हिसार : विभाजन की पीड़ा को याद रखना नई पीढ़ी के लिए जरूरी : उपायुक्त महेंद्र पाल

वाले लोगों तथा विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विभाजन की त्रासदी, पीड़ित परिवारों के संघर्ष और उनके त्याग

को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त महेंद्र

पाल ने कहा कि 14 अगस्त 1947 को हुआ देश का विभाजन इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदियों

में से एक था। लाखों लोगों को रातों-रात अपना घर, जमीन और कारोबार छोड़कर अनजान स्थानों

की ओर पलायन करना पड़ा। इस दौरान असंख्य परिवार बिछड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों

ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा और उससे जुड़े इतिहास को याद रखना

केवल अतीत को स्मरण करना नहीं, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को एकता, अखंडता,

भाईचारे और सामाजिक समरसता का महत्व समझाना भी है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा समाज और

राष्ट्र बनाना है, जहां आपसी सौहार्द और मानवता सर्वोपरि हो।

इस अवसर पर उपायुक्त महेंद्र पाल ने विभाजन की

त्रासदी झेल चुके विस्थापित परिवारों के सदस्यों से मुलाकात की और उनके अनुभव सुने।

उन्होंने कहा कि इन परिवारों ने विपरीत परिस्थितियों में साहस और संघर्ष का परिचय देते

हुए न केवल अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया, बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान

दिया।

कार्यक्रम में अतिरिक्त उपायुक्त शालिनी चेतल,

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुभाष चंद्र, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी

नरेंद्र कुमार सहित विभाजन पीड़ित परिवारों से जुड़े जयकिशन गिरधर, पूर्ण देवी, नरेश

मेहता, इकबाल सिंह, राजेश अरोड़ा, शम्मी नागपाल, ज्ञानचंद ग्रोवर, वीना ग्रोवर, नेहा

रानी ग्रोवर, वेदिका ग्रोवर, ओमप्रकाश मलिक, ईश कुमार आर्य, गोपाल दास मनचंदा, चंद्रभान

गांधी, विनोद कुमार गांधी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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