दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से CJI का इनकार, प्रदर्शनकारियों को नहीं मिली राहत, CJI की टिप्पणी पर उठे सवाल, कहा ‘वक्त बर्बाद मत कीजिए’
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह प्रदर्शन कथित परीक्षा पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने आग्रह किया कि मामले को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। वकील ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की सख्ती के वीडियो सबूत मौजूद हैं और अदालत उन्हें देख सकती है।
हालांकि, इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा, “कृपया अपना समय बर्बाद मत कीजिए और हमारा समय भी बर्बाद मत कीजिए। आपका समय हमारे समय से ज्यादा कीमती है।”
वकील ने अदालत को बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में नीट परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से कराने, बार-बार पेपर लीक की घटनाओं के मद्देनज़र राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग शामिल है।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग और लाठीचार्ज किया, जबकि पुलिस का कहना है कि उसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की।
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से पुलिस कार्रवाई के वीडियो देखने का अनुरोध किया, तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।”
गौरतलब है कि सोमवार को “संसद चलो” मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और सीजेपी के प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बल का इस्तेमाल किया गया।
इस घटना के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ-साथ फिल्म जगत की कई हस्तियों ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा की मांग उठाई।
उधर, मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस घटनाक्रम पर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर से सामने आई तस्वीरें और प्रत्यक्षदर्शियों की रिपोर्ट भारत में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के बोर्ड चेयरपर्सन आकार पटेल ने कहा, “जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से सामने आई तस्वीरें और रिपोर्ट इस बात का संकेत देती हैं कि भारत में शांतिपूर्ण विरोध की आवाज़ को दबाया जा रहा है।”
हालांकि, इस मामले में दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी थी और कार्रवाई परिस्थितियों के अनुसार की गई। मामले को लेकर विभिन्न पक्षों के दावे सामने आए हैं, जिन पर बहस जारी है।