर को ध्वस्त कर दिया था .

इसके अलावा सन 642 में पल्लव राजा नरसिंहवर्मन ने चालुक्यों की राजधानी वातापी में गणेश के मंदिर को लूटा और उसके बाद उसे ध्वस्त कर दिया . आठवीं सदी में बंगाली सैनिकों ने विष्णु मंदिर को तोड़ा.

9वीं सदी में पांड्य राजा सरीमारा सरीवल्लभ ने लंका पर आक्रमण कर जो भारत का ही हिस्सा था वहां सभी मंदिरों को नष्ट कर दिया. 11वीं सदी में चोल राजा ने अपने पड़ोसी चालुक्य, कालिंग, और पाल राजाओं से क़ीमती मूर्तियां को छीन कर अपने राजधानी मे लाकर रख लीं .

11वीं सदी के मध्य में राजाधिराज ने चालुक्य को हराया और शाही मंदिरों को लूट कर उनका विनाश कर दिया. 10वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट राजा इंद्र तृतीय ने जमुना नदी के पास कल्पा में कलाप्रिया मंदिर को नष्ट कर दिया.

असल में मंदिरों को लूटने की एक वजह यह थी की यहाँ बहुत धन इकठ्ठा होता था , आज भी अगर देखें तो केरल के श्री पद्मणेश्वर मंदिर से 1 ,20 ,000 करोड़ की धन-संपत्ति मिली थी .भारत के मंदिरों में संपत्ति का जमा होना पुराण इतिहास और भारत पर आक्रमण होने का एक कारण ये संपत्ति रहा है न की किसी एक धर्म का विरोध और किसी दुसरे धर्म का प्रचार इत्यादि .

एक बड़ी सच्चाई को सामने रखते हुए ‘हिन्द स्वराज ‘ नामी पुःतक में महात्मा गांधी लिखते हैं ‘‘मुस्लिम राजाओं के शासनकाल में हिन्दू समाज फला फूला जबकि हिन्दू राजाओं के राज में मुसलमान. दोनों ही पक्षों को यह अच्छे से पता था कि आपस में लड़ना आत्मघाती होगा और यह भी कि दोनों में से किसी को भी हथियारों के दम पर अपने धर्म का त्याग करने पर मजबूर नहीं किया जा सकता.

लेकिन दोनों समुदायों का आपसी सामंजस्य और सोहार्द व् सांप्रदायिक सद्भाव अँगरेज़ सम्रज्य्वादी शासन के लिए यह घाटे का सौदा था लिहाज़ा इस शांतिपूर्ण माहौल में अंग्रेजों ने विघ्न डाला और उन्हें एक-दूसरे से लड़वाना शुरू कर दिया.” इसके लिए Divide and Rule का फार्मूला सबसे ज़्यादा रास आया . आज अंग्रेज़ों की उसी नीति को देश में follow किया जा रहा है ,जो एक जमात को रास आ गयी है लेकिन देश लगातार कमज़ोर होता जा रहा है ,और दुश्मन को इसका पूरा लाभ मिल रहा है .

ताज महल भले विवादों में चल रहा हो किन्तु पुरातत्व विभाग के इस धरोहर से भारत को हर साल लगभग 50 से 55 करोड़ की आमदनी होती है . 2018 -19 में यह आमदनी बढ़कर 75 करोड़ पहुँच गयी . इसके अलावा मशहूर ट्रैवल ऑनलाइन कंपनी ट्रिप एडवाइज़र ने 2018 ट्रैवलर्स च्वाइस अवॉर्ड में ताज महल को दुनिया का छठवां और एशिया के दूसरे लैंडमार्क से नवाज़ा है.

देश को Tourism से होने वाली आमदनी और दुनिया में भारत के धरोहर की शोहरत से आखिर इन सस्थाओं को किस बात की जलन है ? देश में झूठे और फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद के नाम पर अखंड भारत को खंडित करने वालों की योजना देश को बर्बाद करने की नज़र आती है . जो हुकूमतें मोहब्बतों यानि लव के ख़िलाफ़ , हया और लज्जा यानि परदे के ख़िलाफ़ , अज़ान , भजन कीर्तन के ख़िलाफ़ क़ानून बनाती हो ऐसे योजना कर्मीयों की नीयत से साफ़ ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है और फिर देश के भविष्य को अंधेरों से कोई नहीं बचा सकता .

देश की कुछ संस्थाएं अम्न , शांति और विकास की जगह नफ़रत , द्वेष और विनाश का माहौल बनाये रखना चाहती हैं , अवामी मुद्दों से भटका कर , सांप्रदायिक और धार्मिक मुद्दों में जनता को उलझाए रखना उनकी योजना का हिस्सा है , जिसको सियासी संरक्षण प्राप्त है . ऐसी संस्थाएं और सोच देश के दुश्मनो के एजेंट के सिवा और कुछ नहीं हो सकती जो लगातार धार्मिक और जातीय नफरत के ज़रिये उन्माद को ज़िंदा रखने में व्यस्त है .

क्या देश की वर्तमान राजनीती फिर किसी महामारी को निमंतरण की खोज में है ? अभी तैरती लाशों का मंज़र नज़र से पूरी तरह ओझल भी नहीं हुआ है कि ज्ञानव्यापी मस्जिद जैसे गड़े मुर्दे उखाड़ने की पुनरावृत्ति शुरू हो गयी है .

वैसे किसी ने बड़ा सही कहा था कि जो काम आपदाओं के चलते किये जा सकते हैं वो नार्मल हालात में करने मुमकिन नहीं हैं , अब जिस प्रकार देश में राम मंदिर की आंधी के बाद ज्ञानव्यापी मस्जिद के मुद्दे पर देश की मीडिया को लगा कर एक बड़ी आपदा या मुद्दा बना दिया गया है और इसी दौरान चुपके से चीन की कंपनी को 38000 रेल के पहिये बनाने का कारोबार दे दिया गया है .यानी दुश्मन देश के साथ कारोबारी संधियां की जा रही है.

और आपदा में अवसर तलाश लिया गया है .अगर समय रहते देश की जनता नहीं उजागर हुई तो हालात बाद से बदतर होते चले जाएंगे और देश विनाश की ओर बढ़ता जाएगा जिसके बाद सुरक्षित और सुकून से कोई नहीं होगा .

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