दिल्ली के सफदरजंग में यूनानी,आयुर्वेद, सिद्धा का जलवा

योग और होमियोपैथी को भी देश की जनता ने स्वास्थ्य के मैदान बनाया है अपनी पसंद

नई दिल्ली : 08 -11 -2021
यूँ तो भारतवर्ष में आयुर्वेद और यूनानी तथा सिद्धा से रोगियों की चिकित्सा प्रणाली प्राचीन समय से अपनी सेवाएं देती आ रही है | किन्तु पिछले 250 वर्षों से ऐलोपैथी ने चिकित्सा में अपना एक स्थान बनाया है जिसमें मुख्यतय सर्जरी चर्चा का विषय रही है हालांकि अब सर्जरी को आयुर्वेद में बाकायदा एक स्थान मिला है जबकि यूनानीपैथी को इससे वंचित रखा गया है |

जबकि ऑल इंडिया यूनानी टिब्बी कांग्रेस चिकित्सा प्रणाली को, देश तथा विदेशों में प्रचलित करने के लिए कार्यरत है और लगातार प्रयास करती रही है |इसी बीच Sep . 2019 में दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में यूनानी और सिद्धा के केंद्रों का भी उदघाटन किया गया था |जिसके बाद से काफी मरीज़ पुराण चिकित्सा पढ़ती का भी अब लाभ उठा रहे हैं .

इसमें मुख्यतय सफदरजंग यूनानी सेण्टर के HOD डॉ.सय्यद खान और AIUTC के अध्यक्ष डॉ. मुश्ताक़ अनथक प्रयासों से यूनानी के माध्यम से देश को स्वस्थ बनाने में अपनी सेवाएं लगातार दे रहे हैं |डॉ सय्यद ने बताया हालिया वर्षों में यूनानी और आयुर्वेदा तथा नेचुरल पैथी की तरफ हमारे मरीज़ों का रुझान बढ़ा है .डॉ सय्यद ने कहा यूनानी चिकिस्ता केंद्रों , फार्मेसी तथा अस्पतालों के सकारात्मक नतीजों के बावजूद इसको अनदेखा किया जाना हमारे लिए चिंता का विषय है जिसके सम्बन्ध में हम सम्बंधित मंत्रालय तथा अधिकारीयों को सूचित करते रहे हैं किन्तु कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया गया है .लेकिन हमें उम्मीद है की AIUTC यूनानी चिकित्सा को स्वास्थ्य के मैदान में उसका स्थान दिलाकर रहेगी .

हालिया दिनों में हरयाणा राज्य के नूह इलाके में यूनानी के एक अस्पताल की स्थापना राज्य में यूनानी की तरफ बढ़ती दिलचस्पी और AIUTC की कोशिशों का एक नमूना है जिसको AIUTC पूरे देश में चिकित्सा के मैदान में मील के पत्थर के रूप में देख रही है |

यूनानी और आयुर्वेदा के प्रोत्साहन के सम्बन्ध में दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में यूनानी सेण्टर के HOD की ओर से एक प्राइवेट विचार गोष्ठी रखी गई जिसमें यूनानी, सिद्धा तथा आयुर्वेदा के चिकित्सकों के साथ दिल्ली के पत्रकार बंधू भी शामिल हुए जिनमें मुख्यतय: डॉ.सय्यद खान, A&S Pharmacy के अताउर्रहमान अजमली, हरयाणा राज्य AIUTC के महा सचिव डॉ. अरशद ग़यास तथा सिद्धा सेंटर के HOD डॉ. आर मैनिकतगम, टाइम्स ऑफ़ पीडिया के एडिटर-इन-चीफ अली आदिल खान, मेरा वतन रोज़नामा के एडिटर-इन-चीफ अरशद फरीदी, आयुर्वेद के डॉ.सचदेवा के अलावा कई और विशेषज्ञों ने शामिल रहने का आश्वासन दिया किन्तु मसरूफ़ियत की वजह से न आ सके |

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