गुरुग्राम पीड़ित परिवार पर टूटा एक और पहाड़

Date:

 

गुरुग्राम पीड़ित परिवार ने इंसाफ़ के लिए लगाई गुहार , SDM को ज्ञापन पेश

उसी का शहर , वोही मुद्दई , वोही मुंसिफ़ ।
हमें यक़ीन था क़ुसूर हमारा ही निकलेगा ॥

गुरुग्राम //टॉप रिपोर्टर :देश भर में जहाँ एक ओर लोकतांत्रिक पर्व यानी लोक सभा आम चुनाव की तैयारियां ज़ोरों पर हैं ऐसे में वोट ध्रुवीकरण के लिए समाज को धर्मों , जातियों और वर्गों में बांटने का घिनोना खेल भी साथ ही चल रहा है .इस के चलते गुरुग्राम के भूप सिंह गॉंव में एक दलित परिवार पर जान लेवा हमले में ६ लोग गंभीर रूप से घायल होगये .

इलाक़े में अल्पसंख्यकों पर होन वाले ज़ुल्म व् ज़्यादती और मुखतय: भूप सिंह गांव के पूरे मामले में गहरी नज़र रखने वाले तथा क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए प्रतिबद्ध शेह्ज़ाद खान (मुस्लिम माइनॉरिटी मंच के चेयरमैन ) ने बताया कि अल्पसंख्यकों पर पिछले ३ वर्षों में होने वाले हमलों में यह हमला अत्यंत भयावय था और इसमें कई जाने जासकती थीं , किन्तु ऊपर वाले की मर्ज़ी से ये बच गए मगर परिवार टूट चूका है , भयभीत है .

शेह्ज़ाद खान का कहना है की हमारी पूरी कोशिश है की पीड़ित परिवार को सांत्वना के साथ इन्साफ दिलाया जाए और उनकी होंसला अफ़ज़ाई भी कि जाए . खान का यह भी कहना है की इस सम्बन्ध में उनके पास इलाक़े के सभी समुदायों के ज़िम्मेदारों के फ़ोन और messages भी आरहे हैं की हम आपके साथ मिलकर इस मामले के पीड़ितों को सांत्वना दें और उनकी हिम्मत बँधायें , उन्होंने कहा हमारी कोशिश है की क्षेत्र में अम्न व् शान्ति के साथ सांप्रदायिक सद्भाव भी बनाये रखा जाये , खान ने कहा इसके लिए उनकी पूरी कोशिश जारी है।और वो हर प्रकार की सहायता भी देने का आश्वासन दे चुके हैं .उन्होंने कहा इस मामले में सबसे दुखद बात यह है की सत्ता धारी पार्टी का कोई नेता पीड़ित परिवार के पास रिपोर्ट लिखने तक नहीं आया था .यह अत्यंत अफसोसनाक है इस से पता चलता है की हमलावरों को सत्ता पक्ष का संरक्षण होसकता है . किन्तु Times Of Pedia (TOP ) न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है .

इस पूरे मामले की पत्रकारिक जांच के लिए टाइम्स ऑफ़ पीडिया (TOP) की स्पेशल टीम मौक़ा ए वारदात पर पहुंची थी और तमाम जानकारी हासिल की ,जिसमें टाइम्स ऑफ़ पीडिया ने पाया की पहली नज़र में पीड़ित परिवार के साथ इलाक़े के लोगों की हमदर्दी दिखाई दी ,साथ ही इलाक़े के कई हिन्दू परिवार पीड़ित परिवार से मिलने पहुँच रहे थे .जिससे साफ़ ज़ाहिर था मामला सांप्रदायिक नहीं था .

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अपराधियों को गिरफ्तार भी किया , हालांकि टाइम्स ऑफ़ पीडिया की टीम ने अपना शक ज़ाहिर करते हुए कहा था ऐसा मालूम होता है की पुलिस पर राजनितिक दबाव के चलते इस पूरे मामले को क्रॉस केस में बदला जा सकता है . जिसका इशारा पुलिस इंस्पेक्टर के साथ बातचीत में टॉप न्यूज़ की टीम को मिल गया था .जबकि सुबूत के तौर पर वीडिओ फुटेज पूरी दुनिया ने देखी है , और वही विडिओ पुलिस को भी सौंपी गयी थी , प्रत्यक्ष को प्रमाण की भी आवश्यकता पड़ने लगेगी तो देश कैसे चलेगा साहब ?, और प्रत्यक्षता होने की क्या अहमियत रेह्जाएगी ? जांच के सम्बन्ध में पुलिस द्वारा ढिलाई और देरी असंवैधानिक होसकती है , जबकि हमलावर पास ही के गॉंव के बाशिंदे हैं , हालाँकि इस पूरे मामले की जुडिशियल रिपोर्ट आना अभी बाक़ी है .

साथ ही TOP News की टीम ने यह भी पाया की पीड़ित परिवार को प्रलोभन के साथ समझौते की कोशिश कि जारही है . और ऐसा न करने पर आइंदा के लिए देखने की धमकी का भी इशारा मिला है . इस सम्बन्ध में न्यायिक सलाह के लिए पहुंचे एडवोकेट असद हयात और उनकी टीम ने बताया अगर case की निष्पक्ष जांच हो तो अपराधियों को 10 साल तक की जेल होसकती है .एडवोकेट हयात ने कहा की इससे पहले हरयाणा में होने वाले मोब लिंचिंग या दुसरे दंगों में मारे गए अल्पसंख्यक समाज के लोगों को इन्साफ नहीं मिला है उसकी वजह पुलिस का दोहरा रवैया है ,जो केस की बुनयादी रिपोर्टिंग ही इन्साफ व् निष्पक्षता से नहीं करती .

