द्वारका कोर्ट का क़ब्रिस्तान के सम्बन्ध में तारीख़ी फ़ैसला

Date:

डाबड़ी क़ब्रिस्तान के मुकदमे में मुस्लिम वर्ग को अदालत से मिली कामयाबी , वक़्फ़ क़ब्रिस्तान कर्बला कमिटी की जानिब से एडवोकेट रईस अहमद सम्मानित

क़ब्रिस्तान वक़्फ़ कमिटी की जानिब से अधिवक्ता रईस अहमद को सम्मानी करते कमिटी के सदस्यगण

 

नई दिल्ली टॉप ब्यूरो: देश में क़ब्रिस्तान और शमसान वाले मुद्दों को राजनीती के भिखारी भले अपने चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल करती रहे . किन्तु धार्मिक मामलों में अभी भी जनता का भरोसा अदालतों पर बना हुआ है . जबकि यह भी सच है की अदालतें शासन के दबाव में काम करती हैं .और कभी कभी बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को सामने रखकर फैसले लिए जाते हैं.

ऐसे में दक्षिण पश्चिमी दिल्ली के द्वारका कोर्ट में चल रहे डाबड़ी वक़्फ़ क़ब्रिस्तान के मुक़दमे में वक़्फ़ क़ब्रिस्तान कर्बला कमिटी को राहत देते हुए प्रतिवादी अवैध कमिटी के खिलाफ मुक़दमें में कोर्ट ने मुंसिफाना फैसला सुनाते हुए अवैध कमिटी की अर्जी ख़ारिज कर दी।

गौरतलब है कि अवैध कमिटी के द्वारा दायर मुक़दमे को तीन तारीख़ों में ही ख़ारिज करवाकर, बड़े क़ब्रिस्तान में दफ़न की इजाज़त के लिए वक़्फ़ क़ब्रिस्तान कमिटी की तरफ से एडवोकेट रईस अहमद द्वारा मुकदमा दायर किया गया था.

जिसके ख़िलाफ़ मुक़दमा ख़ारिज करने के लिए अवैध कमिटी ने अर्ज़ी दी थी जिसे कोर्ट ने ख़ारिज करते हुए वक़्फ़ क़ब्रिस्तान कमिटी के हक़ में फैसला सुनाया है .अदालत ने अपने आदेश में डाबरी वक़्फ़ क़ब्रिस्तान को निजी न मानते हुए, 100 साल पुरानी दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति क़रार दिया।

इसी सिलसिले में डाबड़ी क़ब्रिस्तान की वक़्फ़ कमिटी ने एडवोकेट रईस अहमद को उनकी कर्मठता और पेशेवराना महारत के लिए ऐतिहासिक जीत पर सम्मानित किया . साथ ही लीगल टीम के वकीलों एन सी शर्मा, शिव कुमार चौहान, पंकज भारद्वाज, असलम अहमद, तारिक़ फ़ारूक़ी व अन्य का भी आभार व्यक्त किया।

इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद इक़बाल, उपाध्यक्ष अहमद अली व मोहम्मद सुल्तान, अनवर, ज़हीर खान, महफूज़ उर्फ पप्पू, व अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।क़ब्रस्तान समिति ने द्वारका कोर्ट का शुक्रिया अदा किया और भविष्य में भी अदालतों पर भरोसा रखने के लिए जनता को प्रेरित किया . टॉप ब्यूरो

 

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

आरएसएस-भाजपा और अमेरिका की दासता की ओर बढ़ता भारत

स्वतंत्रता के बाद भारत की  विदेश नीति गुटनिरपेक्षता के...

वेबवार्ता द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस पर भव्य आयोजन

पत्रकारिता के सामने अनेक चुनौतियां हैं, जिनका समाधान ज़रूरी:...

शिक्षकों को भूसा इकठ्ठा करने पर क्यों लगाया?

उत्तर प्रदेश का शहर बरैली पिछले कई बरसों से...

Human Rights vs Funding: 558 UP Madrasas Case

Human Right never intersects with financial transactions: understanding law...