डिजिटल माध्यम से किसानों तक कृषि सलाह पहुंचाने पर मंथन : डॉ. राघवेंद्र सिंह

कानपुर, 01 अक्टूबर । किसानों तक कृषि संबंधी ज्ञान, विशेषज्ञ सलाह और समस्या समाधान सेवाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक सुलभ बनाया जा सकता है। किसान सारथी जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए किसान अपने सवालों का संबंधित विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त कर रहे हैं। यह बातें गुरुवार को आईसीएआर-अटारी कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने एग्रीगुरु पार्टनर फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में कहीं।

किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान उपलब्ध कराने के साथ डिजिटल तकनीक के जरिए कृषि विस्तार सेवाओं की पहुंच बढ़ाने को लेकर आईसीएआर-अटारी, रावतपुर में एग्रीगुरु पार्टनर फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता अटारी कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने की।

बैठक में एग्रीगुरु पार्टनर फाउंडेशन की ओर से इजरायल के अमित सुस्मान और क्ररी लेवेंटन के साथ सौरभ कुमार यादव व अंजलि मिश्रा शामिल हुए। अटारी कानपुर से प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सिंह, वैज्ञानिक डॉ. सीमा यादव और डॉ. प्रीति यादव मौजूद रहीं।

एग्रीगुरु पार्टनर फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने व्हाट्सएप आधारित चैटबॉट की कार्यप्रणाली और किसानों के लिए इसकी उपयोगिता का प्रस्तुतीकरण किया। बताया गया कि किसान व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी कृषि संबंधी समस्याएं साझा कर सकेंगे। जरूरत के अनुसार फोटो, वीडियो और फोन कॉल के जरिए भी समाधान प्राप्त किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य किसानों को समयबद्ध और सुलभ डिजिटल कृषि सलाह उपलब्ध कराना है।

प्रतिनिधियों ने सीतापुर जिले में किसानों, कृषि विभाग के अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ किए गए संवाद तथा व्हाट्सएप चैटबॉट के व्यावहारिक उपयोग के अनुभव भी साझा किए। इन अनुभवों के आधार पर डिजिटल माध्यम से किसानों तक कृषि सलाह पहुंचाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

इस दौरान डॉ. राघवेंद्र सिंह ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से संचालित किसान सारथी डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और उपयोगिता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान सारथी के माध्यम से किसान कृषि संबंधी प्रश्नों का संबंधित विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त कर रहे हैं।

बैठक में एग्रीगुरु के व्हाट्सएप चैटबॉट और किसान सारथी के माध्यम से कृषि ज्ञान, विशेषज्ञ सलाह और समस्या समाधान सेवाओं को किसानों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

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