एडवोकेट हयात ने यह भी कहा की फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट के अभाव के चलते फैसले बहुत देरी से होते हैं और “justice delayed justice denied ” भी है . उन्होंने कहा हमारी न्यायिक प्रणाली में इतने लूप होल्स हैं की देश में लाखों केस हर साल पेंडिंग होजाते हैं और यह संख्या बढ़ती ही जा रही है .जिसपर कई पूर्व न्यायधीश , तथा मुख्य नयायधीश अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं .

आपको बता दें होली के दिन गुरुग्राम , के भोंडसी थाना के अंतर्गत भूप सिंह गाँव के एक अल्पसंख्यक परिवार पर पड़ोस के ही एक गाँव के दर्जन भर सर फिरे युवाओं ने घर में घुस कर तांडव मचाया था ।
जिसके चलते पीड़ित परिवार के 6 मर्दों को भँभीर चोटें आई थीं ,जबकि कई औरतों और बच्चों को भी इस कायरता पूर्ण हमले में नहीं बख्शा गया था, जिसकी पूरी दुनिया ने निंदा हुई ।

इस घटना के बाद इलाक़े में दहशत का माहौल था , और इलाक़े की फ़िज़ा को सांप्रदायिक बनाने की कोशिश की जारही थी ।किन्तु अल्पसंख्यक परिवार और समझदार लोगों की सूझ बूझ से मौक़ा परस्त सियासी गुंडों को मुंह की खानी पड़ी थी .और इलाक़ा सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलसने से बच गया .

इसी सम्बन्ध में इत्तला मिली की पीड़ित परिवार के ऊपर भी अपराधी परिवार की ओर से FIR कराई गयी है जिसको भोंडसी ठाणे में पुलिस द्वारा बाक़ायदा दर्ज कर लिया गया है . इसके बाद अल्पसंख्यक परिवार में एक बार फिर मायूसी छा गयी , हालाँकि Times Of Pedia की टीम को ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान पता चला था की झगडे के शुरूआती दौर में दोनों ओर से पथराव हुआ था जिसमें हमलावर गुट के भी किसी व्यक्ति के सर में चोट लगने का समाचार सही होसकता है , किन्तु यह मैदान में दो गुटों के बीच हुयी पत्थर बाज़ी का नतीजा था .

इस सम्बन्ध में सोमवार को पीड़ित परिवार ने प्रेस कांफ्रेंस करके मीडिया को सचाई से अवगत कराने की कोशिश की , उसके बाद इलाक़े के कई ज़िम्मेदार लोगों के साथ सोहना की एसडीएम डॉ. चिनार चहल को अपना ज्ञापन सौंपा और अपनी बात उनके समक्ष रखी .  SDM ने प्रतिनिधि मंडल और परिवार को कहा की वो आला हुक्काम तक उनकी अर्ज़ी पहुंचाएंगी मगर यह सारा मामला पुलिस की जांच पर निर्भर करेगा . SDM डॉ चिनार ने कहा की वो इस पूरे मामले की जांच के लिए किसी आला अफसर की निगरानी में इसकी जांच करने की पृकिर्या तैयार करेगी .

अब देखना यह होगा की जितने केस भी आज तक हरयाणा या देश के दुसरे हिस्सों में मोब लिंचिंग , घरों में घुसकर लूट पात , दुकानों और कारोबार संस्थानों में आग जानी या लूटपाट , औरतों छोटी बच्चियों या बच्चों के साथ रपे और मर्डर , दलितों , अल्पसंख्यकों व् आदिवासियों के साथ पक्षपात और अपराध तथा अभद्र भाषा का इस्तेमाल , फेक एनकाउंटर्स या अन्य अपराधी घटनाओं में सरकारों द्वारा उठाये गए क़दम कितने उपयोगी रहे .हालिया दिनों में में नफरत और खौफ के माहौल में हुयी आपराधिक घटनाओं पर क्या अपराधियों को सजा हो पाई या चाँद दिन की ख़बरों की सुर्खियां बनकर सभी अपराधी अपने सियासी आकाओं के चुनाव की तैयारियों में जुट गए .

यह सवाल हमेशा देश के सामने बना रहेगा की सरकार चाहे जिसकी हो इन्साफ हुआ की नहीं , पार्टियों के नेताओं द्वारा किये गए वादों को अमल में लाया गया की नहीं .रोज़गार के अवसर , विकास , सांप्रदायिक सद्भाव और अम्न आया की नहीं .किसान , मज़दूर , महिला , शिक्षक और जवानो तथा आर्मी के जवानो , पेरा मिलटरी के जवानो को कितनी सुविधाएं प्राप्त हुई ? रेलवे , राज्य परिवहन सेवाओं में सुधार हुआ की नहीं ?इत्यादि . टॉप ब्यूरो

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

Iran Turns to Russia as Fragile Ceasefire Faces New Strain

Pakistan and Oman continue to play a quiet but...

Legal Seminar on Electoral Reforms Held in Delhi

PRESS RELEASE Legal seminar on 'Electoral Reforms and Empowering the...

बंगाल के पहले चरण पर इससे सटीक विश्लेषण नहीं हो सकता

1st फेज़ की बम्पर पोलिंग की हर तरफ चर्चा...

बाज़ी हारने वाले को बाज़ीगर नहीं कहते

17 अप्रैल को सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी, अपने 11...